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रुठ रहे बदरा, पड़ी रही सूखा, नहीं हो पाई धान की रोपाई
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अमरोहा। बारिश न होने से क्षेत्र में धान की रोपाई पिछड़ गई है। इसके अलावा अन्य फसलें भी पानी की कमी से प्रभावित हो रही हैं, जिसको लेकर किसान बहुत ही चिंतित हैं। जनपद में करीब 27 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई लक्ष्य था, लेकिन बारिश के बिना अभी तक पांच हजार हेक्टेयर ही रोपाई हो पाई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 26 दिन से जिले में सूखा पड़ रहा है। 19 व 20 जून को करीब 55 एमएम बारिश हुई थी। जबकि पिछले साल जुलाई में 130.38 एमएम बारिश हुई थी।
इस बार प्री-मानसून के धोखे ने किसानों की खेती का सिस्टम बिगाड़ दिया है। बारिश की कमी से खेतों में सिंचाई का दारोमदार ट्यूबवेलों पर ही टिका हुआ है। पानी के अभाव में खेतों में दरारें तक आ चुकी हैं। खेतों में पानी की किल्लत साफ देखी जा सकती है। आंकड़ों की माने तो जहां बीते वर्ष जुलाई माह के शुरुआत दिनों से झमाझम बारिश हुई थी पूरे महीने में 130.38 एमएम बरसात हुई थी, लेकिन इस बार जून माह के दो दिन 19 और 20 जून को बारिश हुई, जिसके बाद सूखा पड़ गया। बादल आने के बाद लौटकर जा रहे हैं।
जुलाई महीना आधा बीत गया है, बावजूद इसके एक बूंद तक नहीं गिरी। पिछले सालों के मुकाबले मार्च और अप्रैल भी सूखा ही रहा। धान की खेती में बारिश सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। जिन किसानों के ट्यूबवेलों के अच्छे संसाधन हैं, वहीं धान की रोपाई कर सके हैं। बिजली की अघोषित कटौती भी छोटे किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लिहाजा इन किसानों को बारिश का इंतजार है।
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इस बार प्री-मानसून के धोखे ने किसानों की खेती का सिस्टम बिगाड़ दिया है। बारिश की कमी से खेतों में सिंचाई का दारोमदार ट्यूबवेलों पर ही टिका हुआ है। पानी के अभाव में खेतों में दरारें तक आ चुकी हैं। खेतों में पानी की किल्लत साफ देखी जा सकती है। आंकड़ों की माने तो जहां बीते वर्ष जुलाई माह के शुरुआत दिनों से झमाझम बारिश हुई थी पूरे महीने में 130.38 एमएम बरसात हुई थी, लेकिन इस बार जून माह के दो दिन 19 और 20 जून को बारिश हुई, जिसके बाद सूखा पड़ गया। बादल आने के बाद लौटकर जा रहे हैं।
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जुलाई महीना आधा बीत गया है, बावजूद इसके एक बूंद तक नहीं गिरी। पिछले सालों के मुकाबले मार्च और अप्रैल भी सूखा ही रहा। धान की खेती में बारिश सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। जिन किसानों के ट्यूबवेलों के अच्छे संसाधन हैं, वहीं धान की रोपाई कर सके हैं। बिजली की अघोषित कटौती भी छोटे किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लिहाजा इन किसानों को बारिश का इंतजार है।
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