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मंडी समिति में दो रुपये किलो बिक रहीं अमियांं
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:00 AM IST
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पाकिस्तानी आम को भारतीय आम देगा टक्कर
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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जिस फसल को देख आम उत्पादक अच्छे मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठे थे, वह आंधी व बारिश ने तोड़ दी है। बागों में कच्ची आमियां टूटकर गिर गई हैं, जिनका मंडी समितियों में भी कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। एक व दो रुपए किलो की बोली लगाने पर भी लोग नहीं खरीद रहे हैं, जिसकी वजह से ठेकेदारों व आम उत्पादकों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। मंगलवार को एक बागवां आम के ढेर पर सिर पकड़कर बैठा और आंसू बहा रहा था।
मई माह में आठ बार आंधी व तूफान आ चुका है। हर बार तबाह हुई है तो वह आम की फसल है। गत रविवार की रात आए तूफान ने तो मानों आम उत्पादकों के अरमानों पर पानी फेर दिया। इस कदर आम टूटकर गिरे कि भरपाई पाना मुश्किल है। पकने के बाद जिन आमियों की कीमत लाखों में होती, अब वह कोडियों के भाव बिक रही है। हैरानी की बात ये है कि उनको खरीदने वाले भी नहीं मिल रहे हैं।
मंगलवार को अमरोहा मंडी समिति परिसर में कच्ची आमियों के ढेर लगे नजर आए। एक व दो रुपए किलो की बोली लग रही थीं, किन्तु वहां कोई भी खरीददार नजर नहीं आ रहा था। शहर के मोहल्ला नौगजा निवासी वृद्ध इदरीश ने माथा पकड़कर कच्चे आम के ढेर पर बैठे थे और आंसू बहा रहे थे। कह रहे थे कि इस बार मुनाफे की बजाय नुकसान हो गया है।
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मई माह में आठ बार आंधी व तूफान आ चुका है। हर बार तबाह हुई है तो वह आम की फसल है। गत रविवार की रात आए तूफान ने तो मानों आम उत्पादकों के अरमानों पर पानी फेर दिया। इस कदर आम टूटकर गिरे कि भरपाई पाना मुश्किल है। पकने के बाद जिन आमियों की कीमत लाखों में होती, अब वह कोडियों के भाव बिक रही है। हैरानी की बात ये है कि उनको खरीदने वाले भी नहीं मिल रहे हैं।
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मंगलवार को अमरोहा मंडी समिति परिसर में कच्ची आमियों के ढेर लगे नजर आए। एक व दो रुपए किलो की बोली लग रही थीं, किन्तु वहां कोई भी खरीददार नजर नहीं आ रहा था। शहर के मोहल्ला नौगजा निवासी वृद्ध इदरीश ने माथा पकड़कर कच्चे आम के ढेर पर बैठे थे और आंसू बहा रहे थे। कह रहे थे कि इस बार मुनाफे की बजाय नुकसान हो गया है।
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