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Amroha News: सड़क हादसे में बसपा नेता की मौत
Sat, 28 Mar 2026 12:02 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:02 AM IST
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नौगावां सादात। क्षेत्र के वरिष्ठ बसपा नेता और समाजसेवी नूर अब्बास राणा (70) की सड़क हादसे में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं समर्थकों और कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों के मुताबिक नूर अब्बास राणा बृहस्पतिवार को बिजनौर के जोगीरमपुरा स्थित दरगाह ए आलिया नजफ-ए-हिंद से वापस लौटे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे जब वह नौगावां-अमरोहा रोड स्थित अपने घर के पास गाड़ी से उतर रहे थे, तभी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल राणा को तुरंत अमरोहा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया। परिजन उन्हें इलाज के लिए नोएडा ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। नूर अब्बास राणा बसपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और नौगावां सादात ताजिया कमेटी के जनरल सेक्रेटरी के साथ-साथ अंजुमन-ए-आब्दिया के अध्यक्ष भी थे। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका के चलते क्षेत्र में उनकी खास पहचान थी। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया और पंचनामा भरवाकर शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। परिवार में उनकी पत्नी महजबीन फातिमा, बड़ी बेटी कशी बतूल और सायमा, बेटा रेहान अब्बास और छोटा बेटा आजम हैं। उनके निधन से समर्थकों, सामाजिक संगठनों और कस्बे के लोगों में दुख व्याप्त है।
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परिजनों के मुताबिक नूर अब्बास राणा बृहस्पतिवार को बिजनौर के जोगीरमपुरा स्थित दरगाह ए आलिया नजफ-ए-हिंद से वापस लौटे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे जब वह नौगावां-अमरोहा रोड स्थित अपने घर के पास गाड़ी से उतर रहे थे, तभी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल राणा को तुरंत अमरोहा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया। परिजन उन्हें इलाज के लिए नोएडा ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। नूर अब्बास राणा बसपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और नौगावां सादात ताजिया कमेटी के जनरल सेक्रेटरी के साथ-साथ अंजुमन-ए-आब्दिया के अध्यक्ष भी थे। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका के चलते क्षेत्र में उनकी खास पहचान थी। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया और पंचनामा भरवाकर शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। परिवार में उनकी पत्नी महजबीन फातिमा, बड़ी बेटी कशी बतूल और सायमा, बेटा रेहान अब्बास और छोटा बेटा आजम हैं। उनके निधन से समर्थकों, सामाजिक संगठनों और कस्बे के लोगों में दुख व्याप्त है।
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