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Amroha News: पटाखे में ज्यादा विस्फोटक भरने और जोर से ठोकने से हुआ धमाका
Tue, 17 Jun 2025 02:10 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 17 Jun 2025 02:10 AM IST
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अमरोहा। पटाखा फैक्टरी में धमाका कैसे हुआ, यह सवाल हर कोई जानना चाहता है। डीएम ने भी असलियत का पता लगाने के लिए मजिस्ट्रियल जांच के लिए कमेटी गठित की है लेकिन, पुलिस की प्राथमिक जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया है। अफसरों की मानें तो पटाखे में विस्फोटक सामग्री ज्यादा भरने और ठोकने के कारण विस्फोट हुआ। इसका मुख्य कारण पटाखा बनाने वाले मजदूरों को अनुभव नहीं होना है। हर रोज नए मजदूर काम करने फैक्टरी में जा रहे थे।
पुराने मजदूर बार-बार नए मजदूरों से पटाखे में ज्यादा विस्फोटक सामग्री नहीं भरने के लिए कहते थे। हादसे के समय भी यही हुआ कि पटाखे में ज्यादा सामग्री भरकर ठोकते समय अचानक चिंगारी निकली और विस्फोट हो गया। यह थ्योरी पुलिस की है, लेकिन डीएम की बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से धमाके के राज से पर्दा उठेगा। जिस पटाखा फैक्टरी में सोमवार को विस्फोट हुआ, यह फैक्टरी करीब छह महीने पहले अतरासी कलां गांव से सटी आबादी में थी, लेकिन 14 जून 2024 को सूदनपुर स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद इसे जंगल में शिफ्ट कराया गया था। इस पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस 2027 तक है। पटाखा फैक्टरी को संचालित करने वाले हापुड़ निवासी सैफ उर रहमान हर दूसरे तीसरे दिन फैक्टरी पर आते थे।
बड़ी बात यह है कि फैक्टरी पर कुछ पुराने व अनुभवी लोग काम करते थे, जबकि पिछले 15 दिन से हर रोज एक-दो नए मजदूर काम करने जा रहे थे। सर्वेश भी सोमवार को पहली दिन काम करने गई थी, जिसकी भी फैक्टरी में हुए विस्फोट में मौत हो गई। इस फैक्टरी में फुलझड़ी के अलावा अनार बम समेत कई तरह की आतिशबाजी तैयार की जाती है। आतिशबाजी में विस्फोटक सामग्री भरते समय बड़ी सावधानी बरती जाती है। पटाखे में विस्फोटक सामग्री भरने के बाद उसे धीरे-धीरे ठोका भी जाता है, लेकिन बिना अनुभव वाले नए मजदूर पटाखे की क्षमता से ज्यादा विस्फोटक सामग्री भर रहे थे। इस संबंध में कई बार पुराने मजदूरों ने चेताया भी था।
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पुराने मजदूर बार-बार नए मजदूरों से पटाखे में ज्यादा विस्फोटक सामग्री नहीं भरने के लिए कहते थे। हादसे के समय भी यही हुआ कि पटाखे में ज्यादा सामग्री भरकर ठोकते समय अचानक चिंगारी निकली और विस्फोट हो गया। यह थ्योरी पुलिस की है, लेकिन डीएम की बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से धमाके के राज से पर्दा उठेगा। जिस पटाखा फैक्टरी में सोमवार को विस्फोट हुआ, यह फैक्टरी करीब छह महीने पहले अतरासी कलां गांव से सटी आबादी में थी, लेकिन 14 जून 2024 को सूदनपुर स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद इसे जंगल में शिफ्ट कराया गया था। इस पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस 2027 तक है। पटाखा फैक्टरी को संचालित करने वाले हापुड़ निवासी सैफ उर रहमान हर दूसरे तीसरे दिन फैक्टरी पर आते थे।
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बड़ी बात यह है कि फैक्टरी पर कुछ पुराने व अनुभवी लोग काम करते थे, जबकि पिछले 15 दिन से हर रोज एक-दो नए मजदूर काम करने जा रहे थे। सर्वेश भी सोमवार को पहली दिन काम करने गई थी, जिसकी भी फैक्टरी में हुए विस्फोट में मौत हो गई। इस फैक्टरी में फुलझड़ी के अलावा अनार बम समेत कई तरह की आतिशबाजी तैयार की जाती है। आतिशबाजी में विस्फोटक सामग्री भरते समय बड़ी सावधानी बरती जाती है। पटाखे में विस्फोटक सामग्री भरने के बाद उसे धीरे-धीरे ठोका भी जाता है, लेकिन बिना अनुभव वाले नए मजदूर पटाखे की क्षमता से ज्यादा विस्फोटक सामग्री भर रहे थे। इस संबंध में कई बार पुराने मजदूरों ने चेताया भी था।
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