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आतंकी साये के अलर्ट ने घटाई श्रद्धालुओं की संख्या
Updated Sat, 24 Nov 2018 12:46 AM IST
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तिगरीधाम। कार्तिक पूर्णिमा स्नान को गंगा की रेती तिगरी धाम का नजारा अन्य सालों से जुदा था। मौसम सुहाना होने के साथ ही दूर-दूर तक केवल जनसैलाब ही नजर आ रहा था। करीब दस किलोमीटर तक आस्था का समंदर फैला था।
आतंकी हमले के अलर्ट के चलते इस बार संख्या अधिक प्रभावित तो नहीं थी। लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दो लाख श्रद्धालु कम पहुंचे। प्रशासन का मामला है कि आतंकी अलर्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि जिले में ही दूसरे स्थानों पर भी मेलों का आयोजन गंगा किनारे किया गया। इसलिए संख्या कम रही है।
गंगा के दोनों ओर समानांतर तंबुओं की नगरी बस गई। इस नजारे को देखकर हर कोई स्तब्ध था ओर जुबां से नमामि गंगे के बोल निकल रहे थे। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा के दोनों घाटों तिगरी और गढ़ में तंबुओं का शहर बसता है।
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सप्ताहभर पहले से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है। जो रेत के मैदान पर बसेरा बनाकर रहते हैं। इस साल भी गंगा के दोनों किनारों पर 18 नवंबर से तंबुओं का अस्थायी शहर बसना शुरू हो गया था। जो मुख्य स्नान यानी शुक्रवार से एक दिन पहले तक दूर तक फैल चुका था।
प्रशासनिक स्तर से चार-पांच किलोमीटर क्षेत्रफल का अंदाजा लगाते हुए व्यवस्थाएं की गई थीं। मगर, जब श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा तो प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाएं कम पड़ गईं। सेक्टर-14 से भी करीब दो किलोमीटर आगे तक श्रद्धालुओं ने बसेरा बना दिया। इस बार मेले की चौड़ाई कम होने के कारण लंबाई में अधिक बढ़ गया।
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आतंकी हमले के अलर्ट के चलते इस बार संख्या अधिक प्रभावित तो नहीं थी। लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दो लाख श्रद्धालु कम पहुंचे। प्रशासन का मामला है कि आतंकी अलर्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि जिले में ही दूसरे स्थानों पर भी मेलों का आयोजन गंगा किनारे किया गया। इसलिए संख्या कम रही है।
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गंगा के दोनों ओर समानांतर तंबुओं की नगरी बस गई। इस नजारे को देखकर हर कोई स्तब्ध था ओर जुबां से नमामि गंगे के बोल निकल रहे थे। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा के दोनों घाटों तिगरी और गढ़ में तंबुओं का शहर बसता है।
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सप्ताहभर पहले से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है। जो रेत के मैदान पर बसेरा बनाकर रहते हैं। इस साल भी गंगा के दोनों किनारों पर 18 नवंबर से तंबुओं का अस्थायी शहर बसना शुरू हो गया था। जो मुख्य स्नान यानी शुक्रवार से एक दिन पहले तक दूर तक फैल चुका था।
प्रशासनिक स्तर से चार-पांच किलोमीटर क्षेत्रफल का अंदाजा लगाते हुए व्यवस्थाएं की गई थीं। मगर, जब श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा तो प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाएं कम पड़ गईं। सेक्टर-14 से भी करीब दो किलोमीटर आगे तक श्रद्धालुओं ने बसेरा बना दिया। इस बार मेले की चौड़ाई कम होने के कारण लंबाई में अधिक बढ़ गया।