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नेतृत्व से नजदीकियों ने चमकाया चेतन का सितारा
अमरोहा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:43 AM IST
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चेतन चौहान
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पहले क्रिकेट और इसके बाद राजनीति के पिच पर भी अपना लोहा मनवा चुके पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर चेतन चौहान उत्तर प्रदेश की नवगठित कैबिनेट में गाजियाबाद से लेकर रामपुर तक फैले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अकेले कैबिनेट मंत्री बनकर क्षेत्र में सबसे कद्दावर चेहरे के रूप में उभरे हैं।
पहले विधानसभा चुनाव में टिकट, उसके बाद जीत और फिर कैबिनेट में स्थान बनाकर चेतन चौहान ने केंद्रीय नेतृत्व से अपनी नजदीकियों को तो साबित किया ही, साथ ही विरोधियों को ये भी बता दिया कि जले में उनके वर्चस्व को तोड़ पाना इतना आसान नहीं है।
कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का जिले से नाता बहुत पुराना है। अमरोहा वासियों ने उन्हें दो बार 1991 और 1998 में सांसद बनाकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजा था। हालांकि उन्हें 1996 में सपा के प्रताप सिंह सैनी और 1999 में बसपा के राशिद अल्वी से हार का भी सामना करना पड़ा था।
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इसके बाद 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया। यहां भी उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के हाथों हार सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में जब कंवर सिंह तंवर ने उनसे अमरोहा की सीट झटककर टिकट हासिल किया लोगों ने मान लिया कि उनका राजनीति पराभव हो गया है।
लेकिन चेतन चौहान ने 2017 में निफ्ट चेयरमैन की कुर्सी पाकर एक बार फिर साबित कर दिया भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के सामने न उनकी साख कमजोर हुई है और न ही उनकी राजनीतिक पारी का अंत। इसके बाद जिले की विधनासभा चुनाव से पहले नौगावां सादात सीट पर टिकट को लेकर मचे घमासान के बीच टिकट हासिल कर अपना राजनीतिक वर्चस्व एक बार फिर साबित किया।
घमासान तगड़ा था, लेकिन सभी विरोध का दरकिनार कर केंद्रीय नेतृत्व ने ये साफ संदेश दिया कि चेतन चौहान राष्ट्रीय चेहरा है, उनका निर्णय कहीं से गलत नहीं है। आलाकमान के निर्णय को सही साबित करते हुए चेतन चौहान ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी मौलाना जावेद आब्दी को लगभग 20 हजार मतों से पटखनी देकर आलाकमान के सामने साबित कर दिया कि अमरोहा में उनके वर्चस्व को तोड़ पाना इतना आसान नहीं है।
अब चेतन चौहान ने गाजियाबाद से लेकर रामपुर तक फैले क्षेत्र में अकेले कैबिनेटमंत्री बनकर अपने कद को एक बाद फिर साबित कर दिया है। हालांकि जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व ने उनपर भरोसा जताया है स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी उनसे उतनी ही ज्यादा हैं। चेतन चौहान के कैबिनेट मंत्री बनने से उत्साह से लबरेज जनता विकास की वैसी ही उम्मीद लगाकर बैठी है।
यूं रहा क्रिकेट का सफर
अमरोहा। चौहान ने साल 1969 में टेस्ट डेब्यू किया और 1981 में उन्होंने अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच खेला। चेतन चौहान भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज भी रह चुके हैं। चौहान ने 40 टेस्ट खेले, जिसमें उन्होंने 2084 रन बनाए। गौर करने वाली बात यह भी है कि चेतन चौहान ने एक भी टेस्ट शतक नहीं जड़ा। चेतन चौहान ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 11 हजार रन बनाए। चेतन चौहान की अपनी क्रिकेट अकादमी भी है।
यूं रहा राजनीतिक सफर
अमरोहा। चेतन चौहान ने बीजेपी की टिकट से 1991 में अमरोहा में चुनाव लड़ा और वे वहां से सांसद चुने गए। इसके बाद एक बार फिर 1996 में बीजेपी ने उन्हें इसी मैदान में चुनावी जंग के लिए उतारा, लेकिन इस बार वे जीत दर्ज नहीं करा पाए. 1998 में चेतन चौहान एक बार फिर सांसद चुने गए। वहीं, साल 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
मिल चुका है अर्जुन अवार्ड
अमरोहा। क्रिकेट के प्रति योगदान को देखते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के बतौर ओपनर बल्लेबाज खेल चुके चेतन चौहान को वर्ष 1981 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वो काफी समय तक दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद जनवरी 2017 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।
केंद्र सरकार ने बनाया था निफ्ट का चेयरमैन
अमरोहा। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भी चेतन चौहान अमरोहा से टिकट के दावेदार थे, लेकिन कंवर सिंह तंवर यहां से टिकट हासिल कर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से उनकी नजदीकियां काम आईं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतन चौहान को मोदी सरकार ने एक नई जिम्मेदारी दी। चेतन चौहान को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी) का चेयरमैन बनाया गया। हालांकि उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चौहान की नियुक्त पर सवाल खड़े किए थे। कहा था कि डीडीसीएम हुए घोटाले में अरुण जेटली का नाम बचाने पर उन्हें पुरस्कृत किया गया है। बताते चलें कि उस समय चेतन चौहान डीडीसीए के उपाध्यक्ष थे।
उम्मीदवारों की भीड़ में भारी पड़े थे चौहान
अमरोहा। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले से ही नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र भाजपाइयों के लिए हॉट सीट बनी थी। यहीं से टिकट के दावेदारों की लंबी फौज थी। सभी वरिष्ठ नेता थे। इसमें पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल, पूर्व एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, राहुल चौहान, युद्धवीर सिंह आदि नाम प्रमुख थे। लेकिन टिकट लेने में सफलता मिली चेतन चौहान को। टिकट होने के बाद विरोध भी हुआ, दिल्ली तक आवाज पहुंची, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने चेतन चौहान पर ही विश्वास जताया। चुनाव में सीएम के करीबी मौलाना जावेद आब्दी को 20 हजार वोटों से हराकर चेतन चौहान विधायक बने और अब कैबिनेट मंत्री।
विकास की गंगा बहाना ही लक्ष्य
अमरोहा। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद चेतन चौहान ने कहा कि अमरोहा की जनता ने दो बार मुझ पर विश्वास जताकर संसद में भेज चुकी है। मैं यहां की जनता का कर्जदार हूं। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद जिले में विकास की गंगा बहा दूंगा। तीन साल के भीतर जिले की सभी सड़कें चमकती हुई होंगी। केंद्र और प्रदेश में दोनों में अपनी सरकार है। विकास का नया इतिहास रचा जाएगा। कानून व्यवस्था ऐसी होगी कि लोग याद करेंगे।
प्रोफाइल
नाम चेतन चौहान
जन्म तिथि 21 जुलाई 1947
मूल निवास मूंढ़ा पांडे, मुरादाबाद
पत्नी संगीता चौहान
सम्मान अर्जुन अवार्ड
क्रिकेट करियर 40 टेस्ट
राजनीतिक करियर दो बार सांसद, विधायक एवं कैबिनेट मंत्री
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पहले विधानसभा चुनाव में टिकट, उसके बाद जीत और फिर कैबिनेट में स्थान बनाकर चेतन चौहान ने केंद्रीय नेतृत्व से अपनी नजदीकियों को तो साबित किया ही, साथ ही विरोधियों को ये भी बता दिया कि जले में उनके वर्चस्व को तोड़ पाना इतना आसान नहीं है।
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कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का जिले से नाता बहुत पुराना है। अमरोहा वासियों ने उन्हें दो बार 1991 और 1998 में सांसद बनाकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजा था। हालांकि उन्हें 1996 में सपा के प्रताप सिंह सैनी और 1999 में बसपा के राशिद अल्वी से हार का भी सामना करना पड़ा था।
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इसके बाद 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया। यहां भी उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के हाथों हार सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में जब कंवर सिंह तंवर ने उनसे अमरोहा की सीट झटककर टिकट हासिल किया लोगों ने मान लिया कि उनका राजनीति पराभव हो गया है।
लेकिन चेतन चौहान ने 2017 में निफ्ट चेयरमैन की कुर्सी पाकर एक बार फिर साबित कर दिया भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के सामने न उनकी साख कमजोर हुई है और न ही उनकी राजनीतिक पारी का अंत। इसके बाद जिले की विधनासभा चुनाव से पहले नौगावां सादात सीट पर टिकट को लेकर मचे घमासान के बीच टिकट हासिल कर अपना राजनीतिक वर्चस्व एक बार फिर साबित किया।
घमासान तगड़ा था, लेकिन सभी विरोध का दरकिनार कर केंद्रीय नेतृत्व ने ये साफ संदेश दिया कि चेतन चौहान राष्ट्रीय चेहरा है, उनका निर्णय कहीं से गलत नहीं है। आलाकमान के निर्णय को सही साबित करते हुए चेतन चौहान ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी मौलाना जावेद आब्दी को लगभग 20 हजार मतों से पटखनी देकर आलाकमान के सामने साबित कर दिया कि अमरोहा में उनके वर्चस्व को तोड़ पाना इतना आसान नहीं है।
अब चेतन चौहान ने गाजियाबाद से लेकर रामपुर तक फैले क्षेत्र में अकेले कैबिनेटमंत्री बनकर अपने कद को एक बाद फिर साबित कर दिया है। हालांकि जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व ने उनपर भरोसा जताया है स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी उनसे उतनी ही ज्यादा हैं। चेतन चौहान के कैबिनेट मंत्री बनने से उत्साह से लबरेज जनता विकास की वैसी ही उम्मीद लगाकर बैठी है।
यूं रहा क्रिकेट का सफर
अमरोहा। चौहान ने साल 1969 में टेस्ट डेब्यू किया और 1981 में उन्होंने अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच खेला। चेतन चौहान भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज भी रह चुके हैं। चौहान ने 40 टेस्ट खेले, जिसमें उन्होंने 2084 रन बनाए। गौर करने वाली बात यह भी है कि चेतन चौहान ने एक भी टेस्ट शतक नहीं जड़ा। चेतन चौहान ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 11 हजार रन बनाए। चेतन चौहान की अपनी क्रिकेट अकादमी भी है।
यूं रहा राजनीतिक सफर
अमरोहा। चेतन चौहान ने बीजेपी की टिकट से 1991 में अमरोहा में चुनाव लड़ा और वे वहां से सांसद चुने गए। इसके बाद एक बार फिर 1996 में बीजेपी ने उन्हें इसी मैदान में चुनावी जंग के लिए उतारा, लेकिन इस बार वे जीत दर्ज नहीं करा पाए. 1998 में चेतन चौहान एक बार फिर सांसद चुने गए। वहीं, साल 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
मिल चुका है अर्जुन अवार्ड
अमरोहा। क्रिकेट के प्रति योगदान को देखते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के बतौर ओपनर बल्लेबाज खेल चुके चेतन चौहान को वर्ष 1981 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वो काफी समय तक दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद जनवरी 2017 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।
केंद्र सरकार ने बनाया था निफ्ट का चेयरमैन
अमरोहा। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भी चेतन चौहान अमरोहा से टिकट के दावेदार थे, लेकिन कंवर सिंह तंवर यहां से टिकट हासिल कर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से उनकी नजदीकियां काम आईं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतन चौहान को मोदी सरकार ने एक नई जिम्मेदारी दी। चेतन चौहान को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी) का चेयरमैन बनाया गया। हालांकि उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चौहान की नियुक्त पर सवाल खड़े किए थे। कहा था कि डीडीसीएम हुए घोटाले में अरुण जेटली का नाम बचाने पर उन्हें पुरस्कृत किया गया है। बताते चलें कि उस समय चेतन चौहान डीडीसीए के उपाध्यक्ष थे।
उम्मीदवारों की भीड़ में भारी पड़े थे चौहान
अमरोहा। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले से ही नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र भाजपाइयों के लिए हॉट सीट बनी थी। यहीं से टिकट के दावेदारों की लंबी फौज थी। सभी वरिष्ठ नेता थे। इसमें पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल, पूर्व एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, राहुल चौहान, युद्धवीर सिंह आदि नाम प्रमुख थे। लेकिन टिकट लेने में सफलता मिली चेतन चौहान को। टिकट होने के बाद विरोध भी हुआ, दिल्ली तक आवाज पहुंची, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने चेतन चौहान पर ही विश्वास जताया। चुनाव में सीएम के करीबी मौलाना जावेद आब्दी को 20 हजार वोटों से हराकर चेतन चौहान विधायक बने और अब कैबिनेट मंत्री।
विकास की गंगा बहाना ही लक्ष्य
अमरोहा। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद चेतन चौहान ने कहा कि अमरोहा की जनता ने दो बार मुझ पर विश्वास जताकर संसद में भेज चुकी है। मैं यहां की जनता का कर्जदार हूं। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद जिले में विकास की गंगा बहा दूंगा। तीन साल के भीतर जिले की सभी सड़कें चमकती हुई होंगी। केंद्र और प्रदेश में दोनों में अपनी सरकार है। विकास का नया इतिहास रचा जाएगा। कानून व्यवस्था ऐसी होगी कि लोग याद करेंगे।
प्रोफाइल
नाम चेतन चौहान
जन्म तिथि 21 जुलाई 1947
मूल निवास मूंढ़ा पांडे, मुरादाबाद
पत्नी संगीता चौहान
सम्मान अर्जुन अवार्ड
क्रिकेट करियर 40 टेस्ट
राजनीतिक करियर दो बार सांसद, विधायक एवं कैबिनेट मंत्री