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Amethi News: व्रत रख महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य
Tue, 26 Aug 2025 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 26 Aug 2025 11:56 PM IST
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गौरीगंज स्थित शिव मंदिर पर भजन-कीर्तन करती महिलाएं। -संवाद
अमेठी सिटी। हरितालिका तीज का पावन पर्व मंगलवार को जिलेभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिनों ने निर्जला उपवास का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। लाल जोड़े, मेहंदी और सोलह शृंगार से सजी महिलाओं ने मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। युवतियों और किशोरियों ने भी व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की आराधना कर योग्य वर की कामना की।
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व में घर-घर पूजन का विशेष माहौल रहा। व्रती महिलाओं ने मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाकर केले के पत्तों से सजी चौकी पर स्थापित की। प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाकर फल, फूल, बेलपत्र, नारियल, धतूरा, भांग और पकवान अर्पित किए। पूजा के बाद महिलाओं ने कथा श्रवण कर अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। जिले के प्रमुख मंदिरों गौरीगंज शिव मंदिर, मोहनगंज महादेव धाम, संग्रामपुर और मुसाफिरखाना स्थित शिवालयों में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगी रही। कई स्थानों पर पंडितों के सानिध्य में विधिविधान से सामूहिक पूजन कराया गया। महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना की।
कन्याओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन कर उत्तम वर की मनोकामना की। पूजा-पाठ के बाद शाम को सामूहिक भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन हुआ। घरों में गुझिया, मालपुआ, पूड़ी-सब्जी सहित विविध पकवान बनाए गए। व्रती महिलाओं ने रात में व्रत का पारण कर शिव-पार्वती के जयकारे लगाए। पंडित हेमंतदास ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति स्वरूप पाने के लिए यह व्रत किया था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। भारतीय लोक संस्कृति में यह पर्व दांपत्य जीवन की मंगलकामना और प्रेम-सौहार्द का प्रतीक है।
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भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व में घर-घर पूजन का विशेष माहौल रहा। व्रती महिलाओं ने मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाकर केले के पत्तों से सजी चौकी पर स्थापित की। प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाकर फल, फूल, बेलपत्र, नारियल, धतूरा, भांग और पकवान अर्पित किए। पूजा के बाद महिलाओं ने कथा श्रवण कर अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। जिले के प्रमुख मंदिरों गौरीगंज शिव मंदिर, मोहनगंज महादेव धाम, संग्रामपुर और मुसाफिरखाना स्थित शिवालयों में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगी रही। कई स्थानों पर पंडितों के सानिध्य में विधिविधान से सामूहिक पूजन कराया गया। महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना की।
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कन्याओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन कर उत्तम वर की मनोकामना की। पूजा-पाठ के बाद शाम को सामूहिक भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन हुआ। घरों में गुझिया, मालपुआ, पूड़ी-सब्जी सहित विविध पकवान बनाए गए। व्रती महिलाओं ने रात में व्रत का पारण कर शिव-पार्वती के जयकारे लगाए। पंडित हेमंतदास ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति स्वरूप पाने के लिए यह व्रत किया था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। भारतीय लोक संस्कृति में यह पर्व दांपत्य जीवन की मंगलकामना और प्रेम-सौहार्द का प्रतीक है।
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