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इस दिवाली लौट के आजा मेरे ‘घर के चिराग’
विकल सिंह/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 06 Oct 2016 01:14 AM IST
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पुलिस के मुताबिक हमीरपुर के सनेडी निवासी देशराज (35) पिछले तीन सालों से बागवानियां के पास नालका गांव में किराये के मकान में रहता था। देशराज यहां पर अकेले रहता था तथा उसकी पत्नी और एक बच्ची भी है जो उसके गांव में रहती है। दिन में जूते का कारोबार करने के अलावा वह सुबह शाम कबाड़ का कार्य भी करता था। नालका गांव में मिला था शव- 5 मार्च को कुछ लोगों ने देशराज का शव नालका गांव के जाने वाले रास्ते से कुछ दूर खेत में पड़ा देखा। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची ओर शव को कब्जे में लिया। सनेड़ पंचायत के प्रधान धरेंद्र सिंह ने बताया कि देशराज 2 मार्च से लापता था। हर रोज बागवानियां अपने काम पर आता था। लेकिन जब दो दिन से नहीं दिखाई दिया तो उसके परिचित लोगों ने उसकी खोजबीन की जिस पर उन्हें इसका शव खेतों में मिला। पंचायत प्रधान ने बताया कि मृतक व्यक्ति शराब पीने का भी आदी था।
- फोटो : Demo Pic
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त्योहार जब-जब आया, आंखों में आंसू लाया। इस दिवाली पर कुछ ऐसी ही हालत है उन परिवारों की जिनके ‘घर के चिराग’ वर्षों से लापता है। हर त्योहार पर इन लोगों की आंखें अपनों के लौटने का इंतजार करती हैं। लापता बच्चों के मां-बाप हर आने जाने वाले से यही पूछते हैं कि तुमने हमारे लाडले को कहीं देखा है।
दुखी परिवारों को यही आस है कि कभी तो कोई आकर उनके आंख के तारे की सलामती की खबर देगा। जिले में 18 वर्ष से कम आयु के 24 बच्चे लापता हैं। जिनमें पांच बच्चों को लापता हुए आठ साल बीत गए। वहीं दो बच्चे गायब हुए नौ साल हो गए। थक हार कर पुलिस ने भी 15 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
जनपद में 2007 से मौजूदा साल तक 26 बालक गायब हुए थे। जिनमें दो लौट कर वापस आ गए। 24 अभी भी लापता हैं। गायब बालक 18 वर्ष से कम आयु के हैं। शुरू में परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी, लेकिन काफी समय बीत जाने पर बाद में पुलिस ने मामले को अपहरण में तरमीम कर लिया। परिजन रिश्तेदारियों, सगे संबंधियों से लेकर जान पहचान वाले हर जगह ढूंढ कर हार गए। साधु सन्यासियों और तांत्रिकों का भी दरवाजा खटखटाया।
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मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारा, मठ, चर्च आदि धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेक आए। लेकिन कहीं से भी गायब बच्चे का खोज नहीं मिला है। रात दिन इंतजार में रोते-रोते आंखों का पानी सूख गया है। गम में आंखें पथरा गईं हैं लेकिन पीड़ित परिवारों की उम्मीद नहीं टूटी। आज भी अपनों के लौटने का इंतजार है। पुलिस भी तलाश कर थक गई है। 15 मामलों में पुलिस ने अपनी फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी है।
लापता बच्चों का चाइल्ड हेल्प लाइन पर डाटा अपलोड किया गया है, एनजीओ व अनाथ आश्रम आदि में भी संपर्क किया जा रहा है, थानों की टीम भी लगाई गई है।
- उदय शंकर, एएसपी।
दुखी परिवारों को यही आस है कि कभी तो कोई आकर उनके आंख के तारे की सलामती की खबर देगा। जिले में 18 वर्ष से कम आयु के 24 बच्चे लापता हैं। जिनमें पांच बच्चों को लापता हुए आठ साल बीत गए। वहीं दो बच्चे गायब हुए नौ साल हो गए। थक हार कर पुलिस ने भी 15 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
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जनपद में 2007 से मौजूदा साल तक 26 बालक गायब हुए थे। जिनमें दो लौट कर वापस आ गए। 24 अभी भी लापता हैं। गायब बालक 18 वर्ष से कम आयु के हैं। शुरू में परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी, लेकिन काफी समय बीत जाने पर बाद में पुलिस ने मामले को अपहरण में तरमीम कर लिया। परिजन रिश्तेदारियों, सगे संबंधियों से लेकर जान पहचान वाले हर जगह ढूंढ कर हार गए। साधु सन्यासियों और तांत्रिकों का भी दरवाजा खटखटाया।
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मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारा, मठ, चर्च आदि धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेक आए। लेकिन कहीं से भी गायब बच्चे का खोज नहीं मिला है। रात दिन इंतजार में रोते-रोते आंखों का पानी सूख गया है। गम में आंखें पथरा गईं हैं लेकिन पीड़ित परिवारों की उम्मीद नहीं टूटी। आज भी अपनों के लौटने का इंतजार है। पुलिस भी तलाश कर थक गई है। 15 मामलों में पुलिस ने अपनी फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी है।
लापता बच्चों का चाइल्ड हेल्प लाइन पर डाटा अपलोड किया गया है, एनजीओ व अनाथ आश्रम आदि में भी संपर्क किया जा रहा है, थानों की टीम भी लगाई गई है।
- उदय शंकर, एएसपी।