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अमरोहा में छाई रही धुंध
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गजरौला में हाईवे पर अपरान्ह दो बजे धुंध के बीच गुजरते वाहन।
- फोटो : GAJRAULA
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मंडी धनौरा। दीपावली के बाद से आसमान में छाई धुआं और धुंध साफ होने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को लगातार पांचवें दिन आसमान में धुंध छाई रही। गजरौला व धनौरा में दोपहर 12.30 बजे हवा की गुणवत्ता का स्तर 164 था। हालांकि यह खतरनाक स्तर पर नहीं था लेकिन स्वास्थ्य के प्रतिकूल माना जाता है। सुबह से शाम तक आसमान में छाई धुंध और आंखों में तीव्र जलन से लोग बेहाल रहे। सांस लेने तक में तकलीफ हुई। इसका बड़ा कारण दिल्ली और एनसीआर की दमघोंटू हवा का असर यहां तक होना माना जा रहा है।
नगर के आसमान पर दीपावली के बाद से लगातार धुंध छाई हुई है। आसमान में बादल छाए रहने का अंदेशा होता है लेकिन बाद में अहसास होता है कि यह धुंध है। सवेरे को उठने के साथ ही दम घुटने लगता है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है। रविवार की दोपहर कई लोगों ने अपनी आंखों में जलन की शिकायत की। नीरज व अमित आदि ने आंखों में जलन की शिकायत की। कई लोगों ने गजरौला व धनौरा में एयर क्वालिटी इंडेक्स देखा तो यह 164 था। बताया जाता है कि स्वच्छ आसमान में हवा की गुणवत्ता का स्तर 50-60 के बीच होना चाहिए। भले ही यह खतरनाक स्तर पर न हो लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। फिजीशियन डॉ. शराफत अली का कहना है कि अस्थमा के रोगियों के लिए यह वातावरण ठीक नहीं है।
रविवार की सुबह लोग सोकर उठे तो आसमान में धुंध छाई हुई थी। इसका सबसे अधिक प्रभाव हाईवे पर देखा गया। सुबह दस बजे तक तो ऐसा लग रहा था कि कुछ ही देर में बारिश होने वाली हो। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। बीच-बीच में सूरज ने भी निकलने की जद्दोजहद की लेकिन उसकी किरणों की तीव्रता भी धुंध में खोकर रह गई। पूरे दिन वातावरण में धुंध छाई रही। इतना ही नहीं आंखों में तीव्र जलन भी महसूस की गई। सिद्धार्थ इंटर कॉलेज के प्रबंधक रविराज ने बताया कि हाईवे पर नाईपुरा में विशैली धुंध का सर्वाधिक प्रभाव देखा गया। बच्चे एवं महिलाएं आंखों को रगड़ते हुए देखे गए। रेलवे स्टेशन पर रहने वाले नवीन गर्ग और प्रदीप वर्मा ने बताया कि पूरे दिन सांस लेने में काफी तकलीफ हुई। शासकीय अधिवक्ता सर्वेश शर्मा ने कहा कि धुंध के कारण पूरे दिन काफी परेशानी हुई। आंखों में जलन भी महसूस की गई। शिक्षक जोगिंदर सिंह और विपिन पांघाल ने बताया कि संभवत: दिल्ली और एनसीआर में छाई धुंध का ही प्रभाव यहां असर दिखा रहा है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस धुंध के दुष्प्रभाव से आंखों में जलन, एलर्जी, नजला-जुकाम आदि के रोगियों की संख्या बढ़ना तय है।
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नगर के आसमान पर दीपावली के बाद से लगातार धुंध छाई हुई है। आसमान में बादल छाए रहने का अंदेशा होता है लेकिन बाद में अहसास होता है कि यह धुंध है। सवेरे को उठने के साथ ही दम घुटने लगता है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है। रविवार की दोपहर कई लोगों ने अपनी आंखों में जलन की शिकायत की। नीरज व अमित आदि ने आंखों में जलन की शिकायत की। कई लोगों ने गजरौला व धनौरा में एयर क्वालिटी इंडेक्स देखा तो यह 164 था। बताया जाता है कि स्वच्छ आसमान में हवा की गुणवत्ता का स्तर 50-60 के बीच होना चाहिए। भले ही यह खतरनाक स्तर पर न हो लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। फिजीशियन डॉ. शराफत अली का कहना है कि अस्थमा के रोगियों के लिए यह वातावरण ठीक नहीं है।
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रविवार की सुबह लोग सोकर उठे तो आसमान में धुंध छाई हुई थी। इसका सबसे अधिक प्रभाव हाईवे पर देखा गया। सुबह दस बजे तक तो ऐसा लग रहा था कि कुछ ही देर में बारिश होने वाली हो। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। बीच-बीच में सूरज ने भी निकलने की जद्दोजहद की लेकिन उसकी किरणों की तीव्रता भी धुंध में खोकर रह गई। पूरे दिन वातावरण में धुंध छाई रही। इतना ही नहीं आंखों में तीव्र जलन भी महसूस की गई। सिद्धार्थ इंटर कॉलेज के प्रबंधक रविराज ने बताया कि हाईवे पर नाईपुरा में विशैली धुंध का सर्वाधिक प्रभाव देखा गया। बच्चे एवं महिलाएं आंखों को रगड़ते हुए देखे गए। रेलवे स्टेशन पर रहने वाले नवीन गर्ग और प्रदीप वर्मा ने बताया कि पूरे दिन सांस लेने में काफी तकलीफ हुई। शासकीय अधिवक्ता सर्वेश शर्मा ने कहा कि धुंध के कारण पूरे दिन काफी परेशानी हुई। आंखों में जलन भी महसूस की गई। शिक्षक जोगिंदर सिंह और विपिन पांघाल ने बताया कि संभवत: दिल्ली और एनसीआर में छाई धुंध का ही प्रभाव यहां असर दिखा रहा है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस धुंध के दुष्प्रभाव से आंखों में जलन, एलर्जी, नजला-जुकाम आदि के रोगियों की संख्या बढ़ना तय है।
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