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अपराध छोड़कर खादी का चोला पहनना चाहता था शौकत
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:01 AM IST
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रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
- फोटो : demo pic
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भले ही पाशा ने अपराध की दुनिया का रास्ता चुनकर बेहताशा नाम कमाया हो, लेकिन उसका ख्वाब खादी का चोला पहनकर राजनीति में आना था। एक बार वह अमरोहा विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमा चुका था, लेकिन क्षेत्रीय जनता ने उसको स्वीकार नहीं किया था। जबरदस्त हार से वह इस कदर गुस्साया कि पुलिस के रिकार्ड में इतिहास बनाता गया। कभी यूपी तो कभी दिल्ली की पुलिस उसके पीछे लगी रही।
डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव टिकिया फत्तेहपुर माफी निवासी शौकत एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखता था, लेकिन जमीन के चक्कर में करीब 25 साल की उम्र में उसका भूरा से झगड़ा हो गया था।
इसके बाद उसने दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी थी। अन्य कई घटनाएं भी पुलिस के रिकार्ड का हिस्सा बनी थी, लेकिन इन सब अपराधों को वह राजनीति में उतरकर छिपाना चाहता था। इसलिए 2007 में वह जमानत पर छूटकर आया और अमरोहा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया। जबरदस्त चुनाव लड़ा, लेकिन जमानत जब्त हो गई।
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विधायक बनने का सपना टूट गया, जिसके बाद उसने राजनीति में भाग नहीं लिया, लेकिन राजनेताओं से करीबियां जरूर रखीं। अपराधों में लगातार उसका नाम चर्चाओं में बना रहा। वेस्ट यूपी तो कभी दिल्ली की पुलिस उसकी तलाश में भटकती रही, मगर कामयाबी कम ही मिली। अधिकतर मामलों में वह खुद ही सरेंडर हुआ। तिहाड़ की एक अदालत ने उसको सजा सुनाई, जिसके बाद अब वह पैरोल पर ही बाहर निकला हुआ था।
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डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव टिकिया फत्तेहपुर माफी निवासी शौकत एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखता था, लेकिन जमीन के चक्कर में करीब 25 साल की उम्र में उसका भूरा से झगड़ा हो गया था।
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इसके बाद उसने दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी थी। अन्य कई घटनाएं भी पुलिस के रिकार्ड का हिस्सा बनी थी, लेकिन इन सब अपराधों को वह राजनीति में उतरकर छिपाना चाहता था। इसलिए 2007 में वह जमानत पर छूटकर आया और अमरोहा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया। जबरदस्त चुनाव लड़ा, लेकिन जमानत जब्त हो गई।
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विधायक बनने का सपना टूट गया, जिसके बाद उसने राजनीति में भाग नहीं लिया, लेकिन राजनेताओं से करीबियां जरूर रखीं। अपराधों में लगातार उसका नाम चर्चाओं में बना रहा। वेस्ट यूपी तो कभी दिल्ली की पुलिस उसकी तलाश में भटकती रही, मगर कामयाबी कम ही मिली। अधिकतर मामलों में वह खुद ही सरेंडर हुआ। तिहाड़ की एक अदालत ने उसको सजा सुनाई, जिसके बाद अब वह पैरोल पर ही बाहर निकला हुआ था।