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करनपुर माफी में शौचालय निर्माण में हुआ 16.98 लाख का घोटाला
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हसनपुर(अमरोहा) । ब्लॉक क्षेत्र के गांव करनपुर माफी में विकास कार्यों की जांच हर दिन आगे बढ़ती जा रही है। अब शौचालय निर्माण में 16.98 लाख का घोटाला सामने आया है। इससे पूर्व मनरेगा एवं अन्य विकास कार्यों में गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। डीपीआरओ ने ग्राम प्रधान को नोटिस जारी कर साक्ष्यों के साथ तीन दिन में लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
क्षेत्र के गांव करनपुर माफी निवासी देवेश चौहान ने 23 जून 2020 को जिलाधिकारी उमेश मिश्र को प्रार्थना पत्र देकर गांव में विकास कार्यों, शौचालय निर्माण एवं मनरेगा कार्य में धांधलेबाजी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डीएम ने इसकी जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार को सौंपी थी। टीम ने गांव पहुंचकर मामले की जांच की थी। जांच होने के बाद फर्जीवाड़े की पोल खुल गई थी। मनरेगा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई तो अन्य विकास कार्यों में भी घोटाला उजागर हुआ। शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया। जिला पंचायत राज अधिकारी वानस्पती झा ने प्रधान ओमवती को नोटिस जारी करते हुए लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही वसूली की चेतावनी दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने नोटिस में कहा कि है कि सितंबर में की गई जांच में सामने आया है कि शौचालय निर्माण में ऐसे 28 व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। जिन्हें वर्ष 2005-2010 के कार्यकाल के पूर्व प्रधान द्वारा लाभान्वित किया गया था। इसके अलावा 69 ऐसे व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया तो जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। एक ही परिवार में पति-पत्नी को अलग-अलग शौचालय की धनराशि देकर लाभ दिखाया गया। कुछ व्यक्तियों को छह-छह हजार रुपये की प्रथम किस्त दी गई है। इसके अतिरिक्त 90 ऐसे व्यक्तियों को शौचालय निर्माण दर्शाया गया जिनका नाम जिला स्तर पर उपलब्ध कराई गई सूची में शामिल नहीं है। इस हिसाब से शौचालय निर्माण में 16 लाख 98 हजार का दुरुपयोग किया गया। नोटिस में कहा गया कि तीन दिन के अंदर लिखित स्पष्टीकरण साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करें। अन्यथा प्रधान के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं शिकायतकर्ता देवेश चौहान का आरोप है कि जांच में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा रही है।
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क्षेत्र के गांव करनपुर माफी निवासी देवेश चौहान ने 23 जून 2020 को जिलाधिकारी उमेश मिश्र को प्रार्थना पत्र देकर गांव में विकास कार्यों, शौचालय निर्माण एवं मनरेगा कार्य में धांधलेबाजी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डीएम ने इसकी जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार को सौंपी थी। टीम ने गांव पहुंचकर मामले की जांच की थी। जांच होने के बाद फर्जीवाड़े की पोल खुल गई थी। मनरेगा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई तो अन्य विकास कार्यों में भी घोटाला उजागर हुआ। शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया। जिला पंचायत राज अधिकारी वानस्पती झा ने प्रधान ओमवती को नोटिस जारी करते हुए लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही वसूली की चेतावनी दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने नोटिस में कहा कि है कि सितंबर में की गई जांच में सामने आया है कि शौचालय निर्माण में ऐसे 28 व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। जिन्हें वर्ष 2005-2010 के कार्यकाल के पूर्व प्रधान द्वारा लाभान्वित किया गया था। इसके अलावा 69 ऐसे व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया तो जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। एक ही परिवार में पति-पत्नी को अलग-अलग शौचालय की धनराशि देकर लाभ दिखाया गया। कुछ व्यक्तियों को छह-छह हजार रुपये की प्रथम किस्त दी गई है। इसके अतिरिक्त 90 ऐसे व्यक्तियों को शौचालय निर्माण दर्शाया गया जिनका नाम जिला स्तर पर उपलब्ध कराई गई सूची में शामिल नहीं है। इस हिसाब से शौचालय निर्माण में 16 लाख 98 हजार का दुरुपयोग किया गया। नोटिस में कहा गया कि तीन दिन के अंदर लिखित स्पष्टीकरण साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करें। अन्यथा प्रधान के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं शिकायतकर्ता देवेश चौहान का आरोप है कि जांच में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा रही है।
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