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मंडी धनौरा : दीवारों में दरार तो कहीं टपक रही स्कूलों की छत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 02:37 AM IST
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Mandi Dhanora: Cracks in walls and leaking roofs in schools
मंडी धनौरा (अमरोहा)।
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क्षेत्र में बुनियादी शिक्षा की हालत बेहद खस्ताहाल है। परिषदीय स्कूलों में देश का भविष्य जर्जर और खस्ताहाल भवनों में अपनी भविष्य की नींव रख रहा है। हालत यह है कि कहीं स्कूलों की छत टपक रही है तो कहीं दीवारों में दरार भी साफ दिखाई दे रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार अभी भी ब्लॉक में 29 स्कूलों के भवन जर्जर हाल हैं। दो स्कूलों में कानूनी विवाद की वजह से चहारदीवारी नहीं है तो एक की चहारदीवारी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई।
अंग्रेजी हुकूमत के समय बनी जर्जर बिल्डिंग में पढ़ने को मजबूर
नगर में स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल का भवन अंग्रेजी हुकूमत सन 1935 में बना था। यहां बने दो कमरे वर्षों पहले अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। आए दिन छत से प्लास्टर टूट कर गिरता है लेकिन इसके बाद भी मजबूरी में बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल कर यहां पढ़ रहे हैं। बरामदा भी क्षतिग्रस्त हो चला है। विभाग ने 90 साल पुराने भवन को जर्जर घोषित कर रखा है लेकिन जिम्मेदार शायद किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। यहां 55 छात्राएं पंजीकृत हैं। करीब 90 प्रतिशत उपस्थिति बच्चों की रोजाना रहती है। छात्राएं व शिक्षक इस उम्मीद में स्कूल आते हैं कि शायद उनको किसी अन्य स्कूल भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। शौचालय की स्थिति संतोषजनक थी। यहां प्रधानाध्यापक व दो महिला शिक्षक की तैनाती है।
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यहां टपक रही स्कूल की छत
नगर के ही जूनियर हाईस्कूल की स्थिति तो इससे भी खराब है। यहां सन 1902 से शिक्षण कार्य चल रहा है। इसका भवन 1936 में बना था। यहां दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। यहां 38 बच्चे पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को 30 स्कूल आए थे। सभी बच्चे एक ही कमरे में बैठे हुए थे। प्रधानाध्यापिका उर्मिला देवी ने बताया कि विभाग ने कमरों के बाहर जर्जर लिख रखा है। यहां दो शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। प्राइमरी स्कूल संख्या एक में कुल चार कमरे हैं। एक कमरा पूरी तरह जर्जर है। दूसरे की छत टपकती है। छत की मरम्मत करा कर काम लिया जा रहा है। एक कमरे को विभागीय अधिकारी आए दिन अपने काम में ले लेते हैं। बृहस्पतिवार को उस कमरे में बैठने वाले कक्षा एक के बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ रहे थे। यहां 121 बच्चे पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को 96 बच्चे आए थे। इस स्कूल की चहारदीवारी नहीं है। कानूनी विवाद के कारण चहारदीवारी नहीं हो पाई है। इसका भवन का निर्माण भी 1944 में कराया गया था। यहां चार शिक्षक व तीन शिक्षा मित्र की तैनाती है।
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दीवारों में आ गई लंबी दरार
कंपाेजिट विद्यालय कमालपुर में प्रधानाध्यापिका कार्यालय की दीवार में लंबी दरार पड़ी हुई है। इंचार्ज अध्यापिका कंचन अग्रवाल ने बताया कि रेलवे ट्रैक के पास होने के कारण कंपन होता है। यहां एक कक्षा में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। उनका कहना था कि फर्नीचर की डिमांड भेजी जा चुकी है। यहां प्राइमरी में 31 व जूनियर में 23 बच्चे पंजीकृत हैं। इब्राहीमपुर गांव में मिड डे मील के नाम पर बच्चों को सिर्फ पीले रंग की ग्रेवी परोसी गई थी। मेन्यू के अनुसार आलू व बड़िया देनी थी लेकिन मौके पर देखा गया तो बच्चों की थाली में सिर्फ पीला पानी था। स्कूल वाले रास्ते में कीचड़ भरी हुई थी। बच्चों को उससे होकर ही गुजरना पड़ता है। बच्चे भोजन के बर्तन स्वयं साफ कर रहे थे। यहां 57 बच्चें पंजीकृत है जबकि 47 मौजूद थे।
ये हैं धनौरा के जर्जर भवन
प्राइमरी स्कूल सैरकपुर, संविलियन विद्यालय शरीफपुर शुमाली, प्राथमिक विद्यालय मुरादपुर, प्रावि आलमनगर, प्राथवि ताजपुर, प्राइमरी स्कूल पहाड़पुर प्रथम, प्राइमरी स्कूल शाहजहांपुर, प्राइमरी स्कूल इब्राहीमपुर, प्राइमरी स्कूल दो, प्राइमरी स्कूल दौराला, प्राइमरी स्कूल पेलीतगा, उच्च प्राथमिक विद्यालय ढयोटी, प्राइमरी स्कूल डींगरा, प्राइमरी स्कूल हिरनाखेड़ी, प्राइमरी स्कूल फिरोजपुर बगद, प्राइमरी स्कूल फंदेड़ी, प्राइमरी स्कूल अलीनगर, प्राइमरी स्कूल मरगूबपुर, प्राइमरी स्कूल पथवारी, प्राइमरी स्कूल पीपली तगा, प्राइमरी स्कूल कपसुवा, उच्च प्राथमिक स्कूल देहरा चक, उच्च प्राथमिक स्कूल धनौरा, कन्या जूनियर हाईस्कूल धनौरा, प्राइमरी स्कूल संख्या एक, संविलियन विद्यालय अख्तियारपुर, प्राइमरी स्कूल कमेलपुर, प्राइमरी स्कूल वसी मुस्तकम, संविलियन विद्यालय चकनवाला।
ब्लॉक में 13962 बच्चे पंजीकृत हैं
मंडी धनौरा ब्लॉक में कुल 181 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें प्राइमरी स्कूलों की संख्या 105, जूनियर हाईस्कूल की संख्या 19 व कंपोजिट विद्यालयों की संख्या 57 हैं। इनमें 13962 बच्चें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 6891 छात्र जबकि छात्राओं की संख्या 7071 है। जर्जर भवनों की संख्या 29 है।


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जर्जर भवनों को गिराने के लिए नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। कई भवनों की अपेक्षित नीलामी लागत नहीं आने पर उनके पुन: मूल्यांकन के लिए बड़े अधिकारियों को लिखा गया है। बच्चों को जर्जर भवन से हटाकर सुरक्षित कमरों में पढ़ाया जा रहा है। जिन स्कूलों में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ रहे हैं। वहां के लिए फर्नीचर की डिमांड भेजी गई है। - प्रकाश चंद, खंड शिक्षा अधिकारी धनौरा
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