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मोटी कमाई के चक्कर में ऊंटों का धड़ल्ले से हो रहा अवैध कटान
विकल सिंह/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 18 Jun 2016 01:07 AM IST
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- फोटो : daily mail
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जिले में कई स्थानों पर ऊंटों का कटान धड़ल्ले से हो रहा है। इसके लिए कंटेनरों और ट्रकों में भरकर राजस्थान से ऊंट लाए जा रहे हैं। जिले के कई थाना क्षेत्र ऐसे हैं जहां बाकायदा ऊंटों को काटने के लिए अवैध स्लाटर हाउस बनाए गए हैं।
स्थानीय पुलिस ऊंट काटने वालों को खुला संरक्षण दिए हुए है। राजस्थान से 60 हजार से एक लाख रुपये में खरीदकर लाया गया ऊंट कटने के बाद पांच से छह लाख रुपये तक का मुनाफा कराता है, यही वजह है कि ऊंट काटने का अवैध कारोबार पनपता जा रहा है।
रजबपुर, डिडौली, नौगावां सादात, गजरौला और हसनपुर में ऊंट कटान का अवैध कारोबार हो रहा है। सूत्रों के अनुसार पायंती कला में ऊंट काटने के लिए बड़ा सा हाता बनाया गया है। नौगावां सादात में एक बाग में ऊंटों का कटान होता है।
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डिडौली के जोई गांव के आसपास और पायंती कलां में ऊंट काटने का कारोबार कुछ तस्कर कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस की जानकारी में भी ऊंट काटने के स्थान भी हैं। तस्कर भी पुलिस के पास आकर उठते-बैठते हैं। इससे अवैध रूप से ऊंट काटने के कारोबारियों और पुलिस की मिलीभगत का इशारा हो रहा है।
जयपुर से एक ऊंट कारोबारी ने बताया कि एक ऊंट की कीमत राजस्थान में कीमत 60 हजार से एक लाख रुपये तक होती है। जबकि कटने के बाद ऊंट की बॉडी के अलग-अलग अंगों की कीमत पांच से छह लाख रुपये तक हो जाती है।
दिल्ली के मार्केट में कीमत
a खाल की कीमत - करीब एक से डेढ़ लाख
a हड्डी की कीमत- 1500 रुपये प्रति किलो
a नाखून व बाल - 1000 रुपये प्रति किलो
a खून- 1500 रुपये प्रति किलो
a आंत-ओज-800 रुपये प्रति किलो
a वयस्क ऊंट का वजन 450 से 600 किलोग्राम तक
(एक मीट कारोबारी के आंकलन अनुसार)
ऊंट को काटा जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हमारे पास जब कहीं मांस बरामद होता है तो पुलिस जांच कराने आती है। अभी तक ऊंट काटे जाने के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है, कोई भी पशु नियमानुसार जांच पड़ताल के बाद ही काटा जा सकता है। - डॉ. विनोद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
कटान को को ले जाते दस ऊंटों से लदा ट्रक पकड़ा
जनपद में ऊंटों के कटान का अवैध धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। देहात थाना पुलिस ने कांशीराम कालोनी के पास ट्रक को पकड़ कर उसमें लदे दस ऊंट बरामद करने के बाद इसका खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि, ऊंटों को कटान के लिए ले जाया जा रहा था। मांस धंधेबाज पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे।
जनपद में बड़े पैमाने पर ऊंटों के कटान का अवैध धंधा किया जा रहा है। जब तब ऊंटों के कटान की जानकारियां मिलती हैं। इसके लिए ऐसे रास्ते का इस्तेमाल होता है, जिन पर आवागमन कम होता है। थानाध्यक्ष ऋषि कुमार व बीट कांस्टेबल जय सिंह को बृहस्पतिवार रात कांठ की ओर से ऊंटों लदा ट्रक मांस के धंधेबाजों की ओर से लेकर आने की सूचना मिली थी।
जानकारी मिली थी कि, इन ऊंटों को काट कर संभल स्थित मांस की फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाएगा। इस पर थाना पुलिस ने कांशीराम कालोनी के पास डेरा डाल दिया, काफी देर इंतजार करने के बाद कांठ की ओर से ट्रक आता दिखाई दिया। सुनसान मार्ग पर पुलिस देख कारोबारी ट्रक छोड़ कर भाग गए। पुलिस ने पीछा भी किया, मगर हत्थे नहीं चढ़े।
पुलिस ने ट्रक कब्जे में कर लिया। इसमें दस ऊंट लदे हुए थे। ट्रक को थाने लाया गया। शुक्रवार सुबह पशु चिकित्सक बुलाकर ऊंटों का मेडिकल कराया गया। थानाध्यक्ष ऋषि कुुमार ने बताया कि ऊंटों लदा ट्रक पकड़ा है। मांस के धंधे में लिप्त लोग भागने में सफल रहे। अज्ञात धंधेबाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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स्थानीय पुलिस ऊंट काटने वालों को खुला संरक्षण दिए हुए है। राजस्थान से 60 हजार से एक लाख रुपये में खरीदकर लाया गया ऊंट कटने के बाद पांच से छह लाख रुपये तक का मुनाफा कराता है, यही वजह है कि ऊंट काटने का अवैध कारोबार पनपता जा रहा है।
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रजबपुर, डिडौली, नौगावां सादात, गजरौला और हसनपुर में ऊंट कटान का अवैध कारोबार हो रहा है। सूत्रों के अनुसार पायंती कला में ऊंट काटने के लिए बड़ा सा हाता बनाया गया है। नौगावां सादात में एक बाग में ऊंटों का कटान होता है।
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डिडौली के जोई गांव के आसपास और पायंती कलां में ऊंट काटने का कारोबार कुछ तस्कर कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस की जानकारी में भी ऊंट काटने के स्थान भी हैं। तस्कर भी पुलिस के पास आकर उठते-बैठते हैं। इससे अवैध रूप से ऊंट काटने के कारोबारियों और पुलिस की मिलीभगत का इशारा हो रहा है।
जयपुर से एक ऊंट कारोबारी ने बताया कि एक ऊंट की कीमत राजस्थान में कीमत 60 हजार से एक लाख रुपये तक होती है। जबकि कटने के बाद ऊंट की बॉडी के अलग-अलग अंगों की कीमत पांच से छह लाख रुपये तक हो जाती है।
दिल्ली के मार्केट में कीमत
a खाल की कीमत - करीब एक से डेढ़ लाख
a हड्डी की कीमत- 1500 रुपये प्रति किलो
a नाखून व बाल - 1000 रुपये प्रति किलो
a खून- 1500 रुपये प्रति किलो
a आंत-ओज-800 रुपये प्रति किलो
a वयस्क ऊंट का वजन 450 से 600 किलोग्राम तक
(एक मीट कारोबारी के आंकलन अनुसार)
ऊंट को काटा जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हमारे पास जब कहीं मांस बरामद होता है तो पुलिस जांच कराने आती है। अभी तक ऊंट काटे जाने के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है, कोई भी पशु नियमानुसार जांच पड़ताल के बाद ही काटा जा सकता है। - डॉ. विनोद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
कटान को को ले जाते दस ऊंटों से लदा ट्रक पकड़ा
जनपद में ऊंटों के कटान का अवैध धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। देहात थाना पुलिस ने कांशीराम कालोनी के पास ट्रक को पकड़ कर उसमें लदे दस ऊंट बरामद करने के बाद इसका खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि, ऊंटों को कटान के लिए ले जाया जा रहा था। मांस धंधेबाज पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे।
जनपद में बड़े पैमाने पर ऊंटों के कटान का अवैध धंधा किया जा रहा है। जब तब ऊंटों के कटान की जानकारियां मिलती हैं। इसके लिए ऐसे रास्ते का इस्तेमाल होता है, जिन पर आवागमन कम होता है। थानाध्यक्ष ऋषि कुमार व बीट कांस्टेबल जय सिंह को बृहस्पतिवार रात कांठ की ओर से ऊंटों लदा ट्रक मांस के धंधेबाजों की ओर से लेकर आने की सूचना मिली थी।
जानकारी मिली थी कि, इन ऊंटों को काट कर संभल स्थित मांस की फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाएगा। इस पर थाना पुलिस ने कांशीराम कालोनी के पास डेरा डाल दिया, काफी देर इंतजार करने के बाद कांठ की ओर से ट्रक आता दिखाई दिया। सुनसान मार्ग पर पुलिस देख कारोबारी ट्रक छोड़ कर भाग गए। पुलिस ने पीछा भी किया, मगर हत्थे नहीं चढ़े।
पुलिस ने ट्रक कब्जे में कर लिया। इसमें दस ऊंट लदे हुए थे। ट्रक को थाने लाया गया। शुक्रवार सुबह पशु चिकित्सक बुलाकर ऊंटों का मेडिकल कराया गया। थानाध्यक्ष ऋषि कुुमार ने बताया कि ऊंटों लदा ट्रक पकड़ा है। मांस के धंधे में लिप्त लोग भागने में सफल रहे। अज्ञात धंधेबाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।