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Amroha News: गंगा ने बदला रास्ता, तीन से चार किमी दूर हुई धारा
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गजरौला। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले तिगरी गंगा मेले में स्नान के लिए श्रद्धालुओं को तीन से चार किमी पैदल चलना पड़ेगा। क्योंकि जहां पर बीते साल गंगा की जलधारा बहती थी, वहां इस बार दूर-दूर तक रेत ही रेत दिखाई दे रहा है। सदर रोड से गंगा की मुख्य धारा की दूरी तीन से चार किमी है।
इस बार गंगा की जलधारा का रुख बदल गया। गंगा उत्तर में रेती छोड़ दक्षिण की तरफ पहुंच गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि तिगरी, मोहरका पट्टी व कांकाठेर के सामने खेतों से गंगा की जलधारा करीब तीन से चार किमी दूर है। हालांकि ढांग के किनारे एक नाला बह रहा है। जिसमें अभी थोड़ा जल है। संभावना जताई जा रही है और तिगरी के अमित त्यागी, घासी सिंह, मोहरका पट्टी के अलीजान आदि ग्रामीणों का कहना है कि दस दिन बाद यह नाला सूख जाएगा। वैसे भी नाले के ऊपर ही तीन रोड बनाई जा रही हैं। इस कारण उसका सूख जाना भी निश्चित है। इसके बाद मुख्य धारा ही स्नान के लिए रह जाएगी। जिस तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को तीन से चार किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। एसडीएम राजीव राज का कहना है कि इस बार गंगा की जलधारा दक्षिण की तरफ हो जाने के कारण श्रद्धालुओं को दूरी तय करनी पड़ेगी।
मेले में श्रद्धालुओं को थकाएगा रेतीला मार्ग
गजरौला। तिगरी गंगा मेले में ढांग के नीचे बह रहे नाले से वीआईपी रोड, सदर रोड और बाजार रोड गुजरेगी, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिस नाले पर तीनों रोड बनाई जाएंगी, उसके आस पास ही नहीं बल्कि दक्षिण, पूरब और पश्चिम में दूर-दूर तक रेत ही रेत है। मिट्टी का बिलकुल भी नहीं है। मामूली हवा चलने पर भी रेत उड़ने लगता है। रोड पर तो कांस बिछाई जाएगी, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रोड के अलावा दाएं-बाएं भी चलती है। रेत में जरा सी दूर चलना भी मुश्किल हो जाता है। ठेकेदार का कहना है कि इस बार पानी का छिड़काव अधिक कराना पड़ेगा। पुआल भी बहुत अधिक बिछाने की जरूरत पड़ेगी, जबकि बीते साल में पुआल कहीं-कहीं बिछाना पड़ा था।
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इस बार गंगा की जलधारा का रुख बदल गया। गंगा उत्तर में रेती छोड़ दक्षिण की तरफ पहुंच गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि तिगरी, मोहरका पट्टी व कांकाठेर के सामने खेतों से गंगा की जलधारा करीब तीन से चार किमी दूर है। हालांकि ढांग के किनारे एक नाला बह रहा है। जिसमें अभी थोड़ा जल है। संभावना जताई जा रही है और तिगरी के अमित त्यागी, घासी सिंह, मोहरका पट्टी के अलीजान आदि ग्रामीणों का कहना है कि दस दिन बाद यह नाला सूख जाएगा। वैसे भी नाले के ऊपर ही तीन रोड बनाई जा रही हैं। इस कारण उसका सूख जाना भी निश्चित है। इसके बाद मुख्य धारा ही स्नान के लिए रह जाएगी। जिस तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को तीन से चार किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। एसडीएम राजीव राज का कहना है कि इस बार गंगा की जलधारा दक्षिण की तरफ हो जाने के कारण श्रद्धालुओं को दूरी तय करनी पड़ेगी।
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मेले में श्रद्धालुओं को थकाएगा रेतीला मार्ग
गजरौला। तिगरी गंगा मेले में ढांग के नीचे बह रहे नाले से वीआईपी रोड, सदर रोड और बाजार रोड गुजरेगी, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिस नाले पर तीनों रोड बनाई जाएंगी, उसके आस पास ही नहीं बल्कि दक्षिण, पूरब और पश्चिम में दूर-दूर तक रेत ही रेत है। मिट्टी का बिलकुल भी नहीं है। मामूली हवा चलने पर भी रेत उड़ने लगता है। रोड पर तो कांस बिछाई जाएगी, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रोड के अलावा दाएं-बाएं भी चलती है। रेत में जरा सी दूर चलना भी मुश्किल हो जाता है। ठेकेदार का कहना है कि इस बार पानी का छिड़काव अधिक कराना पड़ेगा। पुआल भी बहुत अधिक बिछाने की जरूरत पड़ेगी, जबकि बीते साल में पुआल कहीं-कहीं बिछाना पड़ा था।
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