{"_id":"688920a777ccb293a608a659","slug":"school-is-three-kilometers-away-only-four-children-are-going-to-study-amethi-news-c-96-1-ame1002-145673-2025-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: तीन किमी दूर विद्यालय, चार बच्चे ही जा रहे पढ़ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: तीन किमी दूर विद्यालय, चार बच्चे ही जा रहे पढ़ने
Wed, 30 Jul 2025 12:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 30 Jul 2025 12:57 AM IST
विज्ञापन
अमेठी। परिषदीय विद्यालयों के विलय के फैसले के बाद से पठन पाठन प्रभावित है। भेटुआ के प्राथमिक विद्यालय एचएएल गेट का विलय तीन किलोमीटर दूर बांदा-टांडा हाईवे के बगल प्राथमिक विद्यालय कोरवा में किया गया है। इससे नन्हें बच्चे रोज लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय कर स्कूल पहुंच रहे हैं। अभिभावक परेशान हैं।
प्राथमिक स्कूल एचएएल गेट के तीन चौथाई बच्चे तो स्कूल ही नहीं जा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय एचएएल गेट में पहले 16 बच्चे नामांकित थे, लेकिन अब सिर्फ चार छात्र प्राथमिक स्कूल कोरवा पहुंच रहे हैं। बाकी बच्चे घर पर सीमित साधनों से पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावक शिवप्रसाद ने बताया कि नया स्कूल गांव से काफी दूर है और बीच में व्यस्त हाईवे आता है, जिससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। बच्चों को अकेले भेजना खतरे से खाली नहीं है।
रीता देवी ने बताया कि उनकी सात वर्षीय बेटी इतनी दूर पैदल नहीं जा सकती और निजी वाहन की सुविधा नहीं होने से स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी रमेश यादव ने कहा कि हाईवे पर न तो जेब्रा क्रॉसिंग है और न ही ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था। ऊपर से बारिश में कीचड़ और फिसलन का खतरा बढ़ जाता है। शिक्षा जरूरी है, लेकिन सुरक्षा पहले है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्राथमिक स्कूल एचएएल गेट के तीन चौथाई बच्चे तो स्कूल ही नहीं जा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय एचएएल गेट में पहले 16 बच्चे नामांकित थे, लेकिन अब सिर्फ चार छात्र प्राथमिक स्कूल कोरवा पहुंच रहे हैं। बाकी बच्चे घर पर सीमित साधनों से पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावक शिवप्रसाद ने बताया कि नया स्कूल गांव से काफी दूर है और बीच में व्यस्त हाईवे आता है, जिससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। बच्चों को अकेले भेजना खतरे से खाली नहीं है।
विज्ञापन
रीता देवी ने बताया कि उनकी सात वर्षीय बेटी इतनी दूर पैदल नहीं जा सकती और निजी वाहन की सुविधा नहीं होने से स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी रमेश यादव ने कहा कि हाईवे पर न तो जेब्रा क्रॉसिंग है और न ही ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था। ऊपर से बारिश में कीचड़ और फिसलन का खतरा बढ़ जाता है। शिक्षा जरूरी है, लेकिन सुरक्षा पहले है।
विज्ञापन