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ब्लड बैंक से मिलेगा प्लाज्मा, प्लेटलेट्स
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जनपद के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जल्द की जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में प्लाज्मा, प्लेटलेट्स-पीआरबीसी मिल सकेगा। इसके लिए तीमारदारों को मुरादाबाद, मेरठ, और दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। पहले जिले में कहीं भी यह व्यवस्था नहीं थी। ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित होगी। इसके लिए निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। यूनिट के शुरू होते ही एक यूनिट ब्लड से चार जिंदगी बचाई जा सकेंगी।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। जनपद में अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट नहीं होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा आदि निकालने की सुविधा नहीं होने से डेंगू आदि के गंभीर मरीजों के तीमारदारों को मुरादाबाद, मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित होगी। शासन से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। स्थापित होने के बाद खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। इससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। जनपद में अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट नहीं होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा आदि निकालने की सुविधा नहीं होने से डेंगू आदि के गंभीर मरीजों के तीमारदारों को मुरादाबाद, मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित होगी। शासन से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। स्थापित होने के बाद खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। इससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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