अमरोहा: बस पर तिरंगा लगा देख रुक गई यूक्रेनी सेना, छात्रों से कहा- कब आओगे..जरूर आना..दिस इज योर होम...
ओवैस चौधरी ने बताया कि यूक्रेन के हालात खराब हैं। वहां से निकलना बड़ा मुश्किल हो गया था। किसी तरह तीन बसों में डेढ़ सौ छात्रों का ग्रुप बनाकर रोमानिया पहुंचे। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। रुपये खत्म हो गए थे।
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अमरोहा के रजबपुर के अतरासी के रहने वाले ओवैस चौधरी यूक्रेन से सकुशल घर लौट आए हैं। बेटे को देखकर परिजन भावुक हो गए। इस दौरान ओवैस चौधरी ने यूक्रेन की दास्तां सुनाई। कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई में उनका चौथा साल है। इन हालातों में लगता है कि करियर बर्बाद हो गया। यूक्रेन फोर्स ने छात्रों की सहायता की, उन्हें परेशान नहीं किया गया। होस्टल से निकले तो बस पर तिरंगा लगा हुआ देख कर यूक्रेनी पुलिसकर्मी रुक गए थे। कहां की जा रहे हो, कब आओगे.. जरूर आना.. दिस इज योर होम...। यूक्रेनी पुलिसकर्मियों ने भारतीय छात्रों को सैल्यूट के साथ बाय कह कर बसों को आगे जाने दिया।
ओवैस चौधरी ने बताया कि यूक्रेन के हालात खराब हैं। वहां से निकलना बड़ा मुश्किल हो गया था। किसी तरह तीन बसों में डेढ़ सौ छात्रों का ग्रुप बनाकर रोमानिया पहुंचे। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। रुपये खत्म हो गए थे। कुछ छात्रों के पास ग्लोबल करेंसी थी, जिसे कोई कौड़ियों के भाव में भी चलाने को तैयार नहीं हुआ। छात्रों के कई दिन चिंता और दहशत में गुजरे। बम और गोलियों की आवाज सुनकर धड़कन बढ़ जाती थीं। ओवैस के मुताबिक यूक्रेन में शहीद हुए नवीन उनके बेहद करीबी थे। उनकी और नवीन की मुलाकात क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान हुई थी। नवीन बहुत प्यारे थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही शरीर से जान निकल गई थी।
पहले तो विश्वास नहीं हुआ कि कोई भारतीय छात्रों पर हमला क्यों करेगा, लेकिन जब असलियत का पता चला तो फिर घर पहुंचने की ठान ली। उन्होंने बताया कि रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से सात घंटे का सफर कर सुबह 5:15 बजे दिल्ली एयरपोर्ट में पहुंचे। यह प्रदेश सरकार के नुमाइंदों ने उनका स्वागत किया। राजभवन ले जाकर नाश्ता और खाना दिया। बाहर निकलने के बाद सरकार ने अपने खर्चे पर टैक्सी बुक करा कर दी, जो उन्हें घर छोड़कर गई है। ओवैस चौधरी के घर पहुंचते ही उनके परिजनों रिश्तेदारों की भीड़ लग गई। सभी ने फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया।