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Amroha News: पीएम कुसुम योजना में किसानों ने नहीं दिखाई रुचि
Tue, 07 Jan 2025 01:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 07 Jan 2025 01:32 AM IST
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अमरोहा।
सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाई गई पीएम कुसुम योजना से किसानों का मोहभंग हो रहा है। योजना के लिए जिले को मिला लक्ष्य पूरा होना तो दूर, आवेदन करने वाले 50 फीसदी से भी कम किसानों ने ही अपना अंशदान जमा कर योजना के लिए रूचि दिखाई है। योजना के लिए जिले को 1450 आवेदन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके सापेक्ष केवल 564 किसानों ने ही योजना में शामिल होने के लिए अंशदान जमा किया है।
बिजली की खपत कम करने के लिए सरकार ने सोलर को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की थी। जिसमें दो हॉर्स पावर से लेकर किसान 10 हॉर्स पावर तक सोलर पंप की सुविधा दी जाती है। दो एचपी पंप के लिए चार इंच, तीन एवं पांच एचपी के लिए छह इंच, 7.5 एचपी और 10 एचपी के लिए आठ इंच की बोरिंग होना अनिवार्य है। इसके लिए किसान को 60 फीसदी का अनुदान भी दिया जाता है, लेकिन इसके बाद भी किसान इसमें रूचि नहीं ले पा रहे हैं।
जागरूकता का अभाव अथवा योजना में कहीं कमी किसानों को इस और आकर्षित नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि जिले को इस वित्तीय वर्ष में 1450 सोलर पंप का लक्ष्य दिया गया था। जिसके सापेक्ष आवेदन करने वाले केवल 564 किसानों ने ही योजना में रूचि दिखाते हुए अपना अंशदान जमा किया है।
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यूपी नेडा की ओर से मिलता है 90% का अनुदान
कृषि विभाग की पीएम कुसुम योजना के तहत कम अनुदान दिया जाना भी किसानों की रुचि कम होने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। कृषि विभाग की योजना में जहां 60% का अनुदान मिलता है। वहीं, यूपी नेडा की पीएम कुसुम सी-1 योजना में 90 फीसदी का अनुदान दिया जाता है। यूपी नेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी चंद्र प्रकाश वर्मा के अनुसार फिलहाल योजना की दरों मे संशोधन किया गया है। दिसंबर तक योजन के तहत लगभग 20 सोलर पंप के कनेक्शन दिए गए हैं।
- योजना का प्रचार-प्रसार न होना भी बड़ा कारण है। गांव से जुडे लेखपाल अथवा कृषि के स्थानीय विभागीय अधिकारी योजना की जानकारी नहीं देते हैं। जिससे किसान इसमें आवेदन करने से चूक जाते हैं। - नीतू सिंह, किसान
- योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी बाद में आती है। अगर यह सब्सिडी पहले ही मिल जाए तो किसान को इसका लाभ अधिक मिलेगा। किसान पर इतना पैसा नहीं होता कि वह पहले रुपए जमा कर दे। सरकार को इसका और अधिक प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। - सत्यपाल सिंह, किसान
- योजना से किसानों को लाभान्वित करने के लिए समुचित प्रचार-प्रसार किया जाता है। यह सही है कि कम अनुदान की वजह से किसान योजना की और कम रूख कर रहे हैं। शासन स्तर से जल्द ही योजना के तहत मिलने वाले अनुदान को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। - डॉ. राम प्रवेश, कृषि उपनिदेशक
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सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाई गई पीएम कुसुम योजना से किसानों का मोहभंग हो रहा है। योजना के लिए जिले को मिला लक्ष्य पूरा होना तो दूर, आवेदन करने वाले 50 फीसदी से भी कम किसानों ने ही अपना अंशदान जमा कर योजना के लिए रूचि दिखाई है। योजना के लिए जिले को 1450 आवेदन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके सापेक्ष केवल 564 किसानों ने ही योजना में शामिल होने के लिए अंशदान जमा किया है।
बिजली की खपत कम करने के लिए सरकार ने सोलर को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की थी। जिसमें दो हॉर्स पावर से लेकर किसान 10 हॉर्स पावर तक सोलर पंप की सुविधा दी जाती है। दो एचपी पंप के लिए चार इंच, तीन एवं पांच एचपी के लिए छह इंच, 7.5 एचपी और 10 एचपी के लिए आठ इंच की बोरिंग होना अनिवार्य है। इसके लिए किसान को 60 फीसदी का अनुदान भी दिया जाता है, लेकिन इसके बाद भी किसान इसमें रूचि नहीं ले पा रहे हैं।
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जागरूकता का अभाव अथवा योजना में कहीं कमी किसानों को इस और आकर्षित नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि जिले को इस वित्तीय वर्ष में 1450 सोलर पंप का लक्ष्य दिया गया था। जिसके सापेक्ष आवेदन करने वाले केवल 564 किसानों ने ही योजना में रूचि दिखाते हुए अपना अंशदान जमा किया है।
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यूपी नेडा की ओर से मिलता है 90% का अनुदान
कृषि विभाग की पीएम कुसुम योजना के तहत कम अनुदान दिया जाना भी किसानों की रुचि कम होने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। कृषि विभाग की योजना में जहां 60% का अनुदान मिलता है। वहीं, यूपी नेडा की पीएम कुसुम सी-1 योजना में 90 फीसदी का अनुदान दिया जाता है। यूपी नेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी चंद्र प्रकाश वर्मा के अनुसार फिलहाल योजना की दरों मे संशोधन किया गया है। दिसंबर तक योजन के तहत लगभग 20 सोलर पंप के कनेक्शन दिए गए हैं।
- योजना का प्रचार-प्रसार न होना भी बड़ा कारण है। गांव से जुडे लेखपाल अथवा कृषि के स्थानीय विभागीय अधिकारी योजना की जानकारी नहीं देते हैं। जिससे किसान इसमें आवेदन करने से चूक जाते हैं। - नीतू सिंह, किसान
- योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी बाद में आती है। अगर यह सब्सिडी पहले ही मिल जाए तो किसान को इसका लाभ अधिक मिलेगा। किसान पर इतना पैसा नहीं होता कि वह पहले रुपए जमा कर दे। सरकार को इसका और अधिक प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। - सत्यपाल सिंह, किसान
- योजना से किसानों को लाभान्वित करने के लिए समुचित प्रचार-प्रसार किया जाता है। यह सही है कि कम अनुदान की वजह से किसान योजना की और कम रूख कर रहे हैं। शासन स्तर से जल्द ही योजना के तहत मिलने वाले अनुदान को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। - डॉ. राम प्रवेश, कृषि उपनिदेशक