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माटी से सोना उगाने में जुटा युवा बेरोजगार
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12 : भादर : विजरा गांव में अपने खेत में पैदा की गई फूलगोभी दिखाते किसान पंकज सिंह। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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भादर (अमेठी)। पीपरपुर मजरे विजरा निवासी पंकज सिंह क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। पंकज ने बटाई की जमीन पर सब्जी की खेती कर न केवल निराशा की तरफ बढ़ रही बेरोजगार जिंदगी को हरा भरा कर दिया, बल्कि परिवार के सपनों को भी उड़ान दी। पंकज सिंह भी उन्हीं युवाओं में शामिल हैं जो बचपन से नौकरी का सपना देखते हैं।
पंकज ने भी इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद देश की सेवा करने का सपना देखा। फौज और पुलिस की भर्ती की तैयारी की। फिजिकल में टॉप पर रहने के बाद भी मेरिट में न आने से वे काफी निराश हो गए। भर्ती देखने के दौरान राणा प्रताप डिग्री कॉलेज सुल्तानपुर से उन्होंने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। पिता की मृत्यु होने के बाद पंकज सिंह के कंधों पर दो भाइयों के परिवार के साथ मां, तीन बच्चे और पत्नी का खर्च आ गया। परिवार के पास मात्र एक बीघा भूमि थी। पारंपरिक खेती आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ने का संकेत दे रही थी। सब चीजों पर सोच विचारकर पंकज ने सब्जी की खेती शुरू की। सब्जी की खेती के पहले ही प्रयास में ही पंकज का मनोबल बढ़ाया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पंकज ने कर्ज लेकर वर्ष 2016 में तीस हजार रुपये कर्ज लेकर सब्जी की खेती शुरू की। पहली बार में ही पंकज को एक लाख रुपये की आय हुई। हौसला बढ़ा तो उन्होंने बटाई पर पांच बीघे जमीन ले ली। इसका उन्हें सत्तर हजार रुपये प्रतिवर्ष देना था। बटाई पर लिए गए खेत में पंकज ने गोभी और टमाटर लगाया। इस समय प्रतिदिन दो से ढाई हजार फूलगोभी के पेड़ तैयार हो रहे हैं। एक लाख रुपये लगाकर दो महीने में ढाई लाख रुपये का मुनाफा कमा चुके हैं। एक माह बाद पंकज का फायदा तीन लाख रुपये से ऊपर पहुंचने की उम्मीद है। उनके खेत में गोभी के अलावा टमाटर व मिर्च की फसल लहलहा रही है। इसके एक-दो माह बाद भिंडी, लौकी, कद्दू, नेनुवा व तरोई की खेती का कार्य शुरू कर देंगे। (संवाद)
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बचत से बनवाया मकान, पूरे हो रहे सपने
पंकज कहते हैं कि युवा चाहें तो खेती उनके लिए वरदान साबित हो सकती है। पंकज ने बताया कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पिछले छह-सात वर्षों में न सिर्फ मकान बनवाया, बल्कि शादी विवाह के भी कई आयोजन किए। पूरे परिवार का खर्च बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी अच्छे से चल रही है। गेहूं धान की खेती करने से सब्जी मसाले तक के लाले पड़ जाते थे। सब्जी की खेती से प्रतिवर्ष खर्च निकालने के बाद पांच से छह लाख रुपये की बचत हो जाती है।
पंकज बताते हैं कि खेत के चारों किनारे कांटों की बैरीकेडिंग के बावजूद जाड़ों में संतराम व धर्मराज के साथ कंपकपाती ठंड में पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहकर अपनी फसल को आवारा मवेशियों से बचाना पड़ता है। बताया कि सब्जी की खेती कर प्रत्येक व्यक्ति अच्छी आय अर्जित कर सकता है। खेती शुरू करने से पहले इतना ध्यान जरूर दें कि आधुनिक तकनीक के साथ संतुलित उर्वरकों का समय-समय पर प्रयोग करें। समय अनुरूप खेतों की सिंचाई, निराई व गुड़ाई भी आवश्यक है। कभी-कभी तो खाद और दवाइयां नहीं मिलने से थोड़ी परेशानी बढ़ जाती है।
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पंकज ने भी इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद देश की सेवा करने का सपना देखा। फौज और पुलिस की भर्ती की तैयारी की। फिजिकल में टॉप पर रहने के बाद भी मेरिट में न आने से वे काफी निराश हो गए। भर्ती देखने के दौरान राणा प्रताप डिग्री कॉलेज सुल्तानपुर से उन्होंने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। पिता की मृत्यु होने के बाद पंकज सिंह के कंधों पर दो भाइयों के परिवार के साथ मां, तीन बच्चे और पत्नी का खर्च आ गया। परिवार के पास मात्र एक बीघा भूमि थी। पारंपरिक खेती आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ने का संकेत दे रही थी। सब चीजों पर सोच विचारकर पंकज ने सब्जी की खेती शुरू की। सब्जी की खेती के पहले ही प्रयास में ही पंकज का मनोबल बढ़ाया।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे पंकज ने कर्ज लेकर वर्ष 2016 में तीस हजार रुपये कर्ज लेकर सब्जी की खेती शुरू की। पहली बार में ही पंकज को एक लाख रुपये की आय हुई। हौसला बढ़ा तो उन्होंने बटाई पर पांच बीघे जमीन ले ली। इसका उन्हें सत्तर हजार रुपये प्रतिवर्ष देना था। बटाई पर लिए गए खेत में पंकज ने गोभी और टमाटर लगाया। इस समय प्रतिदिन दो से ढाई हजार फूलगोभी के पेड़ तैयार हो रहे हैं। एक लाख रुपये लगाकर दो महीने में ढाई लाख रुपये का मुनाफा कमा चुके हैं। एक माह बाद पंकज का फायदा तीन लाख रुपये से ऊपर पहुंचने की उम्मीद है। उनके खेत में गोभी के अलावा टमाटर व मिर्च की फसल लहलहा रही है। इसके एक-दो माह बाद भिंडी, लौकी, कद्दू, नेनुवा व तरोई की खेती का कार्य शुरू कर देंगे। (संवाद)
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बचत से बनवाया मकान, पूरे हो रहे सपने
पंकज कहते हैं कि युवा चाहें तो खेती उनके लिए वरदान साबित हो सकती है। पंकज ने बताया कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पिछले छह-सात वर्षों में न सिर्फ मकान बनवाया, बल्कि शादी विवाह के भी कई आयोजन किए। पूरे परिवार का खर्च बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी अच्छे से चल रही है। गेहूं धान की खेती करने से सब्जी मसाले तक के लाले पड़ जाते थे। सब्जी की खेती से प्रतिवर्ष खर्च निकालने के बाद पांच से छह लाख रुपये की बचत हो जाती है।
पंकज बताते हैं कि खेत के चारों किनारे कांटों की बैरीकेडिंग के बावजूद जाड़ों में संतराम व धर्मराज के साथ कंपकपाती ठंड में पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहकर अपनी फसल को आवारा मवेशियों से बचाना पड़ता है। बताया कि सब्जी की खेती कर प्रत्येक व्यक्ति अच्छी आय अर्जित कर सकता है। खेती शुरू करने से पहले इतना ध्यान जरूर दें कि आधुनिक तकनीक के साथ संतुलित उर्वरकों का समय-समय पर प्रयोग करें। समय अनुरूप खेतों की सिंचाई, निराई व गुड़ाई भी आवश्यक है। कभी-कभी तो खाद और दवाइयां नहीं मिलने से थोड़ी परेशानी बढ़ जाती है।