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देश की ऊंची शान करें, हिंदी में काम करें
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अमेठी। हिंदी दिवस पर बुधवार को विभिन्न विद्यालयों में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए। कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने हिंदी भाषा पर अपने विचार दिए। कार्यक्रमों में मौजूद लोगों ने सरकारी कार्यालयों में सभी कामकाज हिंदी में किए जाने पर बल दिया। शहर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्या डॉ. फूलकली गुप्ता की अगुवाई में हिंदी दिवस पर पोस्टर, निबंध, स्लोगन व भाषण प्रतियोगिता के साथ ही संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
डॉ. फूलकली ने कहा कि हिंदी मात्र एक दिवस बोधक नहीं है। हिंदी भाषी प्रदेशों में हिंदी के लिए दिवस का निर्धारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कविता के माध्यम से ‘मुझको मां जैसी लगती है हिंदी मेरी, मेरी सांसों में बसती है हिंदी मेरी’ के माध्यम से हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की बात कही।
आरआरपीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग की ओर से गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि बिहार के पूर्व गृह सचिव एवं साहित्यकार जियालाल आर्य ने कहा कि शिक्षक एवं छात्रों के बीच कोई दीवार नहीं होनी चाहिए। हिंदी के प्रचार-प्रसार में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
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प्राचार्य प्रो. प्रेम कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी को सशक्त बनाने के लिए उसको आम जीवन एवं कार्य व्यवहार की भाषा बनानी होगी। विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र प्रताप यादव ने कहा कि अंग्रेजी एक साम्राज्यवादी भाषा है, इससे मुक्ति जरूरी है। संचालन डॉ दिलीप कुमार सिंह व आभार रेणुका सरोज ने व्यक्त किया। डॉ. लाजो पांडेय, डॉ. धनंजय सिंह, डॉ. रामसुंदर यादव, डॉ. राधेश्याम तिवारी, डॉ. विवेक कुमार सिंह, डॉ. सुनील दत्त सिंह, डॉ. रीना त्रिवेदी, डॉ. एमपी त्रिपाठी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. शिप्रा सिंह ने भी संबोधित किया।
सेंट मेरीज इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिंदी दिवस पर प्रबंधक पीजे थामस और बिंदू त्रिपाठी के नेतृत्व में सुलेख, निबंध, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें क्रमश: प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विज्जवल रावत, वर्तिका, संकल्प, गौरी, प्रियांशी, रूबी व आकांक्षा रहीं। मुख्य अतिथि डॉ. फूलकली ने बच्चों को सम्मानित किया।
पीपरपुर स्थित राजर्षि रणंजय सिंह आसल देव पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में छात्रा अंजलि मिश्रा ने हिंदी राजभाषा के विकास में बताया कि ‘हिंदी हमारी शान है, देश का अभिमान है’। देश की ऊंची शान करें, हम हिन्दी में काम करें। अमरनाथ वर्मा ने हिंदी विकास के लिए कार्य करते हुए आत्मनिर्भर भारत बनाने का विचार प्रस्तुत किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम मिश्रा, मुख्य अतिथि प्राचार्या डॉ संगीता सिंह ने कहा कि हम सभी को सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।
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डॉ. फूलकली ने कहा कि हिंदी मात्र एक दिवस बोधक नहीं है। हिंदी भाषी प्रदेशों में हिंदी के लिए दिवस का निर्धारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कविता के माध्यम से ‘मुझको मां जैसी लगती है हिंदी मेरी, मेरी सांसों में बसती है हिंदी मेरी’ के माध्यम से हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की बात कही।
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आरआरपीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग की ओर से गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि बिहार के पूर्व गृह सचिव एवं साहित्यकार जियालाल आर्य ने कहा कि शिक्षक एवं छात्रों के बीच कोई दीवार नहीं होनी चाहिए। हिंदी के प्रचार-प्रसार में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
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प्राचार्य प्रो. प्रेम कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी को सशक्त बनाने के लिए उसको आम जीवन एवं कार्य व्यवहार की भाषा बनानी होगी। विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र प्रताप यादव ने कहा कि अंग्रेजी एक साम्राज्यवादी भाषा है, इससे मुक्ति जरूरी है। संचालन डॉ दिलीप कुमार सिंह व आभार रेणुका सरोज ने व्यक्त किया। डॉ. लाजो पांडेय, डॉ. धनंजय सिंह, डॉ. रामसुंदर यादव, डॉ. राधेश्याम तिवारी, डॉ. विवेक कुमार सिंह, डॉ. सुनील दत्त सिंह, डॉ. रीना त्रिवेदी, डॉ. एमपी त्रिपाठी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. शिप्रा सिंह ने भी संबोधित किया।
सेंट मेरीज इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिंदी दिवस पर प्रबंधक पीजे थामस और बिंदू त्रिपाठी के नेतृत्व में सुलेख, निबंध, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें क्रमश: प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विज्जवल रावत, वर्तिका, संकल्प, गौरी, प्रियांशी, रूबी व आकांक्षा रहीं। मुख्य अतिथि डॉ. फूलकली ने बच्चों को सम्मानित किया।
पीपरपुर स्थित राजर्षि रणंजय सिंह आसल देव पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में छात्रा अंजलि मिश्रा ने हिंदी राजभाषा के विकास में बताया कि ‘हिंदी हमारी शान है, देश का अभिमान है’। देश की ऊंची शान करें, हम हिन्दी में काम करें। अमरनाथ वर्मा ने हिंदी विकास के लिए कार्य करते हुए आत्मनिर्भर भारत बनाने का विचार प्रस्तुत किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम मिश्रा, मुख्य अतिथि प्राचार्या डॉ संगीता सिंह ने कहा कि हम सभी को सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।