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Amroha News: ब्रजघाट पुल के करीब पहुंचा पानी, खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर दूर गंगा

Thu, 17 Aug 2023 02:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 17 Aug 2023 02:38 AM IST
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Water reached near Brajghat bridge, Ganges 55 cm away from danger mark
गजरौला (अमरोहा)। बिजनौर बैराज से गंगा में पानी छोड़े जाने के कारण जल स्तर बढ़ कर 201.45 मीटर हो गया। जो खतरे के निशान से महज 55 सेंटीमीटर दूर है। कहर बरपा रही बाढ़ ने मंडी धनौरा से लेकर हसनपुर क्षेत्र में सब्जियों की फसल को लील लिया है, गन्ने की फसल भी 50 प्रतिशत तबाह हो चुकी है। दारानगर के सोलर प्लांट में पानी भर गया है। वह कभी भी ठप हो सकता है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद बुधवार की शाम तिगरी में जल स्तर 201.45 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। तिगरी में गंगा खतरे के निशान 202 मीटर से महज 55 सेंटीमीटर दूर रह गई है। गंगा में आई बाढ़ के कारण गंगा तट बांध के अंदर का सारा इलाका जल मग्न हो गया है। खेतों में पांच से छह फिट पानी भर जाने के कारण फसलें डूब गईं। टापू में बसे दारानगर, शीशों वाली, भुड्डी वाली, जाटों वाली आदि गांवों में पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों के सामने जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गई है। नाव और ट्यूब से ही चारा ला रहे हैं। बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद्र गहलौत का कहना है कि बुधवार की शाम गंगा का जल स्तर 201.45 मीटर हो गया। यह खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर दूर है। एसडीएम मंडी धनौरा राजीव राज का कहना है बाढ़ प्रभावित कोई भी व्यक्ति अपना घर छोड़ कर आना चाहता है तो उसके लिए प्राथमिक विद्यालय में इंतजाम कर दिया जाएगा।
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स्पीड कम करके गुजारी जा रहीं लखनऊ-दिल्ली रूट की ट्रेन
गजरौला। गंगा का जल स्तर लगातार बढ़ने के कारण सोमवार की रात ब्रजघाट का गंगा पुल खतरे के निशान से महज 74 सेंटीमीटर दूर रह गया था। मंगलवार की रात और बुधवार की सुबह छोड़े गए पानी के कारण तिगरी में गंगा का जल स्तर बढ़ कर 201.45 मीटर पहुंच गया। इससे ब्रजघाट में गंगा नदी पर बना रेलवे पुल भी खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर दूर रह गया। ब्रजघाट में रेलवे पुल के लिए खतरे का निशान 199.34 है। पुल के करीब गंगा का जल पहुंचने के कारण लखनऊ-दिल्ली रूट से गुजरने वाली ट्रेन काशन से गुजारी जा रही हैं। इसके अलावा उनकी स्पीड भी कम कर दी गई है। ट्रेन महज 30 किमी प्रति घंटे की स्पीड से गुजर रही हैं।
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कहर बरपा रही बाढ़ ने लौकी, तोरई, लोभिया, करेला आदि सब्जियों की फसल को लील लिया है। गंगा में आई बाढ़ से बचाने के लिए कांकाठेर के नरेश, सोमपाल, अरुण, राजकुमार व चंद्र ने कई दिन तक पुस्ता बनाया। बाढ़ के पानी को खेत में घुसने से रोके रखा। मगर मंगलवार की रात पानी खेतों में घुस गया। जिसे लोभिया, तोरई, लौकी और करेला की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई। ओसीता जगदेवपुर के ग्रामीणों ने बाढ़ के पानी को खेतों में जाने से रोकने के लिए कई दिन तक जेसीबी चलाई। रात दिन मिट्टी डाल कर पुस्ता बनाया। जिसे पानी के बहाव ने एक झटके में तोड़ दिया और पानी खेत में भर गया। हसनपुर क्षेत्र के गांव बुद्धा वाला महरपुर निवासी बुद्धा सिंह खड़गवंशी ने 28 बीघे खेत ठेके पर लिया। उसमें लौकी लगाई। बाढ़ से लौकी को बचाने के लिए तीन दिन तक जेसीबी से ऊंची मेंड़बंदी की गई, लेकिन फसल को नहीं बचा सके। किसान अपनी आंखों के सामने फसल को बर्बाद होते देख रहे हैं। इसके अलावा गन्ने जैसी मजबूत फसल भी बाढ़ की विभीषिका को नहीं झेल पा रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं काटने के बाद जिस खेत में गन्ने की बुवाई की गई थी, वह चौपट हो गया है।
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