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कृषि कानूनों के विरोध में 15 मिनट हाईवे जाम, प्रशासन के छूटे पसीने
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रजबपुर (अमरोहा)। नए कृषि कानूनों को वापस कराने को लेकर भाकियू असली के कार्यकर्ताओं ने रजबपुर और धनौरा में चक्का जाम किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के नेतृत्व में किसानों ने हाईवे जाम किया। हाईवे पर किसानों के आते ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसानों को समझाने में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के पसीने छूट गए। हालांकि अधिकारियों की लगातार मिन्नतों पर किसान 15 मिनट में ही हाईवे से हट गए। जबकि धनौरा में पूरे तीन घंटे सड़क पर किसानों का कब्जा रहा। जिसे लेकर कई बार किसान और अधिकारियों के बीच नोकझोंक हुई। दोनों स्थानों का जाम खुलने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली। चक्का जाम के दौरान सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा।
संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में सभी किसान संगठनों का शुक्रवार को चक्का जाम प्रस्तावित था। लेकिन भाकियू टिकट गुटके के प्रवक्ता राकेश टिकैत के अपील पर विभिन्न संगठनों ने चक्का जाम स्थगित दिया। लेकिन भारतीय किसान यूनियन असली का चक्का जाम की घोषणा बरकरार रही। शनिवार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह और जिलाध्यक्ष चौधरी महावीर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान रजबपुर के पैठ बाजार पर एकत्र हुए। बारह बजते ही किसानों ने रजबपुर में हाईवे जाम कर दिया। यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा सरकार को किसान विरोधी और उद्योगपतियों की बताया। सूचना मिलते ही एडीएम विनय कुमार सिंह और एएसपी अजय प्रताप सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को समझाकर शांत किया और राष्ट्रपति को संबंधित ज्ञापन लेकर पंद्रह मिनट में ही जाम खुलवा दिया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना काल में लाए गए तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। इसके खिलाफ लगातार 73 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल कराकर सरकार ने किसानों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है। सरकार को तीनों कानून वापस लेने पड़ेंगे। मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाकर खरीद की गारंटी सुनिश्चित की जाए। साथ ही एमएसपी से कम खरीद पर दंड का प्रावधान बने।
उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने का समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 465 रपये प्रति क्विंटल घोषित करें। बिजली बिलों को जमा करने के लिए एकमुश्त समाधान योजना के अंतर्गत ब्याज माफ किया जाए। आवारा पशुओं द्वारा खेतों में किए गए नुकसान की भरपाई सरकार करें और पशुओं को पकड़कर गौशाला में छोड़े। चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो किसान उग्र आंदोलन करेंगे। इस दौरान प्रमोद नागर, चौधरी जयकीरत सिंह, चौधरी महावीर सिंह, रणवीर सिंह, शीशपाल सिंह, नरेश कुमार, सतीश, रघुवीर सिंह, जयपाल सिंह, राजवीर चौधरी, जितेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में सभी किसान संगठनों का शुक्रवार को चक्का जाम प्रस्तावित था। लेकिन भाकियू टिकट गुटके के प्रवक्ता राकेश टिकैत के अपील पर विभिन्न संगठनों ने चक्का जाम स्थगित दिया। लेकिन भारतीय किसान यूनियन असली का चक्का जाम की घोषणा बरकरार रही। शनिवार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह और जिलाध्यक्ष चौधरी महावीर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान रजबपुर के पैठ बाजार पर एकत्र हुए। बारह बजते ही किसानों ने रजबपुर में हाईवे जाम कर दिया। यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा सरकार को किसान विरोधी और उद्योगपतियों की बताया। सूचना मिलते ही एडीएम विनय कुमार सिंह और एएसपी अजय प्रताप सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को समझाकर शांत किया और राष्ट्रपति को संबंधित ज्ञापन लेकर पंद्रह मिनट में ही जाम खुलवा दिया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना काल में लाए गए तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। इसके खिलाफ लगातार 73 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर अन्नदाता आंदोलन कर रहा है। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल कराकर सरकार ने किसानों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है। सरकार को तीनों कानून वापस लेने पड़ेंगे। मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाकर खरीद की गारंटी सुनिश्चित की जाए। साथ ही एमएसपी से कम खरीद पर दंड का प्रावधान बने।
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उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने का समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 465 रपये प्रति क्विंटल घोषित करें। बिजली बिलों को जमा करने के लिए एकमुश्त समाधान योजना के अंतर्गत ब्याज माफ किया जाए। आवारा पशुओं द्वारा खेतों में किए गए नुकसान की भरपाई सरकार करें और पशुओं को पकड़कर गौशाला में छोड़े। चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो किसान उग्र आंदोलन करेंगे। इस दौरान प्रमोद नागर, चौधरी जयकीरत सिंह, चौधरी महावीर सिंह, रणवीर सिंह, शीशपाल सिंह, नरेश कुमार, सतीश, रघुवीर सिंह, जयपाल सिंह, राजवीर चौधरी, जितेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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