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हाईकोर्ट सख्त: अधिकार क्षेत्र से बाहर आदेश देने पर एसडीएम तलब
Sun, 26 Apr 2026 01:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:29 AM IST
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अमरोहा। मुस्लिम कमेटी की नुमाइंदगी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एसडीएम सदर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि एसडीएम द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित करना गंभीर मामला है और यह न्यायालय के पूर्व निर्देशों की अवहेलना के समान है।
अधिवक्ता आरिफ मलिक ने बताया कि 24 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने पाया कि एसडीएम स्तर पहले ही इस प्रकरण में 21 अप्रैल 2025 को निर्णय दे चुके थे। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा हस्तक्षेप करते हुए न केवल जांच अधिकारी नियुक्त किया, बल्कि 7 अप्रैल 2026 को नया आदेश भी पारित कर दिया। कोर्ट ने इसे विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
इकबाल खान गुट के अधिवक्ता विनीत मिश्रा ने तर्क रखा कि एक बार आदेश पारित होने के बाद एसडीएम के पास पुनः उसी मामले में आदेश देने का कोई अधिकार नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने पूर्व आदेशों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की, जो पूरी तरह अवैधानिक है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह आचरण न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
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हाईकोर्ट ने एसडीएम को 4 मई को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें अपने आदेश के संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर स्पष्टीकरण देने को कहा है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही हाईकोर्ट ने एसडीएम के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए इकबाल खान गुट हाईकोर्ट पहुंचा था। अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। आगामी चार मई की सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।
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यह है पूरा मामला
मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष पद को लेकर करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा है। एक पक्ष इकबाल खान गुट का है, जिसे पूर्व में सहायक निबंधक कार्यालय से मान्यता प्राप्त हो चुकी थी, जबकि दूसरा पक्ष हाजी खुर्शीद अनवर गुट है, जो इस मान्यता को लगातार चुनौती देता रहा है। दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई उस समय और तेज हो गई जब जुलूस-ए-मोहम्मदी के संचालन को लेकर प्रशासन से अनुमति मांगी गई। हाजी खुर्शीद अनवर ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की और बाद में एसडीएम कोर्ट में भी वाद प्रस्तुत किया। इस दौरान तत्कालीन एसडीएम शशि भूषण पाठक ने स्थगन आदेश जारी किया था। दोनों पक्षों ने अपने-अपने चुनाव को वैध बताया। हाजी खुर्शीद अनवर का दावा है कि 26 जून 2024 को सोसाइटीज पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत चुनाव कर उन्हें अध्यक्ष चुना गया, जबकि इकबाल खान गुट का कहना है कि 29 जुलाई 2024 को आयोजित साधारण सभा में उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया, जिसे बाद में सहायक निबंधक ने मान्यता दी। बाद में एसडीएम सदर शैलेश कुमार दुबे ने इकबाल खान गुट के चुनाव को अवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया और प्रकरण को मुरादाबाद स्थित सहायक निबंधक फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे।
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अधिवक्ता आरिफ मलिक ने बताया कि 24 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने पाया कि एसडीएम स्तर पहले ही इस प्रकरण में 21 अप्रैल 2025 को निर्णय दे चुके थे। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा हस्तक्षेप करते हुए न केवल जांच अधिकारी नियुक्त किया, बल्कि 7 अप्रैल 2026 को नया आदेश भी पारित कर दिया। कोर्ट ने इसे विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
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इकबाल खान गुट के अधिवक्ता विनीत मिश्रा ने तर्क रखा कि एक बार आदेश पारित होने के बाद एसडीएम के पास पुनः उसी मामले में आदेश देने का कोई अधिकार नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने पूर्व आदेशों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की, जो पूरी तरह अवैधानिक है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह आचरण न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
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हाईकोर्ट ने एसडीएम को 4 मई को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें अपने आदेश के संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर स्पष्टीकरण देने को कहा है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही हाईकोर्ट ने एसडीएम के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए इकबाल खान गुट हाईकोर्ट पहुंचा था। अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। आगामी चार मई की सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।
यह है पूरा मामला
मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष पद को लेकर करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा है। एक पक्ष इकबाल खान गुट का है, जिसे पूर्व में सहायक निबंधक कार्यालय से मान्यता प्राप्त हो चुकी थी, जबकि दूसरा पक्ष हाजी खुर्शीद अनवर गुट है, जो इस मान्यता को लगातार चुनौती देता रहा है। दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई उस समय और तेज हो गई जब जुलूस-ए-मोहम्मदी के संचालन को लेकर प्रशासन से अनुमति मांगी गई। हाजी खुर्शीद अनवर ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की और बाद में एसडीएम कोर्ट में भी वाद प्रस्तुत किया। इस दौरान तत्कालीन एसडीएम शशि भूषण पाठक ने स्थगन आदेश जारी किया था। दोनों पक्षों ने अपने-अपने चुनाव को वैध बताया। हाजी खुर्शीद अनवर का दावा है कि 26 जून 2024 को सोसाइटीज पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत चुनाव कर उन्हें अध्यक्ष चुना गया, जबकि इकबाल खान गुट का कहना है कि 29 जुलाई 2024 को आयोजित साधारण सभा में उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया, जिसे बाद में सहायक निबंधक ने मान्यता दी। बाद में एसडीएम सदर शैलेश कुमार दुबे ने इकबाल खान गुट के चुनाव को अवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया और प्रकरण को मुरादाबाद स्थित सहायक निबंधक फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे।