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Amethi News: टूटते रिश्तों को आपसी संवाद से जोड़ रहीं शुचिता
Wed, 21 Jan 2026 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 21 Jan 2026 12:02 AM IST
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अमेठी सिटी। 2016 बैच की आरक्षी शुचिता सोमवंशी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। टूटते वैवाहिक रिश्तों को आपसी संवाद से जोड़ने में इन्हें महारत हासिल है। काउंसिलिंग के जरिये वह अब तक करीब 500 दंपतियों को एक साथ रहने के लिए रजामंद कर चुकी हैं। तभी इन्हें जुलाई 2025 में जामों थाने में खुली महिला सहायता चौकी में विशेष तौर पर तैनाती दी गई।
मूलरूप से हरदोई के ऊंचाथोक निवासी शुचिता की अमेठी में तैनाती वर्ष 2017 में हुई। वह करीब पांच साल महिला थाने में तैनात रहीं। नौकरी की शुरुआत में ही उन्हें पति-पत्नी के झगड़ों को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। फिर करीब तीन साल वह पीपरपुर थाने में रहीं और अब महिला सहायता चौकी में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां पिछले छह माह में घरेलू हिंसा के 179 मामले आए। इनमें से 65 मसले एक से दो काउंसिलिंग में ही सुलझ गए। कुछ मामलों में पति-पत्नी दोनों ने अलग रहने की बात कही तो उन्हें उसका रास्ता बता दिया गया। इन प्रकरणों में से महज 10 मामले ही संबंध विच्छेद के लिए कोर्ट भेजे गए। (संवाद)
शुचिता ने बताया कि अधिकांश मामलों में पति-पत्नी के बीच झगड़े की वजह नशाखोरी होती है। ऐसे मामलों में सुलह कराने के बाद महिलाओं से कहा जाता है कि पति फिर शराब पीकर झगड़ा करे तो तुरंत 112 पर कॉल करें। दूसरा बड़ा कारण सास-ससुर और बेटे-बहू के बीच जनरेशन गैप का रहता है। जैसे-जैसे समय बदल रहा है, उसी के अनुरूप खुद को ढालना ही होगा। बहुओं को खासतौर पर ये समझना होगा कि वह पति के साथ अलग हो गईं तो उनके सास-ससुर की देखभाल कौन करेगा।
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हिंदी से एमए शुचिता 2008 में जब कॉलेज से लौट रही थी, तब उनकी नजर दुर्घटना में घायल की मदद करने वाले पुलिसकर्मियों पर पड़ी। तभी उन्होंने पुलिस में भर्ती होने की ठान ली है। शुचिता के पिता ने हिंदी विषय से पीएचडी की है। वह शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। मां गीता संस्कृत से एमए हैं। चार भाई-बहनों में शुचिता दूसरे नंबर पर हैं। स्नातक में उन्होंने समाजशास्त्र की पढ़ाई की, जिसका उन्हें इस कार्य में काफी फायदा मिल रहा है।
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मूलरूप से हरदोई के ऊंचाथोक निवासी शुचिता की अमेठी में तैनाती वर्ष 2017 में हुई। वह करीब पांच साल महिला थाने में तैनात रहीं। नौकरी की शुरुआत में ही उन्हें पति-पत्नी के झगड़ों को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। फिर करीब तीन साल वह पीपरपुर थाने में रहीं और अब महिला सहायता चौकी में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां पिछले छह माह में घरेलू हिंसा के 179 मामले आए। इनमें से 65 मसले एक से दो काउंसिलिंग में ही सुलझ गए। कुछ मामलों में पति-पत्नी दोनों ने अलग रहने की बात कही तो उन्हें उसका रास्ता बता दिया गया। इन प्रकरणों में से महज 10 मामले ही संबंध विच्छेद के लिए कोर्ट भेजे गए। (संवाद)
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शुचिता ने बताया कि अधिकांश मामलों में पति-पत्नी के बीच झगड़े की वजह नशाखोरी होती है। ऐसे मामलों में सुलह कराने के बाद महिलाओं से कहा जाता है कि पति फिर शराब पीकर झगड़ा करे तो तुरंत 112 पर कॉल करें। दूसरा बड़ा कारण सास-ससुर और बेटे-बहू के बीच जनरेशन गैप का रहता है। जैसे-जैसे समय बदल रहा है, उसी के अनुरूप खुद को ढालना ही होगा। बहुओं को खासतौर पर ये समझना होगा कि वह पति के साथ अलग हो गईं तो उनके सास-ससुर की देखभाल कौन करेगा।
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हिंदी से एमए शुचिता 2008 में जब कॉलेज से लौट रही थी, तब उनकी नजर दुर्घटना में घायल की मदद करने वाले पुलिसकर्मियों पर पड़ी। तभी उन्होंने पुलिस में भर्ती होने की ठान ली है। शुचिता के पिता ने हिंदी विषय से पीएचडी की है। वह शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। मां गीता संस्कृत से एमए हैं। चार भाई-बहनों में शुचिता दूसरे नंबर पर हैं। स्नातक में उन्होंने समाजशास्त्र की पढ़ाई की, जिसका उन्हें इस कार्य में काफी फायदा मिल रहा है।