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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   An eye on the social and political situation of voters of agra mathura and firozabad on the pretext of the upcoming UP election

यूपी का रण : ...तो गुगली झेलेंगे प्रत्याशी, आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद के मतदाताओं ने कही मन की बात

Sat, 01 Jan 2022 06:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 01 Jan 2022 06:29 AM IST
सार

कहीं रैली का जोर, तो कहीं रथ का शोर। जनता के द्वार पर भी मनुहार चल रही है। कसमें-वादे हो रहे हैं। मतदाता गोल-गोल बोल रहे हैं। कुछ तौलकर भी। मतदाताओं के हर शब्द के अपने मायने हैं। निहितार्थ हैं। तो कई इशारे भी हैं। ये इशारे बताते हैं कैसी बयार चल रही है। उन पर कैसा रंग चढ़ा है। किसका रंग चढ़ा है। साफ-साफ कहें तो यहां मतदाताओं की गुगली झेलना किसी के लिए आसान नहीं। कुछ ऐसे ही मिजाज हैं पश्चिमी यूपी के आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद की चुनावी समर भूमि के। इन जिलों की 19 विधानसभा सीटों के मतदाताओं के दिल की बातें बता रहे हैं विचित्र सिंह....

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An eye on the social and political situation of voters of agra mathura and firozabad on the pretext of the upcoming UP election
फतेहपुर सीकरी में मन की बात साझा करते स्थानीय लोग... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मतदाताओं के दिल की बात पढ़ने से पहले एक छोटी सी झलक चुनाव समर भूमि की। आगरा की सभी 9 सीटों पर केसरिया परचम फहराया था। फिरोजाबाद की पांच सीटों में से महज एक सिरसागंज सपा जीत पाई थी, बाकी जगहों पर भाजपा ही जीती। मथुरा की पांच सीटों में से सिर्फ मांट में बसपा जीती, बाकी पर भाजपा ने ही कब्जा कर लिया था। जाहिर है भाजपा के सामने अपना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। तो सपा-रालोद गठबंधन, बसपा और कांग्रेस के दमखम का भी इम्तिहान होगा।

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आगरा छावनी : मेट्रो छोड़ डबल इंजन सरकार से कुछ नहीं मिला
 ताज के पास पूर्वी गेट पार्किंग शिल्पग्राम के बाहर चाय की दुकान पर बैठे गौरव चौहान कहते हैं कि आगरा के हिस्से केवल मेट्रो आई। पर्यटन के विकास के लिए कोई काम नहीं किया गया। उनकी हां में हां मिलाते हैं राहुल चतुर्वेदी। वह कहते हैं कि कोरोना काल में पर्यटन से जुड़े चार लाख लोगों को मदद की जरूरत थी, लेकिन न बिजली बिल माफ किया और न गृहकर। बंद होटलों का बिल देने के लिए लोगों को ज्वैलरी बेचनी पड़ी। संजीव जैन, नंदू गुप्ता कहते हैं कि आगरा की उपेक्षा इन चार सालों में जितनी हुई, उतनी कभी नहीं हुई। योगी सरकार के पर्यटन मंत्री को आगरा में किसी ने देखा तक नहीं। न म्यूजियम के लिए पैसा दिया, न ओरिएंटेशन सेंटर के लिए। रिवर फ्रंट सिर्फ घोषणा बनकर रह गई।
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आगरा दक्षिण : एसएन मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने का वादा अधूरा
 केदारनगर में मोमोज की स्टाल पर बैठे विकास श्रीवास्तव कहते हैं कि पिछले चुनाव में घर-घर गंगाजल और सीवर कनेक्शन का वादा किया गया था, लेकिन घरों में न गंगाजल पहुंचा, ना ही सीवर लाइन जुड़ पाई है। हर गली हर सड़क खोदकर छोड़ दी है। पांच साल पहले और अब की सड़कों में बड़ा फर्क है। दुकानदार मुन्नालाल कहते हैं कि एसएन मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने का वादा आज भी अधूरा है। कोठी मीना बाजार में शिवाजी महाराज की प्रतिमा और भव्य स्मारक बनाया जाना था, लेकिन नहीं बन सका।
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आगरा उत्तर : बड़ा सवाल यही, अग्रवाल या खंडेलवाल
चुनाव से पहले यहां अग्रवाल बनाम खंडेलवाल का विवाद गहरा गया है। अग्रवाल समाज भाजपा से अग्रवाल प्रत्याशी को ही उतारने की मांग कर रहा है। कमलानगर के श्रीराम चौक पर पान की दुकान पर सतेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि क्षेत्र का विकास हुआ है, लेकिन व्यापारियों को राजनीति में अपनी भागीदारी चाहिए। अग्रवाल प्रत्याशी उतारना होगा। वहीं, प्रदीप डम्बला का कहना है कि कमला नगर का विकास मेयर के चलते हुआ है, विधायक के कारण नहीं। सचिन चतुर्वेदी के मुताबिक कमलानगर में थाना बन गया, पर व्यापारियों की सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है।

एत्मादपुर : मुफ्त राशन की खुशी, महंगाई और छुट्टा पशुओं से रोष
एत्मादपुर के सवाई गांव में मिले जनक सिंह, सूरज जादौन, हरिमोहन प्रजापति कहते हैं कि मुफ्त राशन ने लोगों को राहत दी है। वहीं, सुमित सेन, टेक चंद्र और प्रेमप्रकाश कहते हैं कि महंगाई बहुत बढ़ गई है। छुट्टा पशुओं से खेती बर्बाद हो रही है। किसान, ग्रामीण परेशान हैं। स्टेशन रोड पर मिले माधवेन्द्र नाथ सिंह, राधा मोहन, संदीप कहते हैं कि कानून-व्यवस्था दुरुस्त हुई है। सम्मान निधि से किसानों को मदद मिली है। वहीं, अजीम, हाविद ने कहा कि महंगाई से लोग परेशान हैं।

खेरागढ़ : खेती और किसान की जो करेगा बात, उसी का देंगे साथ
खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव भिलावली मेें दोपहर करीब तीन बजे कुछ ग्रामीण चुनावी चर्चा में मशगूल नजर आए। रूपकिशोर कहते हैं, सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं। छुट्टा जानवरों ने पूरी दिनचर्या ही बदलकर रख दी है। इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। बाड़ लगाने, दिन-रात रखवाली के बाद भी फसलें नहीं बच रही हैं। खेती और किसानों के हित की जो बात करेगा, किसान व ग्रामीण उसका ही समर्थन करेंगे। मथुरा प्रसाद कहते हैं कि काम तो सभी सरकारें करती हैं, किसी का ज्यादा दिखता है और किसी का कम। वहीं, हरिओम शुक्ला कहते हैं कि नेता तो साफ छवि का होना चाहिए।

बाह : गइयन ने मारि डारौ
बाह में सर्द मौसम में खेती के साथ धूप सेंकते हुए चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। चौरंगाहार (बाह) गांव की चौपाल पर किसान बैठे दिखे। चर्चा छेड़ते ही कहने लगे, गइयन ने किसान मारि डारौ, ठंड-कोहरो देखे बिना खेत रखाये, तोऊ आलू, सरसों, गेहूं के खेत उजाड़ के धरि दये। चौपाल में मुंशी सिंह ने कहा कि साल भर ते गोशाला कौ हल्ला मचौ है, बनि ना पाई, सरकार गोशाला कौ इंतजाम करें, नहीं तौ किसान मिट जागौ। श्रीकृष्ण, रघुनाथ, राम बिलास सिंह, भारत सिंह, लक्ष्मी नारायन, भूप सिंह, धीर सिंह, गोविंद सिंह सरकार से गोशाला बनाने की गुहार लगाते हैं।

फतेहपुर सीकरी : मांग रहे महंगाई और घुमंतू पशुओं से निजात
ग्राम दूरा में एक स्थान पर जुटे महावीर सिंह, गिरराज सिंह, अजीत कुमार, हरीश कुमार, कृष्ण पाल सिंह, रामेश्वर सिंह, वजीर खान, अमरजीत कहते हैं कि महंगाई ने सभी को परेशान कर रखा है। ग्राम नगला दधिराम मेंें गुलाब बघेल, नरोत्तम शर्मा, विक्रम सिंह, अवधेश शर्मा, रामेंद्र शर्मा, भूपेंद्र सिंह अलाव तापते मिले। इनमें से कुछ लोगों ने मौजूदा सरकार को अच्छा बताया तो कुछ लोग बिजली, पानी की समस्या पर बहस करने लगे।

फतेहाबाद : खाद और बिजली मिले
गांव बादशाह की मड़ैया में बैठे किसानों के बीच ऐसी ही चर्चा होती दिखी। कोई महंगाई बढ़ने से आ रही परेशानी का जिक्र कर रहा था, तो कोई खाद की किल्लत को बयां कर रहा था। निबोहरा गांव के प्रेम सिंह ने कहा कि रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल तक महंगाई की मार है।

आगरा देहात : रोजगार और पानी की दिक्कत
धनौली रोड पर चाय की दुकान पर मिले संजय रावत ने कहा, जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आएगा माहौल बदलेगा। बरारा के मोहन पाल सिंह का कहना की दो साल तो कोरोना के कारण बर्बाद हो गए। इस बार रोजगार और पानी की समस्या जैसे मुद्दों पर लोग गंभीर हैं। नगला कली के देवेंद्र का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या हल नहीं हुई, खाद की समस्या लंबे समय तक बनी रही।

 

मथुरा के हाल

योजनाओं पर हमले, योजनाएं ही ढाल
शहर के बीच डैंपियर नगर में चाय के साथ गोकुल चंद की दुकान पर लोगों के बीच चल रही बहस का हम भी हिस्सा बन गए। आशीष गर्ग भाजपा की पैरोकारी कर रहे थे। वह कहते हैं, सरकार सभी योजनाओं को ठोस रूप देते हुए आगे बढ़ी है। समानता के साथ लोगों को लाभ दिए जा रहे हैं। जाति-धर्म का कोई भेदभाव नहीं दिखा। यह सब सुन रहे आरिफ  मैदान में पिल पड़े। वे बोले-क्या किया? सिर्फ माहौल खराब करने का काम किया है भाजपा ने। महंगाई इनको दिखाई नहीं देती है। लॉकडाउन में बंद दुकानों का भी बिजली का बिल अदा करना पड़ा है। आरिफ की बात काटते हुए प्रियांश ने कहा, कुछ भी कहो, भाजपा का शासन पारदर्शी है। अब किसी का राशन कोई और नहीं ले सकता है। भ्रष्टाचारियों के यहां छापे पड़ रहे हैं। राघव व उपमन्यु ने भी इस पर सहमति जताई। हालांकि वे यह भी जोड़ते हैं कि अभी और सुधार करने की जरूरत है। मुकाबला किसके बीच होगा, इस सवाल पर सभी कहते हैं कि फिलहाल मामला एकतरफा नहीं है।

गोवर्धन : बहसों में सरकार के काम
हम गोवर्धन पहुंचे तो यहां राधाकुंड बंबा स्थित चाय की दुकान पर मजमा लगा था। यहां मिले बाबा कल्याण दास भाजपा के समर्थन में दलीलें दे रहे थे। इन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए तुलसीराम गौड़ बोले, राम मंदिर बन रहा है। काशी को भव्यता मिली है और क्या चाहिए? छोटू कटारा भी समर्थन में कूद पड़े। वे कहते हैं, लॉकडाउन से शुरू हुआ मुफ्त अनाज वितरण आज भी जारी है। गिरधारी लाल ठेकेदार इनसे सहमत नहीं थे। उन्होंने सपा-रालोद गठबंधन की सरकार की जरूरत बताई। भोलानाथ दुबे कहते हैं, सरकार किसी की बने, विधायक बदल जाना चाहिए।

बलदेव : महंगाई और बेरोजगारी पर मुखर हैं लोग
यहां हम नीवरी रोड पर निकले तो पान की दुकान पर खडे़ लोग चुनावी माहौल पर बातें करते  मिले। दुकानदार रमेश पांडेय कह रहे थे, महंगाई-बेरोजगारी ने हालत खराब कर दी है। इस बार तो किसानों को खाद के लिए लाइन लगानी पड़ी, फिर भी ब्लैक में खरीदना पड़ा। वहीं, चंद्रभान पांडेय कहते हैं कि जितना विकास हुआ है, 70 साल में नहीं हुआ। अमन वर्मा भी विकास की दलील को आगे बढ़ाते दिखे। नवीन वर्मा विषयांतर करते हुए कहते हैं, आप सब चाहे जो कहो, अखिलेश के लिए भीड़ तो उमड़ ही रही है। इसका असर तो दिखेगा ही। दलवीर सिंह, नवीन के तर्कों को खारिज करते हुए कहते हैं-ऐसा कुछ नहीं है। कानपुर में छापे के बाद माहौल बदला है।

छाता : विधायक बदलते हैं, स्थिति नहीं बदलती
नंदगांव के लठामार होली चौक पर सियासी रंग चढ़ चुका है। चाय की दुकान पर मिले भीम चौधरी से माहौल को लेकर चर्चा छिड़ी तो वह गोल-गोल बोलने लगे। वह कहते हैं, सरकार किसकी है, विधायक कौन है, इससे क्या फर्क पड़ता है। नंदगांव-कोसी रोड कितने साल से टूटी पड़ी है। ये सड़क बनी क्या? इसके लिए किसको जिम्मेदार बताएं। यहां तो हर पांच साल में विधायक बदल जाते हैं। लारा गोस्वामी बोले, रोजगार के मोर्चे पर कुछ खास नहीं हुआ।

मांट : सब अपने-अपने पैमाने पर आंक रहे
नौहझील में बाजना तिराहे पर मिले अनिल मास्टर कहते हैं,  एमएसपी से नीचे किसानों की उपज बिक रही है। महंगाई रुक नहीं रही है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात हुई थी, लागत दोगुनी हो गई। छुट्टा जानवरोें ने नाक में दम कर रखा है। वहीं, ओमप्रकाश भी कुछ ऐसी ही दलीलें देते हैं। वह कहते हैं, धरातल पर विकास दिख नहीं रहा है। यह सब सुन छिनपारई के कालू चौधरी बहस में कूद पड़े। वे तैश में आकर कहते हैं, काम तो इतने हुए हैं कि गिनाने लगें तो सुबह से शाम हो जाएगी। शंकर त्रिपाठी सबकी बातें काटते हुए कहते हैं, अब तो अधिकारी सुनते ही नहीं हैं।

फिरोजाबाद की दास्तान...

भाजपा-सपा के बीच टक्कर के आसार
फिरोजाबाद विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश करने पर झील की पुलिया के समीप कुछ युवा आपस में बातें करते मिले। चुनाव की बात छेड़ने पर वीरेंद्र सिंह कहते हैं, यहां तो काफी काम हुए हैं। गरीबों को मुफ्त में गल्ला मिल रहा है। दो रेलवे ओवरब्रिज बने, सड़कों में सुधार हुआ है। पास में खड़े राजेंद्र ने काउंटर अटैक किया। वे बोले, ये सारे काम तो सपा सरकार की देन है, कोई नया हो तो गिनाओ। राम सिंह कहते हैं, सब चुनाव में पता चल जाएगा कि किसने क्या किया।  मनोज बोले कि विधायक मनीष असीजा जनता के बीच काफी सक्रिय रहे। इसका भी असर दिखेगा।

जसराना : कठिन है डगर
लोधी एवं यादव मतदाता बहुल जसराना विधानसभा क्षेत्र के पाढ़म लहसुन मंडी में हम पहुंचे तो यहां कुछ किसान चुनावी चर्चा करते मिले। हवा का क्या रुख है, इस सवाल पर सुखवीर सिंह कहते हैं-अजी, प्रत्याशियों का तो पता नहीं, पार्टियां जोर लगाए पड़ी हैं। असली स्थिति तो प्रत्याशी पर निर्भर करेगी। हवा की तो मत पूछा। ये पूछो कि छुट्टा जानवरों से फसल बच रही है कि नहीं। महंगाई जीने नहीं दे रही। शिवराज सिंह शाक्य भी हां में हां मिलाते हुए कहते हैं कि इस बार आसान नहीं है यहां का चुनाव। इस पर हरवीर कहते हैं कि काम तो बहुत हुआ है। प्रमोद कुमार बोल पड़े , खैरगढ़, फरिहा क्षेत्र में खारे पानी, यातायात से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। औद्योगिक गतिविधि भी नहीं बढ़ी।

शिकोहाबाद : छुट्टा पशुओं से परेशान
नगर पालिका के सामने चाय की दुकानों पर आजकल सियासी चर्चाएं दिनभर चलती रहती हैं। पंजाबी कॉलोनी निवासी आयुष कुमार कहते हैं, योजनाओं का असर दिख रहा है। इसका फायदा भाजपा को मिल रहा है। इस पर खेड़ा मोहल्ला निवासी अवनीश कहते हैं, क्या ठीक है, खेतों को तो छुट्टा गायें चरे जा रही हैं। इस पर बड़ा बाजार निवासी बंटू जैन कहते हैं कि गुंडागर्दी से तो राहत मिल गई, चैन की सांस तो ले पा रहे हो। इस पर नरेंद्र कुमार रीठरा कहते हैं, भाई कोई सरकार बन जाए हमारा पेट तो अपनी कमाई से ही भरेगा। वहीं समाज सेविका शशिप्रभा का मानना है कि मुकाबला तो प्रत्याशी तय करेगा। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

टूंडला : त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
टूंडला सुरक्षित सीट है। हम सियासी मिजाज की थाह लेने के लिए विधानसभा क्षेत्र के रसूलाबाद गांव पहुंचे। चुनाव की बात छेड़ने पर देवकरन बोले, यहां मुकाबला एकतरफा नहीं होता है। उपचुनाव में भी भाजपा की सपा से टक्कर हुई। बात को आगे बढ़ाते हुए कालीचरन कहते हैं, यह क्षेत्र तो मिश्रित आबादी वाला है। इस बीच कुछ और लोग पहुंच गए। इनमें शामिल महेंद्र सिंह कहते हैं, विकास तो हुआ है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। पास में खड़े प्रेम शंकर ने काउंटर अटैक किया, कितनौ काम भयौ है जि तौ चुनाव में पतौ चल जागौ। डॉ. ब्रजपाल पौनियां कहते हैं, टूंडला क्षेत्र में भाजपा, सपा, बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं।

सिरसागंज : प्रत्याशी तय होने का इंतजार
अरांव रोड पर स्थित कस्बे में चाय की दुकान पर कुछ लोग खड़े मिले। चुनावी चर्चा छेड़ते ही अनिल सिंह कहते हैं, यहां तो मुकाबला हरिओम-जयवीर में होता था, इस बार तो दोनों साथ हैं। कमल किशोर बोले, प्रत्याशी घोषित हों, तभी साफ होगा कि कौन जीतेगा। वैसे यह सीट यादव बहुल है। अन्य वोट एकतरफा पड़ें तभी भाजपा जीत पाएगी। राम सिंह बोले, अभी तो लोग देख रहे हैं कि सपा-प्रसपा का क्या होता है।  समाजसेवी केके खंडेलवाल को लगता है कि यहां मुकाबला भाजपा-सपा के बीच होगा।

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