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Amroha News: हसनपुर में सांड़ों का आतंक सबसे ज्यादा, सात की ले चुके हैं जान
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हसनपुर (अमरोहा)। हसनपुर क्षेत्र में सांड़ों का आतंक सबसे ज्यादा है। क्षेत्र में सांड़ सात लोगों की जान ले चुके हैं। फौजी के बाद बालक भी सांड़ के हमले का शिकार हो गया। इससे पूर्व भी सांड़ कई लोगों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार चुके हैं। यह भयावह स्थिति तब है, जब अकेले हसनपुर क्षेत्र में चार बड़ी-बड़ी गोशाला बनी हैं या कहा जाए जिले की सबसे ज्यादा गोशाला हसनपुर में हैं, लेकिन फिर भी खुले में सांड़ घूम रहे हैं। सांड़ के हमलों से मरने वालों के परिवार हादसों से उबर नहीं पा रहे हैं, तो अधिकारी बेपरवाह बने हैं। हादसों के बाद सांड़ को पकड़ने का अभियान चलाया तो जाता है, लेकिन चंद दिन बाद फिर स्थिति पुराने ढर्रे पर पहुंच जाती है।
हसनपुर तहसील क्षेत्र में तीन बड़ी गोशालाएं हैं। जिनमें बृहद गोशाला ब्रह्माबाद, बृहद गोशाला सांथलपुर, कान्हा गोशाला नगर पालिका हसनपुर शामिल है। इसके अलावा गो आश्रय स्थल गुरैठा, गो आश्रय स्थल मंगरौली, गो आश्रय स्थल फूलपुर बीझलपुर और गो आश्रय स्थल अल्लीपुर भी हैं। इन सभी जगहों पर करीब एक हजार गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। बावजूद इसके सबसे ज्यादा छुट्टा गोवंश पशु हसनपुर तहसील क्षेत्र में ही हैं।
हर सात किलोमीटर के दायरे में छुट्टा पशु खेतों से लेकर कस्बों और मुख्य सड़कों पर देखे जा सकते हैं। आए दिन ये पशु लोगों को निशाना बनाकर उन पर हमले कर रहे हैं, जबकि सांड़ों को पकड़ने का अभियान भी लगातार चल रहा है। पिछले करीब साढ़े तीन माह में जिले के अंदर नौ घटनाएं ऐसी हुईं, जिसका कारण सांड़ थे। उनमें से सात घटनाएं हसनपुर क्षेत्र में हुई। जिसमें फौजी अंकित व बालक दुष्यंत के साथ हुईं दुघटनाएं हाल की ही हैं।
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मृतकों के परिजन बोले- नहीं मिला मुआवजा
हसनपुर/ढबारसी। सांड़ के हमले में जान गवानों वालों के कई ऐसे परिजन हैं। जिन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि सांड़ के हमले में मरने वालों को सरकार चार लाख रुपये का मुआवजा दे रही है, लेकिन सरकारी नियमों व शर्तों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से परिजन मुआवजा मिलने से वंचित हो रहे हैं।
आदमपुर थाना क्षेत्र के बीजनपुर गांव निवासी नेमचंद पुत्र हीरा लाल की सांड द्वारा सात मई 2021 को मार डाला था। नेमचंद के पास सात बीघा जमीन थी। नेमचंद की पत्नी इंद्रवती ने बताया कि राकेश, मंगलसेन और योगेश तीन लड़के हैं, जो मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। शव का पोस्टमार्टम न होने की वजह से सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। ढबारसी निवासी भूरे सैफी पुत्र मुरादी सैफी को खेत पर काम करते हुए सांड़ ने कुचलकर कर मार डाला था। भूरे सैफी के बेटे उस्मान सैफी ने बताया कि सरकार से आज तक कोई मदद नहीं मिली है। मदद के नाम पर जब अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने शव के पोस्टमार्टम की जानकारी मांगी थी, लेकिन शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। जिस कारण मुआवजा नहीं मिला है।
सांड़ों को लेकर दहशत बनी हुई है। गांव रूखालू निवासी भरत सिंह के 11 वर्षीय बेटे को सांड़ ने गांव में ही रास्ते पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। भरत सिंह का कहना है कि जब से बेटे पर सांड़ ने हमला किया है तब से रास्तों पर चलने में भी डर लगता है।
- अभियान के तहत सांड़ पकड़े जा रहे हैं और उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। सांड़ के हमले में मरने वालों को मुआवजा भी शासन से दिलवाया जा रहा है। यदि कुछ लोगों को मुआवजा नहीं मिला है तो जांच कराई जाएगी। -अशोक कुमार शर्मा, एसडीएम हसनपुर।
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हसनपुर तहसील क्षेत्र में तीन बड़ी गोशालाएं हैं। जिनमें बृहद गोशाला ब्रह्माबाद, बृहद गोशाला सांथलपुर, कान्हा गोशाला नगर पालिका हसनपुर शामिल है। इसके अलावा गो आश्रय स्थल गुरैठा, गो आश्रय स्थल मंगरौली, गो आश्रय स्थल फूलपुर बीझलपुर और गो आश्रय स्थल अल्लीपुर भी हैं। इन सभी जगहों पर करीब एक हजार गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। बावजूद इसके सबसे ज्यादा छुट्टा गोवंश पशु हसनपुर तहसील क्षेत्र में ही हैं।
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हर सात किलोमीटर के दायरे में छुट्टा पशु खेतों से लेकर कस्बों और मुख्य सड़कों पर देखे जा सकते हैं। आए दिन ये पशु लोगों को निशाना बनाकर उन पर हमले कर रहे हैं, जबकि सांड़ों को पकड़ने का अभियान भी लगातार चल रहा है। पिछले करीब साढ़े तीन माह में जिले के अंदर नौ घटनाएं ऐसी हुईं, जिसका कारण सांड़ थे। उनमें से सात घटनाएं हसनपुर क्षेत्र में हुई। जिसमें फौजी अंकित व बालक दुष्यंत के साथ हुईं दुघटनाएं हाल की ही हैं।
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मृतकों के परिजन बोले- नहीं मिला मुआवजा
हसनपुर/ढबारसी। सांड़ के हमले में जान गवानों वालों के कई ऐसे परिजन हैं। जिन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि सांड़ के हमले में मरने वालों को सरकार चार लाख रुपये का मुआवजा दे रही है, लेकिन सरकारी नियमों व शर्तों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से परिजन मुआवजा मिलने से वंचित हो रहे हैं।
आदमपुर थाना क्षेत्र के बीजनपुर गांव निवासी नेमचंद पुत्र हीरा लाल की सांड द्वारा सात मई 2021 को मार डाला था। नेमचंद के पास सात बीघा जमीन थी। नेमचंद की पत्नी इंद्रवती ने बताया कि राकेश, मंगलसेन और योगेश तीन लड़के हैं, जो मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। शव का पोस्टमार्टम न होने की वजह से सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। ढबारसी निवासी भूरे सैफी पुत्र मुरादी सैफी को खेत पर काम करते हुए सांड़ ने कुचलकर कर मार डाला था। भूरे सैफी के बेटे उस्मान सैफी ने बताया कि सरकार से आज तक कोई मदद नहीं मिली है। मदद के नाम पर जब अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने शव के पोस्टमार्टम की जानकारी मांगी थी, लेकिन शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। जिस कारण मुआवजा नहीं मिला है।
सांड़ों को लेकर दहशत बनी हुई है। गांव रूखालू निवासी भरत सिंह के 11 वर्षीय बेटे को सांड़ ने गांव में ही रास्ते पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। भरत सिंह का कहना है कि जब से बेटे पर सांड़ ने हमला किया है तब से रास्तों पर चलने में भी डर लगता है।
- अभियान के तहत सांड़ पकड़े जा रहे हैं और उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। सांड़ के हमले में मरने वालों को मुआवजा भी शासन से दिलवाया जा रहा है। यदि कुछ लोगों को मुआवजा नहीं मिला है तो जांच कराई जाएगी। -अशोक कुमार शर्मा, एसडीएम हसनपुर।