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कार्तिक मेला स्थल डूबा, खेतों में पानी
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 15 Aug 2016 01:11 AM IST
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तिगरी में गंगा में उफान आने पर गंगा के पानी में डूबी झुग्गियां।
- फोटो : amar ujala
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पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश से गंगा उफान पर है। इससे बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। हरिद्वार और बिजनौर डैम से छोड़ा जा रहा पानी इस खतरे को और बढ़ा रहा है।
फिलहाल किनारों का कटान कर आगे बढ़ रही गंगा ने दूर-दूर तक खादर क्षेत्र की धान और शकरकंदी की फसलों को जलमग्न कर दिया है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। वहीं तिगरी में कार्तिक मेला स्थल भी डूब गया है।
बता दें कि तिगरी से गंगा बह कर ब्रजघाट की ओर जा रहीं है। तिगरी से ब्रजघाट के बीच करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल में गंगा किनारे के खेतों में भरे पानी से फसलों पर संकट गहरा गया है। कांकाठेर के गांव ओसीदा जग्देपुर में करीब दो किलोमीटर तक किसानों के गन्ना, धान, चरी, मक्का और लॉकी आदि के खेत गंगा के पानी में डूब गए हैं। खेतों की ओर जा रहे रास्ते भी दिखाई नहीं दे रही है।
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उसी प्रकार तिगरी के मुख्य गंगा घाट से करीब तीन किलोमीटर दूर कार्तिक मेला स्थल के पास के खेतों तक पानी पहुंच गया है। कटान के दौरान चिकनी मिट्टी दलदल के रूप में खेतों में जमा हो गई है। खेत पार करने में किसानों के घुटने तक दलदल में पांव फंस जाते हैं। ऐसे में यदि कहीं ज्यादा दलदल हुई तो किसान की जान पर भी बन सकती है। किसान जोखिम उठा कर खेतों पर पहुंच रहे हैं।
तहसील के खादर क्षेत्र में बाढ़ की आशंका अभी भी बनी हुई है। शनिवार को बाढ़ आशंकित क्षेत्रों का एडीएम की ओर से निरीक्षण करने के बाद सरकारी अमला अलर्ट पर है। बाढ़ चौकियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। लेखपालों को हर समय चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। एडीएम के आदेश के बावजूद बाढ़ आशंकित क्षेत्रों में चिकित्सकों की कोई टीम नहीं पहुची। ग्रामीणों में इसको लेकर रोष है। तहसील के खादर क्षेत्र के गांवों पपसरी खादर, मुकारमपुर, देवीपुरा, चांदरा फार्म, इब्राहीमपुर, शाहजहांपुर आदि में बाढ़ की आशंका है। फिलहाल निचले इलाकों में पानी भरा है।
ग्रामीण अपने पशुओं के लिए चारा पानी के बीच से गुजर कर ला रहे हैं। रसूलपुर भांवर के ग्रामीणों ने दूसरे दिन भी किसी भी डाक्टर के नहीं पहुंचने पर नाराजगी व्यक्त की है। ग्राम प्रधान सतनाम सिंह का कहना है कि उनके गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं है।रूखालू। गंगा में जल स्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के दर्जनों गांव प्रभावित हैं।
गंगा बांध के दूसरी तरफ यानी गंगा की रेती में फसलें उगाने वाले किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल पूरी तरह से गंगा के पानी में डूब चुकी हैं और ग्रामीणों को चारा लाने तक के लिए गहरे पानी से होकर जाना पड़ रहा है। उड़द, मक्का और लौकी की गंगा में उफान आने से रेतीली भूमि पर लगाई गईं, उड़द, मक्का व लोकी की फसल पूरी तरह से डूब चुकी हैं। एसडीएम अशोक मौर्य ने बताया कि गंगा का पानी गांवों में नहीं घुसा है। लेकिन कुछ फसलें जो गंगा के नजदीक हैं, वह पानी में डूब चुकीं है। लेखपाल व कानूनगो से लगातार गंगा के पानी की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
इन गांवों के किसानों की फसलें डूब चुकीं
हसनपुर तहसील के खादर क्षेत्र के गांव सतेड़ा, मटैना, गंगाचौली, सिरसा गुर्जर, पिपलौती, महरपुर, श्यामपुरी, गंगानगर समेत दर्जनों गांवों के किसानों की फसलें पानी में डूब चुकी हैं। किसान अकुंर सिंह, परमा व नन्हां का कहना है कि खेत से चारा लाने में काफी परेशानी हो रही है। खेत पर जाते समय डूब जाने का खतरा बना रहता है। पानी में घुसकर ही चारा काटा जाता है।
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फिलहाल किनारों का कटान कर आगे बढ़ रही गंगा ने दूर-दूर तक खादर क्षेत्र की धान और शकरकंदी की फसलों को जलमग्न कर दिया है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। वहीं तिगरी में कार्तिक मेला स्थल भी डूब गया है।
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बता दें कि तिगरी से गंगा बह कर ब्रजघाट की ओर जा रहीं है। तिगरी से ब्रजघाट के बीच करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल में गंगा किनारे के खेतों में भरे पानी से फसलों पर संकट गहरा गया है। कांकाठेर के गांव ओसीदा जग्देपुर में करीब दो किलोमीटर तक किसानों के गन्ना, धान, चरी, मक्का और लॉकी आदि के खेत गंगा के पानी में डूब गए हैं। खेतों की ओर जा रहे रास्ते भी दिखाई नहीं दे रही है।
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उसी प्रकार तिगरी के मुख्य गंगा घाट से करीब तीन किलोमीटर दूर कार्तिक मेला स्थल के पास के खेतों तक पानी पहुंच गया है। कटान के दौरान चिकनी मिट्टी दलदल के रूप में खेतों में जमा हो गई है। खेत पार करने में किसानों के घुटने तक दलदल में पांव फंस जाते हैं। ऐसे में यदि कहीं ज्यादा दलदल हुई तो किसान की जान पर भी बन सकती है। किसान जोखिम उठा कर खेतों पर पहुंच रहे हैं।
तहसील के खादर क्षेत्र में बाढ़ की आशंका अभी भी बनी हुई है। शनिवार को बाढ़ आशंकित क्षेत्रों का एडीएम की ओर से निरीक्षण करने के बाद सरकारी अमला अलर्ट पर है। बाढ़ चौकियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। लेखपालों को हर समय चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। एडीएम के आदेश के बावजूद बाढ़ आशंकित क्षेत्रों में चिकित्सकों की कोई टीम नहीं पहुची। ग्रामीणों में इसको लेकर रोष है। तहसील के खादर क्षेत्र के गांवों पपसरी खादर, मुकारमपुर, देवीपुरा, चांदरा फार्म, इब्राहीमपुर, शाहजहांपुर आदि में बाढ़ की आशंका है। फिलहाल निचले इलाकों में पानी भरा है।
ग्रामीण अपने पशुओं के लिए चारा पानी के बीच से गुजर कर ला रहे हैं। रसूलपुर भांवर के ग्रामीणों ने दूसरे दिन भी किसी भी डाक्टर के नहीं पहुंचने पर नाराजगी व्यक्त की है। ग्राम प्रधान सतनाम सिंह का कहना है कि उनके गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं है।रूखालू। गंगा में जल स्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के दर्जनों गांव प्रभावित हैं।
गंगा बांध के दूसरी तरफ यानी गंगा की रेती में फसलें उगाने वाले किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल पूरी तरह से गंगा के पानी में डूब चुकी हैं और ग्रामीणों को चारा लाने तक के लिए गहरे पानी से होकर जाना पड़ रहा है। उड़द, मक्का और लौकी की गंगा में उफान आने से रेतीली भूमि पर लगाई गईं, उड़द, मक्का व लोकी की फसल पूरी तरह से डूब चुकी हैं। एसडीएम अशोक मौर्य ने बताया कि गंगा का पानी गांवों में नहीं घुसा है। लेकिन कुछ फसलें जो गंगा के नजदीक हैं, वह पानी में डूब चुकीं है। लेखपाल व कानूनगो से लगातार गंगा के पानी की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
इन गांवों के किसानों की फसलें डूब चुकीं
हसनपुर तहसील के खादर क्षेत्र के गांव सतेड़ा, मटैना, गंगाचौली, सिरसा गुर्जर, पिपलौती, महरपुर, श्यामपुरी, गंगानगर समेत दर्जनों गांवों के किसानों की फसलें पानी में डूब चुकी हैं। किसान अकुंर सिंह, परमा व नन्हां का कहना है कि खेत से चारा लाने में काफी परेशानी हो रही है। खेत पर जाते समय डूब जाने का खतरा बना रहता है। पानी में घुसकर ही चारा काटा जाता है।