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Amethi News: पूर्वजों को याद कर किया दान-पुण्य
Thu, 01 Oct 2026 01:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 01 Oct 2026 01:25 AM IST
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पितृपक्ष में पितरों का अमेठी में तर्पण करते लोग। स्रोत: स्थानीय नागरिक
अमेठी। पितृ पक्ष के चौथे दिन बुधवार को जिले में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण किया। सुबह से ही घरों में श्राद्धकर्म की तैयारियां शुरू हो गईं। लोगों ने पितरों को जल अर्पित कर उनकी आत्मशांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दीगई। कई परिवारों में पितरों के निमित्त भोजन तैयार कर पहले ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।
लोगों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में घरों में पूजा-पाठ किया। कई लोगों ने जरूरतमंदों को भोजन और कपड़े भी बांटे। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृप क्ष में तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य की परंपरा है। श्रद्धा के साथ किए जाने वाले इन कर्मों के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ जरूरतमंदों की सहायता और पशु-पक्षियों को अन्न देना भी पुण्य कार्य माना गया है।
तर्पण कर रहे नीरज मिश्र ने कहा कि पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद करने से मन को आत्मिक संतोष मिलता है। लालता प्रसाद ने कहा कि श्राद्ध की परंपरा परिवार को अपनी जड़ों और पूर्वजों से जोड़े रखती है। शिव मंगल ने कहा कि तर्पण और दान-पुण्य के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और संस्कारों की जानकारी मिलती है।
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लोगों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में घरों में पूजा-पाठ किया। कई लोगों ने जरूरतमंदों को भोजन और कपड़े भी बांटे। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृप क्ष में तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य की परंपरा है। श्रद्धा के साथ किए जाने वाले इन कर्मों के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ जरूरतमंदों की सहायता और पशु-पक्षियों को अन्न देना भी पुण्य कार्य माना गया है।
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तर्पण कर रहे नीरज मिश्र ने कहा कि पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद करने से मन को आत्मिक संतोष मिलता है। लालता प्रसाद ने कहा कि श्राद्ध की परंपरा परिवार को अपनी जड़ों और पूर्वजों से जोड़े रखती है। शिव मंगल ने कहा कि तर्पण और दान-पुण्य के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और संस्कारों की जानकारी मिलती है।
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