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बादलों ने बढ़ाया सुहागिनों का इंतजार, देर से हो सका चांद का दीदार
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अमरोहा में करवा चौथ पर चांद का दीदार करतीं सुहागिनें।
- फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। जिलेभर में करवाचौथ का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। त्योहार को लेकर सुहागिनों में उत्साह देखा गया। सुहागिनों ने सोलह शृंगार कर पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखा। शाम तक भूखी प्यासी रहीं। लेकिन आसमान में बादल छाए रहने से चंद्रमा थोड़ी देर से नजर आया। देर रात चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति का दीदार किया। सजना के हाथों से पानी पीकर सुहागिनों ने व्रत खोला।
रविवार को सुहाग का प्रतीक त्योहार करवाचौथ जिले भर में उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। त्योहार को लेकर सुहागिन उत्साहित रहीं। दुल्हन की तरह सोलह शृंगार किया। हाथों पर सजना के नाम की मेहंदी रचाई। पांवों में महावर लगाया। चांदी की नई पाजेब और बिछुवे पहने। सुबह स्नान कर महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा। दोपहर के समय विधिविधान के साथ करवाचौथ व्रत की कथा के साथ पूजा अर्चना आदि की। शाम के समय करवों का पूजन किया गया। कई जगहों पर सामूहिक करवाचौथ का पूजन किया गया। इसके बाद महिलाओं ने पति की पसंद का घरों में विभिन्न प्रकार के लजीज पकवान बनाए। त्योहार के चलते घरों में चहल-पहल देखी गई। वहीं, महिलाओं ने चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार किया। देर शाम को छलनी में जलता हुआ दीपक रखकर चंद्रमा और पति का दीदार किया। चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु के लिए कामना की। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोला। इसके पतियों ने पत्नियों को उपहार आदि भेंट किए।
ये है करवा चौथ की मान्यता
अमरोहा। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यता है कि द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। एक दिन अर्जुन नीलगिरी पर्वत गए। पीछे से पांडवों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से सहायता मांगी। उन्होंने द्रोपदी को बताया कि ऐसी संकट की घड़ी में पार्वती जी ने शिव जी से पूछा था कि क्या किया जाए। उन्होंने संकट से उबरने के लिए करवा चौथ व्रत रखने की सलाह दी थी। इसके बाद द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत रखा और पांडवों का संकट टल गया। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और उनके संकट हरण को करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
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मंदिरों में हुई पूजा अर्चना
अमरोहा। करवा चौथ पर जहां महिलाओं ने घरों पर चंद्र दर्शन के बाद व्रत का खोला। वहीं सुहागिनों ने पति के साथ अपने आसपास के मंदिर जाकर भी विशेष पूजा अर्चना की। श्री वासुदेव तीर्थ, बाबा गंगानाथ मंदिर, चौरासी घंटा मंदिर, दुर्गा मंदिर, बजरंग मंदिर, बालाजी मंदिर, साईं मंदिर सहित तमाम मंदिरों में चंद्र दर्शन के बाद पतियों के साथ सुहागिनों ने मंदिरों में जाकर प्रसाद चढ़ाया। भगवान से पति के सारे कष्टों का दूर करने और परिवार में सुख और शांति के लिए प्रार्थना की।
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रविवार को सुहाग का प्रतीक त्योहार करवाचौथ जिले भर में उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। त्योहार को लेकर सुहागिन उत्साहित रहीं। दुल्हन की तरह सोलह शृंगार किया। हाथों पर सजना के नाम की मेहंदी रचाई। पांवों में महावर लगाया। चांदी की नई पाजेब और बिछुवे पहने। सुबह स्नान कर महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा। दोपहर के समय विधिविधान के साथ करवाचौथ व्रत की कथा के साथ पूजा अर्चना आदि की। शाम के समय करवों का पूजन किया गया। कई जगहों पर सामूहिक करवाचौथ का पूजन किया गया। इसके बाद महिलाओं ने पति की पसंद का घरों में विभिन्न प्रकार के लजीज पकवान बनाए। त्योहार के चलते घरों में चहल-पहल देखी गई। वहीं, महिलाओं ने चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार किया। देर शाम को छलनी में जलता हुआ दीपक रखकर चंद्रमा और पति का दीदार किया। चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु के लिए कामना की। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोला। इसके पतियों ने पत्नियों को उपहार आदि भेंट किए।
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ये है करवा चौथ की मान्यता
अमरोहा। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यता है कि द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। एक दिन अर्जुन नीलगिरी पर्वत गए। पीछे से पांडवों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से सहायता मांगी। उन्होंने द्रोपदी को बताया कि ऐसी संकट की घड़ी में पार्वती जी ने शिव जी से पूछा था कि क्या किया जाए। उन्होंने संकट से उबरने के लिए करवा चौथ व्रत रखने की सलाह दी थी। इसके बाद द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत रखा और पांडवों का संकट टल गया। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और उनके संकट हरण को करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
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मंदिरों में हुई पूजा अर्चना
अमरोहा। करवा चौथ पर जहां महिलाओं ने घरों पर चंद्र दर्शन के बाद व्रत का खोला। वहीं सुहागिनों ने पति के साथ अपने आसपास के मंदिर जाकर भी विशेष पूजा अर्चना की। श्री वासुदेव तीर्थ, बाबा गंगानाथ मंदिर, चौरासी घंटा मंदिर, दुर्गा मंदिर, बजरंग मंदिर, बालाजी मंदिर, साईं मंदिर सहित तमाम मंदिरों में चंद्र दर्शन के बाद पतियों के साथ सुहागिनों ने मंदिरों में जाकर प्रसाद चढ़ाया। भगवान से पति के सारे कष्टों का दूर करने और परिवार में सुख और शांति के लिए प्रार्थना की।