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महिला थाने को किसी दूसरे की जमीन बेच रहे थे माफिया
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 28 Jun 2016 01:26 AM IST
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दरअसल महिला थाने की एसओ अंजू भदौरिया को जो जमीन दिलाई जा रही थ्ाी, वह बेचने वाले व्यक्ति के बजाय किसी दूसरे के नाम निकली। जांच में मामला खुलने पर एसओ के होश उड़ गए और भूमाफियाओं के झंझट में फंसने से बच गईं।
लाखों की जमीन खरीदने से पहले ही फर्जीवाड़ा खुल गया। इस बार तो भूमाफिया ने पुलिस को ही फांसने के लिए अपनी चाल चल दी। हालांकि पुलिस भूमाफिया के मकड़जाल में फंसते-फंसते रह गई। जमीन का सौदा कर लिया, लेकिन रुपये देने से पूर्व ही सच्चाई खुल गई।
जमीन किसी की और बेचने वाला कोई दूसरा निकला। हैरानी की बात ये है कि भूमि भी पहले से ही बेची पाई गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले में शातिरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। शातिरों का कारनामा विभाग में चर्चा का विषय बना है।
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यदि आप शहर में जमीन खरीदना चाहते हैं तो जरा संभलकर। यहां भूमाफिया का ऐसा रैकेट सक्रिय है जो दूसरों की जमीन को अपनी बताकर झांसा देता है। लाखों के वारे न्यारे करता है। आम आदमी की तो बाद ही क्या की जाए जब इस रैकेट का निशाना हमारी पुलिस भी बनते-बनते रह गई। बताते हैं कि जिले में महिला थाने का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए एसओ महिला अंजू भदौरिया द्वारा करीब एक बीघा जमीन की तलाश की जा रही थीं। किसी ने बंबूगढ़ मार्ग पर जगह बताई।
शमीम नाम के इस शख्स ने एसओ को झांसे में लिया और बताया कि ये जमीन हमारी है। प्लाट उसके द्वारा ही काटे गए हैं। थानेदार पूरी तरह मुतमईन हो गईं। जब उन्होंने जमीन की अन्य फारमेल्टी को पूरा करने की तैयारी की तभी जांच में एक शख्स सामने आ गया। कहा कि ये जमीन उसने नौ साल पहले खरीद रखी है। सुनते ही एसओ के होश उड़ गए। सच्चाई खुलने पर जब एसओ ने दोनों पक्ष को बुलाया तो कोई पेश नहीं हुआ। माफियाओं के फर्जीवाड़े में फंसने से पुलिस बच गई। अगर रकम दे देती तो माजरा कुछ और बन जाता।
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लाखों की जमीन खरीदने से पहले ही फर्जीवाड़ा खुल गया। इस बार तो भूमाफिया ने पुलिस को ही फांसने के लिए अपनी चाल चल दी। हालांकि पुलिस भूमाफिया के मकड़जाल में फंसते-फंसते रह गई। जमीन का सौदा कर लिया, लेकिन रुपये देने से पूर्व ही सच्चाई खुल गई।
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जमीन किसी की और बेचने वाला कोई दूसरा निकला। हैरानी की बात ये है कि भूमि भी पहले से ही बेची पाई गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले में शातिरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। शातिरों का कारनामा विभाग में चर्चा का विषय बना है।
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यदि आप शहर में जमीन खरीदना चाहते हैं तो जरा संभलकर। यहां भूमाफिया का ऐसा रैकेट सक्रिय है जो दूसरों की जमीन को अपनी बताकर झांसा देता है। लाखों के वारे न्यारे करता है। आम आदमी की तो बाद ही क्या की जाए जब इस रैकेट का निशाना हमारी पुलिस भी बनते-बनते रह गई। बताते हैं कि जिले में महिला थाने का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए एसओ महिला अंजू भदौरिया द्वारा करीब एक बीघा जमीन की तलाश की जा रही थीं। किसी ने बंबूगढ़ मार्ग पर जगह बताई।
शमीम नाम के इस शख्स ने एसओ को झांसे में लिया और बताया कि ये जमीन हमारी है। प्लाट उसके द्वारा ही काटे गए हैं। थानेदार पूरी तरह मुतमईन हो गईं। जब उन्होंने जमीन की अन्य फारमेल्टी को पूरा करने की तैयारी की तभी जांच में एक शख्स सामने आ गया। कहा कि ये जमीन उसने नौ साल पहले खरीद रखी है। सुनते ही एसओ के होश उड़ गए। सच्चाई खुलने पर जब एसओ ने दोनों पक्ष को बुलाया तो कोई पेश नहीं हुआ। माफियाओं के फर्जीवाड़े में फंसने से पुलिस बच गई। अगर रकम दे देती तो माजरा कुछ और बन जाता।