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हैंडपंप सूखे, नलकूपों ने भी छोड़ा साथ, कैसे बुझे लोगों की प्यास
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गजरौला। अति दोहन के चलते भूमिगत जल काफी नीचे हो गया है। हालात यह हो गए हैं कि नागरिकों की प्यास बुझाने को लगे नलकूप पानी छोड़ने लगे। पेयजल की समस्या पैदा हुई तो पालिका के होश उड़ गए। पालिका ने मिनी नलकूपों को रिबोर कराया। 20 से 50 फीट के पाइप डालकर सबमर्सिबल नीचे रखवाई।
नगर पालिका क्षेत्र में सात बड़े नलकूप और चार मिनी नलकूप हैं। इसके अलावा तकरीबन साढ़े पांच सौ हैंडपंप हैं। जिनसे नगर की आबादी की प्यास बुझाई जाती है। मगर गौर करने वाली बात यह है कि नगर में पीने और आवश्यक कार्यों के अलावा भी पानी का बहुत अधिक दोहन किया गया। गाड़ियों की धुलाई और घरों की सफाई के दौरान मोटर और सबमर्सिबल चलाकर छोड़ दिया जाता है। जिससे बहुत अधिक पानी बर्बाद होता है। इस वजह से भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है। नतीजतन नलों, हैंडपंपों और नलकूप पानी छोड़ने लगे। कुछ देर चलने के बाद ही नलों, हैंडपंप और नलकूपों ने पानी उगलना बंद किया तो पालिका के होश उड़ गए। आबादी की प्यास बुझाने की समस्या खड़ी हो गई। जिस पर हरकत में आई पालिका ने दो नलकूपों और 22 हैंडपंपों को रिबोर कराया। नलकूपों में 20 से 50 फीट लंबे पाइप डालकर सबमर्सिबल नीचे रखवाई। तब जाकर पेयजल की समस्या से निजात मिली।
पानी के दोहन में एमडीए व सुल्ताननगर की हालत सबसे अधिक खराब
गजरौला। जल के अति दोहन से वैसे तो नगर के सभी मोहल्ले प्रभावित हैं, लेकिन सबसे अधिक हालत खराब दो मोहल्लों के हैं। जिसमें सबसे अधिक वीआईपी माने जाने वाली एमडीए कालोनी भी शामिल है। यहां लगी मिनी नलकूप बहुत कम पानी देता था। जिसके चलते नागरिकों को पेयजल मुहैया कराना मुश्किल हो गया। सुल्तान नगर मोहल्ले में स्थित मिनी नलकूप भी पानी छोड़ जाती थी। सबसे अधिक दिक्कत भीषण गर्मी में पड़ती थी। संवाद
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एमडीए व सुल्तान नगर की मिनी नलकूप को रिबोर कराया गया है। यह कम पानी देती थीं। इसके अलावा नगर के 22 हैंडपंप भी रिबोर कराए गए हैं। जिससे नागरिकों के सामने पेयजल की समस्या न आए।
-विजेंद्र सिंह पाल अधिशासी अधिकारी
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नगर पालिका क्षेत्र में सात बड़े नलकूप और चार मिनी नलकूप हैं। इसके अलावा तकरीबन साढ़े पांच सौ हैंडपंप हैं। जिनसे नगर की आबादी की प्यास बुझाई जाती है। मगर गौर करने वाली बात यह है कि नगर में पीने और आवश्यक कार्यों के अलावा भी पानी का बहुत अधिक दोहन किया गया। गाड़ियों की धुलाई और घरों की सफाई के दौरान मोटर और सबमर्सिबल चलाकर छोड़ दिया जाता है। जिससे बहुत अधिक पानी बर्बाद होता है। इस वजह से भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है। नतीजतन नलों, हैंडपंपों और नलकूप पानी छोड़ने लगे। कुछ देर चलने के बाद ही नलों, हैंडपंप और नलकूपों ने पानी उगलना बंद किया तो पालिका के होश उड़ गए। आबादी की प्यास बुझाने की समस्या खड़ी हो गई। जिस पर हरकत में आई पालिका ने दो नलकूपों और 22 हैंडपंपों को रिबोर कराया। नलकूपों में 20 से 50 फीट लंबे पाइप डालकर सबमर्सिबल नीचे रखवाई। तब जाकर पेयजल की समस्या से निजात मिली।
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पानी के दोहन में एमडीए व सुल्ताननगर की हालत सबसे अधिक खराब
गजरौला। जल के अति दोहन से वैसे तो नगर के सभी मोहल्ले प्रभावित हैं, लेकिन सबसे अधिक हालत खराब दो मोहल्लों के हैं। जिसमें सबसे अधिक वीआईपी माने जाने वाली एमडीए कालोनी भी शामिल है। यहां लगी मिनी नलकूप बहुत कम पानी देता था। जिसके चलते नागरिकों को पेयजल मुहैया कराना मुश्किल हो गया। सुल्तान नगर मोहल्ले में स्थित मिनी नलकूप भी पानी छोड़ जाती थी। सबसे अधिक दिक्कत भीषण गर्मी में पड़ती थी। संवाद
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एमडीए व सुल्तान नगर की मिनी नलकूप को रिबोर कराया गया है। यह कम पानी देती थीं। इसके अलावा नगर के 22 हैंडपंप भी रिबोर कराए गए हैं। जिससे नागरिकों के सामने पेयजल की समस्या न आए।
-विजेंद्र सिंह पाल अधिशासी अधिकारी