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दीपदान करते ही भर आई परिजनों की आंखे
Updated Fri, 23 Nov 2018 01:08 AM IST
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तिगरी गंगा धाम (अमरोहा)। महाभारत काल से चली आ रही दीपदान की प्रथा के मुताबिक गुरुवार को चतुर्दशी की शाम को हजारों लोगों ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान किया। अपने संगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर परिजनों की आंखें भर आई। इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आकाश से तारे धरती पर उतर आए हो। दीयों की रोशनी से गंगा तट जगमगा उठा था।
ऐसा माना जाता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है। गुरुवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु दीपदान के घाट पर पहुंच गए।
सूर्यास्त होते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देररात तक दीपदान जारी रहा। बाद में धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पिंडदान किया। अपनों के बीच से बिछड़ों की याद में दीपदान करते समय आंखें भर आई।
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ऐसा माना जाता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है। गुरुवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु दीपदान के घाट पर पहुंच गए।
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सूर्यास्त होते ही दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देररात तक दीपदान जारी रहा। बाद में धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पिंडदान किया। अपनों के बीच से बिछड़ों की याद में दीपदान करते समय आंखें भर आई।
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