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जिले में दिखा जनता कफ्र्यू का व्यापक असर
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अमेठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रविवार को जिले में जनता कर्फ्यू का व्यापक असर दिखा। शहर से लेकर गांव तक पूरा दिन सन्नाटा पसरा रहा। चाय पान तक की दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। पुलिस व प्रशासनिक अफसर, चिकित्सक व मीडिया वालों के वाहन ही सड़क पर दिखे।
जनता कफ्र्यू का असर रविवार को पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही लोग अपने घरों से बाहर के लिए नहीं निकले। शहर हो या गांव हर जगह ज्यादातर लोग अपने ही घरों में मौजूद रहे। शहर में जहां लोग घरों से बाहर नहीं निकले वहीं गांवों में भी लोगों ने खेत खलिहान तक जाने से परहेज किया।
शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर इस कदर व्यापक रहा कि चाय पान तक की दुकानें नहीं खुलीं। जिले से गुजरने वाले हाइवे रहे हों या फिर ग्रामीणांचल की सड़कें हर जगह सन्नाटा पसरा रहा। सड़क पर महज प्रशासनिक अफसर, मीडिया कर्मी, अस्पताल से जुड़े लोग ही दिखे।
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सन्नाटा तो इस कदर रहा कि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर भी कोई नहीं दिख रहा था। शहरी क्षेत्र सड़क किनारे वाले मोहल्लों में लोग अपने दरवाजे व मकान की बालकनी में बैठकर बाहर का नजारा देखते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में दरवाजे के बाहर बैठने वाले भी पुलिस वाहन देखकर तत्काल भीतर चले जा रहे थे। घरों के बुर्जुग हों या फिर सीनियर वह बच्चों के साथ घर पर ही मौजूद रहे। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे अपने घरों पर खेलते कूदते रहे।
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जनता कफ्र्यू का असर रविवार को पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही लोग अपने घरों से बाहर के लिए नहीं निकले। शहर हो या गांव हर जगह ज्यादातर लोग अपने ही घरों में मौजूद रहे। शहर में जहां लोग घरों से बाहर नहीं निकले वहीं गांवों में भी लोगों ने खेत खलिहान तक जाने से परहेज किया।
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शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर इस कदर व्यापक रहा कि चाय पान तक की दुकानें नहीं खुलीं। जिले से गुजरने वाले हाइवे रहे हों या फिर ग्रामीणांचल की सड़कें हर जगह सन्नाटा पसरा रहा। सड़क पर महज प्रशासनिक अफसर, मीडिया कर्मी, अस्पताल से जुड़े लोग ही दिखे।
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सन्नाटा तो इस कदर रहा कि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर भी कोई नहीं दिख रहा था। शहरी क्षेत्र सड़क किनारे वाले मोहल्लों में लोग अपने दरवाजे व मकान की बालकनी में बैठकर बाहर का नजारा देखते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में दरवाजे के बाहर बैठने वाले भी पुलिस वाहन देखकर तत्काल भीतर चले जा रहे थे। घरों के बुर्जुग हों या फिर सीनियर वह बच्चों के साथ घर पर ही मौजूद रहे। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे अपने घरों पर खेलते कूदते रहे।