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डेंगू और बुखार ने पांच और को निगला
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 07 Nov 2016 11:47 PM IST
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- फोटो : demo
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क्षेत्र में जानलेवा हुए डेंगू बुखार ने महिला समेत तीन लोगों की जिंदगी को निगल लिया। दो घंटे के भीतर तीनों की मौत हो गई। एक ने मेरठ तो दो ने मुरादाबाद के निजी अस्पतालों में अंतिम सांस ली। गांव में तीन जवान मौतों से मातम छाया है। अलग अलग घरों से एक-एक कर उठे जनाजे देखकर जहां हर शख्स की आंख में आंसू थे, वहीं महिलाओं के करुण क्रंदन सुनकर लोग आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
थाना क्षेत्र के गांव सिरसाजट निवासी बबीता (25) पत्नी चंद्रप्रकाश, सुमित (24) पुत्र रघुवीर और 65 वर्षीय श्याम सिंह को कई दिन पहले बुखार आया था। इस पर परिवार के लोग उनको निजी चिकित्सक से दवा दिला रहे थे, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। तबियत ज्यादा खराब हुई तो परिजनों ने सुमित को मेरठ, जबकि महिला व वृद्ध को मुरादाबाद के प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करा दिया। यहां डाक्टरों ने उनकी जांच कराई तो उनमें डेंगू पाजिटिव की रिपोर्ट आई।
जानकर परिवार के लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ गईं। बताते हैं कि रात सात बजे सुमित ने उपचार के समय दम तोड़ दिया, जबकि नौ बजे तक बबीता और श्याम सिंह की भी मौत हो गई। तीनों की लाशें जब देर रात गांव पहुंची तो मातमी माहौल हो गया। परिजनों की चीख पुकार रात की खामोशी को तोड़ रही थी।
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हरेक ग्रामीण की जुबां पर बस यही बात थी कि ये कैसे हो गया। डेंगू बुखार खतरनाक होता जा रहा है, किन्तु कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। दवाई वितरण करने तक मरीजों के पास स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंच रही है। तीनों की लाशों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
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थाना क्षेत्र के गांव सिरसाजट निवासी बबीता (25) पत्नी चंद्रप्रकाश, सुमित (24) पुत्र रघुवीर और 65 वर्षीय श्याम सिंह को कई दिन पहले बुखार आया था। इस पर परिवार के लोग उनको निजी चिकित्सक से दवा दिला रहे थे, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। तबियत ज्यादा खराब हुई तो परिजनों ने सुमित को मेरठ, जबकि महिला व वृद्ध को मुरादाबाद के प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करा दिया। यहां डाक्टरों ने उनकी जांच कराई तो उनमें डेंगू पाजिटिव की रिपोर्ट आई।
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जानकर परिवार के लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ गईं। बताते हैं कि रात सात बजे सुमित ने उपचार के समय दम तोड़ दिया, जबकि नौ बजे तक बबीता और श्याम सिंह की भी मौत हो गई। तीनों की लाशें जब देर रात गांव पहुंची तो मातमी माहौल हो गया। परिजनों की चीख पुकार रात की खामोशी को तोड़ रही थी।
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हरेक ग्रामीण की जुबां पर बस यही बात थी कि ये कैसे हो गया। डेंगू बुखार खतरनाक होता जा रहा है, किन्तु कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। दवाई वितरण करने तक मरीजों के पास स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंच रही है। तीनों की लाशों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।