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काटनवेस्ट कारोबार को संजीवनी देगी सपा सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 25 Nov 2016 11:45 PM IST
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जिले में दम तोड़ते जा रहे काटनवेस्ट कारोबार को सपा सरकार संजीवनी देने की तैयारी में जुट गई है। उनको दो करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए कार्रवाई छेड़ दी है। जनपद के अफसरों को अवगत करा दिया है। अनुदान का फायदा केवल रजिस्टर्ड कारोबारी उठा सकेंगे। हथकरघा विभाग के खाते में धनराशि आएगी। उसके द्वारा ही मानक निर्धारित कर वितरित होगी। भनक लगने के बाद विभागीय अधिकारियों ने दस्तावेज खंगालते हुए धुनकरों को सूचीबद्ध करने का काम शुरू कर दिया है।
पूरे एशिया में अमरोहा की पहचान काटनवेस्ट कारोबार से है। देश के कोने-कोने में यहां से रुई व अन्य माल भेजा जाता है। शहर में 630 काटनवेस्ट इकाइयां थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार दम तोड़ता जा रहा है। बिजली तो कभी अन्य कारण, इकाइयां बंद करने का कारण बने हैं। स्थिति ये है कि मौजूदा समय में केवल 308 काटनवेस्ट कारखाने ही रह गए हैं। अन्य पर ताला लटक गया है, लेकिन जनपद के इस कारोबार की आवाज को कैबिनेट मंत्री महबूब अली ने मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और अनुदान देने की सिफारिश की।
कई दिनों से शासन में यह मामला पेंडिंग रहा, लेकिन जब मुख्यमंत्री की नजर गई तो उन्होंने कारोबार को बचाने के लिए अनुदान देने का फैसला कर लिया। दो करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय लिया और अधीनस्थ अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने को कहा।
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लखनऊ के अधिकारियों ने दो करोड़ की यह रकम पावर कारपोरेशन को देने की प्रक्रिया चालू कर दी है। कारपोरेशन के अफसरों से पूरा माजरा जाना है। इसके बाद सरकार ने यह धनराशि हथकरघा विभाग के पास भेजने को कदम उठाया है। सरकार की इस कार्य से कारपोरेशन ने बिजली विभाग के अधिकारियों को वाकिफ करा दिया है।
बिजली विभाग के खाते में डायरेक्ट कोई पैसा नहीं आएगा। यह पहले हथकरघा विभाग के पास जाएगा। उसके द्वारा ही किस कारोबारी को कितना अनुदान देना है, यह निर्धारित किया जाएगा। इसके बाद ही कारोबारी के हिसाब से यह रकम विभाग को मिलेगी। उच्चाधिकारियों ने फिलहाल जल्द रुपये मिलने की सूचना दी है। दीपक अग्रवाल, एक्सईएन अमरोहा
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पूरे एशिया में अमरोहा की पहचान काटनवेस्ट कारोबार से है। देश के कोने-कोने में यहां से रुई व अन्य माल भेजा जाता है। शहर में 630 काटनवेस्ट इकाइयां थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार दम तोड़ता जा रहा है। बिजली तो कभी अन्य कारण, इकाइयां बंद करने का कारण बने हैं। स्थिति ये है कि मौजूदा समय में केवल 308 काटनवेस्ट कारखाने ही रह गए हैं। अन्य पर ताला लटक गया है, लेकिन जनपद के इस कारोबार की आवाज को कैबिनेट मंत्री महबूब अली ने मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और अनुदान देने की सिफारिश की।
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कई दिनों से शासन में यह मामला पेंडिंग रहा, लेकिन जब मुख्यमंत्री की नजर गई तो उन्होंने कारोबार को बचाने के लिए अनुदान देने का फैसला कर लिया। दो करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय लिया और अधीनस्थ अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने को कहा।
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लखनऊ के अधिकारियों ने दो करोड़ की यह रकम पावर कारपोरेशन को देने की प्रक्रिया चालू कर दी है। कारपोरेशन के अफसरों से पूरा माजरा जाना है। इसके बाद सरकार ने यह धनराशि हथकरघा विभाग के पास भेजने को कदम उठाया है। सरकार की इस कार्य से कारपोरेशन ने बिजली विभाग के अधिकारियों को वाकिफ करा दिया है।
बिजली विभाग के खाते में डायरेक्ट कोई पैसा नहीं आएगा। यह पहले हथकरघा विभाग के पास जाएगा। उसके द्वारा ही किस कारोबारी को कितना अनुदान देना है, यह निर्धारित किया जाएगा। इसके बाद ही कारोबारी के हिसाब से यह रकम विभाग को मिलेगी। उच्चाधिकारियों ने फिलहाल जल्द रुपये मिलने की सूचना दी है। दीपक अग्रवाल, एक्सईएन अमरोहा