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Amroha News: दिल का दौरा पड़ने से हुई थी महिला की मौत
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अमरोहा।
11 दिन पहले ऑपरेशन के बाद हुई जच्चा-बच्चा की मौत इलाज में लापरवाही बरतने से नहीं हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक जच्चा की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। ऑपरेशन में देरी के कारण नवजात की जान गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा तीमारदारों द्वारा किए गए हंगामा को गलत ठहराया है।
अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के गांव कालीलेट निवासी रविंद्र सिंह ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी सोनी को सात अगस्त को जोया रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती किया था। जहां ऑपरेशन से डिलीवरी के 15 घंटे के भीतर जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। आक्रोशित परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया था। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों का गुस्सा शांत किया था। जच्चा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सीएमओ डाॅ. सत्यपाल सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
शुक्रवार को जच्चा बच्चा की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा। बताया कि केस क्रिटिकल था, शुरुआत में ही परिजनोंं को ऑपरेशन के लिए कहा गया, लेकिन वह नॉर्मल डिलीवरी की जिद पर अड़े रहे। इस चक्कर में 10-12 घंटे बर्बाद कर दिए। ऑपरेशन में देरी होने की वजह से नवजात के पेट में गंदा पानी चले जाने से उसके फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया था। जबकि ऑपरेशन के बाद सोनी को वेंटीलेटर स्पोर्ट दिया गया। इलाज से उसकी हालत में सुधार भी आया था, लेकिन ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो सका और दिल का दौरा पड़ने के कारण उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। परिजनों के द्वारा लगाए गए आरोप गलत थे। सीओ सतीश चंद पांडेय ने भी जच्चा की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से होने की पुष्टि की है।
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11 दिन पहले ऑपरेशन के बाद हुई जच्चा-बच्चा की मौत इलाज में लापरवाही बरतने से नहीं हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक जच्चा की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। ऑपरेशन में देरी के कारण नवजात की जान गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा तीमारदारों द्वारा किए गए हंगामा को गलत ठहराया है।
अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के गांव कालीलेट निवासी रविंद्र सिंह ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी सोनी को सात अगस्त को जोया रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती किया था। जहां ऑपरेशन से डिलीवरी के 15 घंटे के भीतर जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। आक्रोशित परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया था। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों का गुस्सा शांत किया था। जच्चा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सीएमओ डाॅ. सत्यपाल सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
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शुक्रवार को जच्चा बच्चा की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा। बताया कि केस क्रिटिकल था, शुरुआत में ही परिजनोंं को ऑपरेशन के लिए कहा गया, लेकिन वह नॉर्मल डिलीवरी की जिद पर अड़े रहे। इस चक्कर में 10-12 घंटे बर्बाद कर दिए। ऑपरेशन में देरी होने की वजह से नवजात के पेट में गंदा पानी चले जाने से उसके फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया था। जबकि ऑपरेशन के बाद सोनी को वेंटीलेटर स्पोर्ट दिया गया। इलाज से उसकी हालत में सुधार भी आया था, लेकिन ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो सका और दिल का दौरा पड़ने के कारण उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। परिजनों के द्वारा लगाए गए आरोप गलत थे। सीओ सतीश चंद पांडेय ने भी जच्चा की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से होने की पुष्टि की है।
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