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चढ़ता-उतरता रहा सियासी पारा, लेते रहे हाल
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 01 Jan 2017 12:39 AM IST
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
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सूबे की सियासत का पारा शनिवार को कभी चढ़ता तो कभी उतरता दिखा। पल-पल का हाल जानने के लिए कार्यकर्ता लखनऊ में जमे नेताओं से मोबाइल पर बातचीत करते रहे। सियासी पारे के उतार-चढ़ाव से वह भी जूझते नजर आए। जान में जान उस समय आई जब पूरी तरह साफ हो गया कि सीएम व प्रोफेसर का निष्कासन पार्टी ने रद्द कर दिया है। अब उनको अपने-अपने माननीयों की किस्मत की चिंता लगी है। इसलिए अभी जेहन में पैदा हुई टेंशन दूर नहीं हो सकी है।
एक ओर जहां प्रदेश के मंत्रियों व विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुला रखी थी, वहीं सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी मंत्री, विधायकों व प्रत्याशियों को बुलाया था, लेकिन सपा सुप्रीमो की बैठक में माननीयों की संख्या बेहद कम दिखी। लगातार प्रदेश की सियासत का रंग बदल रहा था। ऐसे में बेचैन कार्यकर्ता प्रदेश की राजधानी में जमे अपने अजीजों से स्थिति जान रहे थे। कभी उनके चेहरे पर खुशी तो कभी रंगत उड़ती दिख रही थी। समझौता होगा या नहीं, बस यही बात उनको सता रही थी।
दोपहर बाद जो सूबे की तस्वीर बनी, उसको जानकर कार्यकर्ताओं का मन प्रफुल्लित हो उठा। अजीजों ने मोबाइल पर बताया कि निष्कासन रद्द हो गया है। मगर उनके माथे पर चिंता की लकीरें अभी भी खिंची है। यह किसी और के लिए नहीं बल्कि अपने अजीजों के लिए हैं। विधायक, मंत्री व प्रत्याशी लखनऊ में जमे हैं और कोर कमेटी द्वारा जारी होने वाली सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसकी किस्मत का सितारा चमकेगा और किसका डूबेगा, इसी को लेकर कार्यकर्ता चिंतित हैं।
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एक ओर जहां प्रदेश के मंत्रियों व विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुला रखी थी, वहीं सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी मंत्री, विधायकों व प्रत्याशियों को बुलाया था, लेकिन सपा सुप्रीमो की बैठक में माननीयों की संख्या बेहद कम दिखी। लगातार प्रदेश की सियासत का रंग बदल रहा था। ऐसे में बेचैन कार्यकर्ता प्रदेश की राजधानी में जमे अपने अजीजों से स्थिति जान रहे थे। कभी उनके चेहरे पर खुशी तो कभी रंगत उड़ती दिख रही थी। समझौता होगा या नहीं, बस यही बात उनको सता रही थी।
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दोपहर बाद जो सूबे की तस्वीर बनी, उसको जानकर कार्यकर्ताओं का मन प्रफुल्लित हो उठा। अजीजों ने मोबाइल पर बताया कि निष्कासन रद्द हो गया है। मगर उनके माथे पर चिंता की लकीरें अभी भी खिंची है। यह किसी और के लिए नहीं बल्कि अपने अजीजों के लिए हैं। विधायक, मंत्री व प्रत्याशी लखनऊ में जमे हैं और कोर कमेटी द्वारा जारी होने वाली सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसकी किस्मत का सितारा चमकेगा और किसका डूबेगा, इसी को लेकर कार्यकर्ता चिंतित हैं।
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