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...तो जा सकती है पायल की प्रधानी
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:54 AM IST
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शिकायत में कहा गया है कि प्रधान की उम्र हाईस्कूल के प्रमाण पत्र के मुताबिक 19 वर्ष है, लेकिन पांचवीं का फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर उन्होंने चुनाव लड़ा। अब मामले की जांच जिला पंचायत राज अधिकारी कर रहे हैं। छह माह के भीतर इसका जवाब हाईकोर्ट में दाखिल किया जाना है।
कुम्हरिया गांव से प्रधानी का चुनाव लड़े लोकेश कुमार ने डीएम से आठ जनवरी को शिकायत की थी कि प्रधान बनी पायल उप्र पंचायती राज अधिनियम 1947 अध्याय दो क में वर्णित ग्राम प्रधान के उम्मीदवार की आयु 21 वर्ष से अधिक होने के प्रावधान को तोड़कर 19 वर्ष की आयु में प्रधान बन गई हैं, जोकि गलत है।
कार्रवाई नहीं होने पर लोकेश कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह माह में जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए। लोकेश ने पायल की हाईस्कूल की मार्कशीट प्रमाण के तौर पर लगाई है, जिसमें पायल की जन्मतिथि 10 मई 1996 दिखाई है। इसके मुताबिक चुनाव के दौरान पायल की उम्र 19 वर्ष बनती है।
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वोटरलिस्ट भी प्रस्तुत की गई है जिसमें पायल की उम्र 18 वर्ष अंकित है। आरोप है कि पायल ने पांचवीं की फर्जी मार्कशीट बनवाकर चुनाव लड़ा है। हाईकोर्ट के आदेश पर कमिश्नर ने डीएम को जांच सौंपी है। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पूरे मामले में जांच करने के आदेश कर दिए हैं।
हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रधान की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। क्योंकि इसी तरह के एक रायबरेली के गांव में मामला आने पर प्रशासन ने प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराके कार्रवाई की है।
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कुम्हरिया गांव से प्रधानी का चुनाव लड़े लोकेश कुमार ने डीएम से आठ जनवरी को शिकायत की थी कि प्रधान बनी पायल उप्र पंचायती राज अधिनियम 1947 अध्याय दो क में वर्णित ग्राम प्रधान के उम्मीदवार की आयु 21 वर्ष से अधिक होने के प्रावधान को तोड़कर 19 वर्ष की आयु में प्रधान बन गई हैं, जोकि गलत है।
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कार्रवाई नहीं होने पर लोकेश कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह माह में जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए। लोकेश ने पायल की हाईस्कूल की मार्कशीट प्रमाण के तौर पर लगाई है, जिसमें पायल की जन्मतिथि 10 मई 1996 दिखाई है। इसके मुताबिक चुनाव के दौरान पायल की उम्र 19 वर्ष बनती है।
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वोटरलिस्ट भी प्रस्तुत की गई है जिसमें पायल की उम्र 18 वर्ष अंकित है। आरोप है कि पायल ने पांचवीं की फर्जी मार्कशीट बनवाकर चुनाव लड़ा है। हाईकोर्ट के आदेश पर कमिश्नर ने डीएम को जांच सौंपी है। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पूरे मामले में जांच करने के आदेश कर दिए हैं।
हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रधान की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। क्योंकि इसी तरह के एक रायबरेली के गांव में मामला आने पर प्रशासन ने प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराके कार्रवाई की है।