{"_id":"65754e740a000e50fd03adae","slug":"mp-danish-ali-can-take-political-steps-towards-moradabad-after-suspension-number-of-ticket-claimants-from-bsp-2023-12-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Danish Ali: बसपा से दानिश अली का निलंबन दो सीटों पर बढ़ाएगा उथल-पुथल, पार्टी बदलने के 68 दिन बाद ही बन गए थे MP","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Danish Ali: बसपा से दानिश अली का निलंबन दो सीटों पर बढ़ाएगा उथल-पुथल, पार्टी बदलने के 68 दिन बाद ही बन गए थे MP
Sun, 10 Dec 2023 12:28 PM IST
शाहरुख खान
मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, मुरादाबाद
मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 10 Dec 2023 12:28 PM IST
सार
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जनता दल एस छोड़कर बसपा में शामिल हुए कुंवर दानिश अली 68 दिन में सांसद बन गए थे। 16 मार्च 2019 को वह एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे। इसके चार दिन बाद ही मायावती ने दानिश अली को अमरोहा लोकसभा सीट से बसपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया था।
विज्ञापन
MP Danish Ali
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संसद में जोरदार तरीके से अपनी बात रखने के लिए मशहूर सांसद कुंवर दानिश अली के निलंबन से अमरोहा के साथ-साथ मुरादाबाद लोकसभा सीट की भी सियासी तस्वीर बदलेगी। दानिश मुरादाबाद को अपना नया सियासी ठिकाना बना सकते हैं। ऐसा हुआ तो दोनों लोकसभा सीटों पर राजनीतिक उथल पुथल मचना तय है।
अमरोहा में बसपा को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। अमरोहा में बसपा के साथ-साथ सपा में नए दावेदारों के नाम बढ़ सकते हैं। वहीं दानिश के मुरादाबाद से ताल ठोकने की स्थिति में बनी तो सपा और कांग्रेस के टिकट के दावेदारों को अपना पैंतरा बदलना पड़ेगा।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था। मंडल की छह लोकसभा सीटों में तीन पर बसपा और तीन पर सपा ने अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। इस गठबंधन के आगे भाजपा को मंडल में मुंह की खानी पड़ी थी। प्रदेश में गठबंधन ने मुरादाबाद मंडल में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था।
विज्ञापन
बसपा ने अमरोहा, बिजनौर और नगीना लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। वहीं मुरादाबाद, संभल और रामपुर लोकसभा सीट पर सपा ने जीत का परचम लहराया था। सियासी उतार चढ़ाव के बीच बसपा ने सांसद दानिश अली को निलंबित कर दिया है। जिसे लेकर मंडल में सियासी हलचल बढ़ गई है।
विज्ञापन
अमरोहा में बसपा को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। अमरोहा में बसपा के साथ-साथ सपा में नए दावेदारों के नाम बढ़ सकते हैं। वहीं दानिश के मुरादाबाद से ताल ठोकने की स्थिति में बनी तो सपा और कांग्रेस के टिकट के दावेदारों को अपना पैंतरा बदलना पड़ेगा।
विज्ञापन
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था। मंडल की छह लोकसभा सीटों में तीन पर बसपा और तीन पर सपा ने अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। इस गठबंधन के आगे भाजपा को मंडल में मुंह की खानी पड़ी थी। प्रदेश में गठबंधन ने मुरादाबाद मंडल में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था।
विज्ञापन
बसपा ने अमरोहा, बिजनौर और नगीना लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। वहीं मुरादाबाद, संभल और रामपुर लोकसभा सीट पर सपा ने जीत का परचम लहराया था। सियासी उतार चढ़ाव के बीच बसपा ने सांसद दानिश अली को निलंबित कर दिया है। जिसे लेकर मंडल में सियासी हलचल बढ़ गई है।
संसद में भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी से विवाद के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद ही उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इन चर्चाओं ने दानिश के मुरादाबाद सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की सियासी हवा को जन्म दे दिया। ऐसे में अमरोहा और मुरादाबाद लोकसभा सीट पर सियासी उथल पुथल होना तय माना जा रहा है। फिलहाल दोनों लोकसभा सीटों के दावेदारों की नजर दानिश के अगले कदम पर है।
मुस्लिम-दलित समीकरण से 20 साल बाद जीती थी बसपा
- बसपा ने दलित और मुस्लिम गठजोड़ के सहारे बीस साल बाद अमरोहा लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। ऐसी स्थिति में बसपा को इस फार्मूले पर नए सिरे से मंथन करना पड़ सकता है।
- बसपा ने दलित और मुस्लिम गठजोड़ के सहारे बीस साल बाद अमरोहा लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। ऐसी स्थिति में बसपा को इस फार्मूले पर नए सिरे से मंथन करना पड़ सकता है।
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने राशिद अल्वी को अमरोहा लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। राशिद अल्वी के जरिये बसपा ने पहली बार अमरोहा सीट पर जीत दर्ज की थी। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। बीस साल बाद 2019 में दानिश अली बसपा के टिकट पर सांसद बने। अभी तक सियासी चर्चाओं के मुताबिक वह भी राशिद अल्वी की राह पर चलकर कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
दानिश अली 68 दिन में बन गए थे सांसद
मुरादाबाद। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जनता दल एस छोड़कर बसपा में शामिल हुए कुंवर दानिश अली 68 दिन में सांसद बन गए थे। 16 मार्च 2019 को वह एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे। इसके चार दिन बाद ही मायावती ने दानिश अली को अमरोहा लोकसभा सीट से बसपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया था। 23 मई 2019 को हुई मतगणना में वह विजयी घोषित किए गए। इससे पहले गढ़ विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले दानिश की पहचान जनता दल सेक्युलर के कद्दावर नेता के रूप में थी। वह वहां पार्टी के प्रवक्ता थे।
मुरादाबाद। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जनता दल एस छोड़कर बसपा में शामिल हुए कुंवर दानिश अली 68 दिन में सांसद बन गए थे। 16 मार्च 2019 को वह एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे। इसके चार दिन बाद ही मायावती ने दानिश अली को अमरोहा लोकसभा सीट से बसपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया था। 23 मई 2019 को हुई मतगणना में वह विजयी घोषित किए गए। इससे पहले गढ़ विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले दानिश की पहचान जनता दल सेक्युलर के कद्दावर नेता के रूप में थी। वह वहां पार्टी के प्रवक्ता थे।
बसपा में हाशिये पर ही रहे दानिश
दानिश अली बसपा के टिकट पर भले ही अमरोहा से सांसद बन गए, लेकिन वह पार्टी में हमेशा हाशिये पर ही रहे। कभी तीन तलाक के मुद्दे को लेकर तो कभी अनुच्छेद 370 को लेकर उनके विचार पार्टी लाइन से अलग रहे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दानिश को दो बार पार्टी संसदीय दल का नेता बनाया। लेकिन उनकी अलग धारा के कारण दोनों बार उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
दानिश अली बसपा के टिकट पर भले ही अमरोहा से सांसद बन गए, लेकिन वह पार्टी में हमेशा हाशिये पर ही रहे। कभी तीन तलाक के मुद्दे को लेकर तो कभी अनुच्छेद 370 को लेकर उनके विचार पार्टी लाइन से अलग रहे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दानिश को दो बार पार्टी संसदीय दल का नेता बनाया। लेकिन उनकी अलग धारा के कारण दोनों बार उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
मुरादाबाद लोकसभा सीट से दावेदार
- सपा से वर्तमान सांसद डॉ. एसटी हसन, कांठ विधायक कमाल अख्तर, देहात विधायक हाजी नासिर कुरैशी।
- भाजपा से पूर्व सांसद सर्वेश सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम।
- कांग्रेस से पूर्व सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, पूर्व सांसद राशिद अल्वी, पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता मीम अफजल, पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी।
- सपा से वर्तमान सांसद डॉ. एसटी हसन, कांठ विधायक कमाल अख्तर, देहात विधायक हाजी नासिर कुरैशी।
- भाजपा से पूर्व सांसद सर्वेश सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम।
- कांग्रेस से पूर्व सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, पूर्व सांसद राशिद अल्वी, पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता मीम अफजल, पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी।
अमरोहा लोकसभा सीट से दावेदार
- सपा से अजय मलिक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू चौधरी, पूर्व विधायक अशफाक अली, पूर्व एमएलसी परवेज।
- भाजपा से पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर, पूर्व विधायक राजेश सिंह चुन्नू, सोरन सिंह, चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान, पूर्व विधायक कमल मलिक।
- सपा से अजय मलिक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू चौधरी, पूर्व विधायक अशफाक अली, पूर्व एमएलसी परवेज।
- भाजपा से पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर, पूर्व विधायक राजेश सिंह चुन्नू, सोरन सिंह, चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान, पूर्व विधायक कमल मलिक।