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Amethi News: श्रम कानून में बदलाव पर जताया विरोध
Mon, 15 Dec 2025 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:46 AM IST
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अमेठी सिटी। संयुक्त मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश और मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान के नेतृत्व में रविवार को कलेक्ट्रेट परिसर में बैठक आयोजित हुई। इसके बाद मजदूर संगठनों और किसान प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने नई श्रम संहिताओं को मजदूर हितों के प्रतिकूल बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताएं लागू कर 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानून समाप्त कर दिए हैं। इस बदलाव से न्यूनतम मजदूरी, स्थायी नियुक्ति, समान काम समान वेतन, बोनस, ट्रेड यूनियन अधिकार और ठेका श्रम नियंत्रण से जुड़े प्रावधान कमजोर पड़े हैं। संगठनों का कहना है कि नई संहिताओं के कई बिंदु स्पष्ट नहीं हैं, जिससे उद्योग प्रबंधन को लाभ मिलने और मजदूर वर्ग पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। वेतन संहिता में कार्य दिवस बढ़ने की संभावना जताई गई।
औद्योगिक संबंध संहिता के प्रावधानों को मजदूर हितों के खिलाफ बताया गया। सामाजिक सुरक्षा संहिता में ईपीएफ और ईएसआई अंशदान घटने की संभावना पर भी चिंता व्यक्त की गई। मजदूर संगठनों ने चारों श्रम संहिताएं निरस्त करने, हड़ताल और संगठन पर दमन समाप्त करने, सभी रोजगार स्थायी करने, न्यूनतम मजदूरी 30 हजार रुपये निर्धारित करने, मनरेगा में 300 दिन रोजगार सुनिश्चित करने, आठ घंटे का कार्य दिवस लागू करने, प्रवासी मजदूरों का राष्ट्रीय पंजीकरण कराने और व्यापक सामाजिक सुरक्षा लागू करने की मांग रखी। इस अवसर पर शिवकुमार पांडेय, छत्रपाल, रामकुमार, भारत कुमार, रामप्रसाद, सुखराज, सुनील सहित कई मजदूर नेता मौजूद रहे। संगठनों ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताएं लागू कर 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानून समाप्त कर दिए हैं। इस बदलाव से न्यूनतम मजदूरी, स्थायी नियुक्ति, समान काम समान वेतन, बोनस, ट्रेड यूनियन अधिकार और ठेका श्रम नियंत्रण से जुड़े प्रावधान कमजोर पड़े हैं। संगठनों का कहना है कि नई संहिताओं के कई बिंदु स्पष्ट नहीं हैं, जिससे उद्योग प्रबंधन को लाभ मिलने और मजदूर वर्ग पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। वेतन संहिता में कार्य दिवस बढ़ने की संभावना जताई गई।
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औद्योगिक संबंध संहिता के प्रावधानों को मजदूर हितों के खिलाफ बताया गया। सामाजिक सुरक्षा संहिता में ईपीएफ और ईएसआई अंशदान घटने की संभावना पर भी चिंता व्यक्त की गई। मजदूर संगठनों ने चारों श्रम संहिताएं निरस्त करने, हड़ताल और संगठन पर दमन समाप्त करने, सभी रोजगार स्थायी करने, न्यूनतम मजदूरी 30 हजार रुपये निर्धारित करने, मनरेगा में 300 दिन रोजगार सुनिश्चित करने, आठ घंटे का कार्य दिवस लागू करने, प्रवासी मजदूरों का राष्ट्रीय पंजीकरण कराने और व्यापक सामाजिक सुरक्षा लागू करने की मांग रखी। इस अवसर पर शिवकुमार पांडेय, छत्रपाल, रामकुमार, भारत कुमार, रामप्रसाद, सुखराज, सुनील सहित कई मजदूर नेता मौजूद रहे। संगठनों ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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