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Amethi News: जहां बजनी थी शहनाई, वहां गूंजीं सिसकियां

Sun, 10 May 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sun, 10 May 2026 12:55 AM IST
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Where the shehnai was to be played, there echoed sobs
पिता और पड़ोसी की मौत के बाद गमगीन माहौल में पूरी हुईं वैवाहिक रस्में
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जगदीशपुर। जिस घर में शहनाई गूंजने और खुशियों के गीत सुनाई देने थे, वहां अचानक चीख-पुकार और सिसकियों का माहौल बन गया। शुक्रवार रात बेटी की शादी के लिए फल और सामान लेने निकले पिता गौतम और पड़ोसी आसाराम की सड़क हादसे में मौत की खबर मिलते ही पूरा परिवार चीख उठा। कुछ देर पहले तक जहां रिश्तेदार हंसी-खुशी शादी की तैयारियों में जुटे थे, वहां मातम पसर गया।


पूरे अमृतलाल पंडित का पुरवा मुबारकपुर गांव निवासी गौतम अपनी बेटी मनीषा की शादी को लेकर बेहद उत्साहित थे। घर में मेहमानों की आवाजाही लगी थी। महिलाएं मंगलगीत गा रही थीं। दरवाजे पर टेंट सज चुका था और बरात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। गौतम पड़ोसी आसाराम के साथ बाइक से शादी के लिए फल और अन्य सामान लेने जगदीशपुर गए थे।
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लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर हादसे की सूचना गांव पहुंची तो खुशियों से भरे घरे में मातम पसर गया। पिता की मौत की खबर सुनते ही दुल्हन बनी मनीषा बेसुध होकर गिर पड़ी। मां बदहवास होकर रोने लगी। दरवाजे पर सजावट के बीच गूंजतीं सिसकियां हर किसी को भावुक कर रही थीं।
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काफी देर तक इस बात पर चर्चा होती रही कि शादी टाली जाए या रस्में पूरी कराई जाएं। आखिरकार सामाजिक परंपरा और परिस्थितियों को देखते हुए गमगीन माहौल में वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराने का निर्णय लिया गया। रात में बरात तय समय पर पहुंची लेकिन न बैंड बजा और न ही आतिशबाजी हुई। द्वारचार और अन्य रस्में भारी मन से पूरी कराई गईं।

शादी के मंडप में मंत्रों की आवाज के बीच परिजनों की सिसकियां सुनाई देती रहीं। विदाई के समय माहौल और भावुक हो गया। पिता की तस्वीर से लिपटकर रोती मनीषा को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव की महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला और नम आंखों से विदा किया।





बिलखते परिजनों को देख नम हुईं लोगों की आंखें
गौतम की मौत के बाद मां प्रभुदेई बेसुध हो गईं। पत्नी मंजीत का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बेटी मीरा, सेजल, शिवानी, दीपाली, नेहा और बेटा गणेश बिलखते रहे। भाई मंटू, संतोष और सोहन भी रोते रहे। आसाराम परिवार के एकमात्र सहारा थे। वह गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मौत के बाद बूढ़ी मां मखाना बेटे को पुकार-पुकार कर रोती रहीं। पत्नी मिथलेश बदहवास हो गईं। बेटी मोहनी, राखी, हिमांशु, छाया और दीपांशु की सिसकियां सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।



एक साथ उठीं दो अर्थियां, रो पड़े ग्रामीण
पूरे अमृतलाल पंडित का पुरवा मुबारकपुर गांव में शुक्रवार रात से ही मातम पसरा रहा। पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव गांव पहुंचे तो रोने की आवाज सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई। दोस्त की तरह साथ रहने वाले गौतम और आसाराम की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। हर वक्त साथ रहने वाले दोनों की अर्थियां जब एक साथ उठीं तो गांव के लोगों के भी आंसू छलक उठे। गांव स्थित बाग में गमगीन माहौल में दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
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