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हजरत मोहम्मद साहब को कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा : बर्क
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अमरोहा। मुस्लिम कमेटी की ओर से जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्ल. की 17 दिवसीय कार्यक्रम का चौथा दिवस मनाया गया। इसमें संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि कुरान के अनुसार हजरत मोहम्मद (सल्ल.) को सारे आलम के लिए रहमत बना कर भेजा गया था।
कार्यक्रम रेहमतुल्लील आलमीन और हमारा समाज शीर्षक से सीरत कॉन्फ्रेंस मोहल्ला नल स्थित एक रिसोर्ट में आयोजित हुआ। मौलाना साद अमरोही, जुबैर इब्ने सैफी ने बारगाहे रिसालत में नातिया कलाम पेश किया। सांसद बर्क ने कहा कि नबी जानते थे कि उनकी रिसालत को मानने वाले दुनिया के मुख्तलिफ हिस्सों में होंगे। जहां ये मुमकिन है कि वहां की हुकूमत मुसलमानों की नहीं हो। इसलिए उन्होंने अपने उम्मतियों को अपने वतन से मोहब्बत करने की तालीम दी। वहां के हुक्मरानों के बनाए विधानों के मातहत काम करने का हुक्म दिया।
मौलाना दानिश कारी ने कहा कि मुसलमानों को पूरी तरह सीरत ए रसूल अपनानी चाहिए। मुसलमानों को कुरान और हदीस पर अमल करना चाहिए। हुजूर की सुन्नतों पर चलकर जिंदगी गुजारनी चाहिए। मोहब्बते रसूल के बगैर अल्लाह तक नहीं पहुंच सकते। इस दौरान मौलाना असलम बरेलवी, डॉ. माजिद देवबंदी, डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी, सभासद फहीम शाहनवाज, हाजी सैयद नदीम अब्बास जैदी, डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीकी, हाजी मुजफ्फर अली अंसारी, अब्दुल कय्यूम राईनी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम रेहमतुल्लील आलमीन और हमारा समाज शीर्षक से सीरत कॉन्फ्रेंस मोहल्ला नल स्थित एक रिसोर्ट में आयोजित हुआ। मौलाना साद अमरोही, जुबैर इब्ने सैफी ने बारगाहे रिसालत में नातिया कलाम पेश किया। सांसद बर्क ने कहा कि नबी जानते थे कि उनकी रिसालत को मानने वाले दुनिया के मुख्तलिफ हिस्सों में होंगे। जहां ये मुमकिन है कि वहां की हुकूमत मुसलमानों की नहीं हो। इसलिए उन्होंने अपने उम्मतियों को अपने वतन से मोहब्बत करने की तालीम दी। वहां के हुक्मरानों के बनाए विधानों के मातहत काम करने का हुक्म दिया।
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मौलाना दानिश कारी ने कहा कि मुसलमानों को पूरी तरह सीरत ए रसूल अपनानी चाहिए। मुसलमानों को कुरान और हदीस पर अमल करना चाहिए। हुजूर की सुन्नतों पर चलकर जिंदगी गुजारनी चाहिए। मोहब्बते रसूल के बगैर अल्लाह तक नहीं पहुंच सकते। इस दौरान मौलाना असलम बरेलवी, डॉ. माजिद देवबंदी, डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी, सभासद फहीम शाहनवाज, हाजी सैयद नदीम अब्बास जैदी, डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीकी, हाजी मुजफ्फर अली अंसारी, अब्दुल कय्यूम राईनी मौजूद रहे।
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