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Amroha News: मेटरनिटी विंग में दस बेड का आईसीयू शुरू
Thu, 17 Jul 2025 02:12 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 17 Jul 2025 02:12 AM IST
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अमरोहा। जिले के मरीजों के लिए खुशखबरी है। जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग में दस बेड का आईसीयू शुरू हो गया है। इसमें ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं को रखा जा रहा है। हालांकि, अभी एसी लगना बाकी हैं जबकि अन्य गंभीर मरीजों के लिए छह बेड का आईसीयू वार्ड बनाने की तैयारी है।
इसमें सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल, ब्रेन हेमरेज व अन्य क्रिटिकल मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए जिरियाट्रिक वार्ड को चिह्नित कर लिया गया है। अमरोहा जिले की स्थापना 15 अप्रैल, 1997 को हुई थी।
इससे पहले अमरोहा मुरादाबाद का हिस्सा था। वजूद में आने के बाद जोया रोड किनारे पुलिस ऑफिस के पास संयुक्त जिला चिकित्सालय की नींव रखी गई।
जिला अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ के 52 पद स्वीकृत हैं। हालांकि, अभी 32 पद खाली है। जिस समय जिला बना उसे समय जिले की जनसंख्या करीब 18 लाख थी जो अब 25 लाख के करीब पहुंच गई है। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तो हुईं लेकिन अब तक जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड नहीं बन सका था।
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इसकी वजह से हर गंभीर मरीज को दिल्ली मुरादाबाद या मेरठ के लिए रेफर किया जाता है। कई बार आईसीयू की फैसिलिटी नहीं मिलने के कारण मरीज दम तोड़ देता है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग में दस बेड का आईसीयू शुरू हो गया है। इसमें ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं को रखा जा रहा है। इसके अलावा जिरियाट्रिक वार्ड में भी छह वार्ड का आईसीयू बनाने की तैयारी है।
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इसमें सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल, ब्रेन हेमरेज व अन्य क्रिटिकल मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए जिरियाट्रिक वार्ड को चिह्नित कर लिया गया है। अमरोहा जिले की स्थापना 15 अप्रैल, 1997 को हुई थी।
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इससे पहले अमरोहा मुरादाबाद का हिस्सा था। वजूद में आने के बाद जोया रोड किनारे पुलिस ऑफिस के पास संयुक्त जिला चिकित्सालय की नींव रखी गई।
जिला अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ के 52 पद स्वीकृत हैं। हालांकि, अभी 32 पद खाली है। जिस समय जिला बना उसे समय जिले की जनसंख्या करीब 18 लाख थी जो अब 25 लाख के करीब पहुंच गई है। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तो हुईं लेकिन अब तक जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड नहीं बन सका था।
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इसकी वजह से हर गंभीर मरीज को दिल्ली मुरादाबाद या मेरठ के लिए रेफर किया जाता है। कई बार आईसीयू की फैसिलिटी नहीं मिलने के कारण मरीज दम तोड़ देता है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग में दस बेड का आईसीयू शुरू हो गया है। इसमें ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं को रखा जा रहा है। इसके अलावा जिरियाट्रिक वार्ड में भी छह वार्ड का आईसीयू बनाने की तैयारी है।