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सावधान! अकेले खेत में न जाएं, तेंदुआ है...
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 19 Dec 2016 12:00 AM IST
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गजरौला शहर से तीन किलोमीटर दूर बसैली गांव में छह दिन से ईख के खेत में तेंदुए का कब्जा है। आए दिन किसानों को तेंदुआ दिखाई दे रहा है। रात में गुर्राहट सुनाई दे रही है, मगर वनविभाग की टीम असमंजस में है। पड़ताल करने आ रहीं टीमें खेतों में मिले पंजों के निशान के आधार पर यहां जंगली जानवर की बात तो कह रही हैं मगर तेंदुआ कहने से बच रही हैं।
अफसरों का कहना है कि, खेत सूखे होने से पंजों के निशान स्पष्ट नहीं हैं। इधर, शनिवार रात गांव में एक किसान के घर के बगल में स्थित ईख में तेंदुआ दिखाई दिया। इस पर किसान घरों में दुबक गए। रविवार दोपहर को फिर किसानों ने ईख में तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनी। इससे ग्रामीणों में दहशत है। उधर, वन विभाग की टीम ने फिर मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की है।
बता दें कि 13 दिसंबर शाम बसैली गांव में आस मोहम्मद की ईख के पास तेंदुआ देखा गया था। इसके बाद 16 दिसंबर को उसी जगह फिर से तेंदुआ देखा गया। वन विभाग कर्मियों ने मौका मुआयना भी किया, लेकिन टीम खाली हाथ लौट आई।
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16 दिसंबर की देर शाम गांव के हनीफ ने उस समय तेंदुआ देखा जब वह अपनी ईख में पानी लगा कर घर लौट रहा था। वहीं शनिवार की शाम करीब साढ़े सात बजे गांव के बाबू पुत्र असलूख ने उस समय तेंदुआ देखा जब वह घर में खाना खा रहा था। बाबू के अनुसार घर के बाहर ईख की तरफ बल्ब जल रहा था। उसी समय कुत्तों की आवाज आई। बाबू को शक हुआ तो छत पर जाकर देखा।
घर के बगल में स्थित ईख में तेंदुआ था। वहीं रविवार की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे हनीफ पुत्र हबीर अपने खेत में गिरे गन्नों को बांधने गया था। हनीफ ने बताया कि पत्तों की आवाज होने पर गुर्राहट सुनाई दी। पहली आवाज पर हनीफ ने ध्यान नहीं दिया। तीन-चार बार गुर्राने की आवाज सुनी तो वह वहां से भाग आया। इधर, तेंदुआ देखे जाने के बाद मस्जिद से लोगों को सतर्क रहने और शाम के बाद अकेले खेतों की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
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अफसरों का कहना है कि, खेत सूखे होने से पंजों के निशान स्पष्ट नहीं हैं। इधर, शनिवार रात गांव में एक किसान के घर के बगल में स्थित ईख में तेंदुआ दिखाई दिया। इस पर किसान घरों में दुबक गए। रविवार दोपहर को फिर किसानों ने ईख में तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनी। इससे ग्रामीणों में दहशत है। उधर, वन विभाग की टीम ने फिर मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की है।
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बता दें कि 13 दिसंबर शाम बसैली गांव में आस मोहम्मद की ईख के पास तेंदुआ देखा गया था। इसके बाद 16 दिसंबर को उसी जगह फिर से तेंदुआ देखा गया। वन विभाग कर्मियों ने मौका मुआयना भी किया, लेकिन टीम खाली हाथ लौट आई।
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16 दिसंबर की देर शाम गांव के हनीफ ने उस समय तेंदुआ देखा जब वह अपनी ईख में पानी लगा कर घर लौट रहा था। वहीं शनिवार की शाम करीब साढ़े सात बजे गांव के बाबू पुत्र असलूख ने उस समय तेंदुआ देखा जब वह घर में खाना खा रहा था। बाबू के अनुसार घर के बाहर ईख की तरफ बल्ब जल रहा था। उसी समय कुत्तों की आवाज आई। बाबू को शक हुआ तो छत पर जाकर देखा।
घर के बगल में स्थित ईख में तेंदुआ था। वहीं रविवार की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे हनीफ पुत्र हबीर अपने खेत में गिरे गन्नों को बांधने गया था। हनीफ ने बताया कि पत्तों की आवाज होने पर गुर्राहट सुनाई दी। पहली आवाज पर हनीफ ने ध्यान नहीं दिया। तीन-चार बार गुर्राने की आवाज सुनी तो वह वहां से भाग आया। इधर, तेंदुआ देखे जाने के बाद मस्जिद से लोगों को सतर्क रहने और शाम के बाद अकेले खेतों की ओर न जाने की सलाह दी गई है।