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Amethi News: मजबूत इरादों से आत्मनिर्भर बनीं पूजा
Mon, 20 Apr 2026 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 20 Apr 2026 12:44 AM IST
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शाहगढ़। मजबूत इरादे और सतत प्रयास किसी भी चुनौती को आसान बना देते हैं। दुलापुर खुर्द की पूजा जायसवाल ने इसी सोच को साकार करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उन्हें नई दिशा दी।
पूजा का सपना बचपन से ही कुछ अलग करने का था। विवाह के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। पति रमेश कुमार का सहयोग उनके लिए संबल बना। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अवसर तलाशे और अपनी क्षमता को निखारा। करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और फल संरक्षण का प्रशिक्षण लिया। हर विधा में तीन माह के अभ्यास ने उन्हें स्वरोजगार के लिए तैयार किया।
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने घर से ही महिलाओं को सिखाना शुरू किया। शुरुआत भले छोटी रही, लेकिन मेहनत के दम पर काम ने तेजी से विस्तार किया। अब तक 500 से अधिक महिलाएं उनसे प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनकी पहचान अब गांव से निकलकर जन शिक्षण संस्थान और बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान गौरीगंज तक पहुंच चुकी है। हर बैच से उन्हें लगभग 30 हजार रुपये की आय हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
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पूजा बताती हैं कि उन्होंने हमेशा लक्ष्य तय रखा कि खुद आगे बढ़ते हुए अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने महिलाओं को लेडीज पर्स, कैरी बैग, साइड बैग बनाना सिखाया। साथ ही फल संरक्षण के तहत अचार और सिरका तैयार करने की विधियां भी बताईं। इससे कई महिलाएं घर बैठे काम कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। (संवाद)
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पूजा का सपना बचपन से ही कुछ अलग करने का था। विवाह के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। पति रमेश कुमार का सहयोग उनके लिए संबल बना। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अवसर तलाशे और अपनी क्षमता को निखारा। करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और फल संरक्षण का प्रशिक्षण लिया। हर विधा में तीन माह के अभ्यास ने उन्हें स्वरोजगार के लिए तैयार किया।
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प्रशिक्षण के बाद उन्होंने घर से ही महिलाओं को सिखाना शुरू किया। शुरुआत भले छोटी रही, लेकिन मेहनत के दम पर काम ने तेजी से विस्तार किया। अब तक 500 से अधिक महिलाएं उनसे प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनकी पहचान अब गांव से निकलकर जन शिक्षण संस्थान और बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान गौरीगंज तक पहुंच चुकी है। हर बैच से उन्हें लगभग 30 हजार रुपये की आय हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
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पूजा बताती हैं कि उन्होंने हमेशा लक्ष्य तय रखा कि खुद आगे बढ़ते हुए अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने महिलाओं को लेडीज पर्स, कैरी बैग, साइड बैग बनाना सिखाया। साथ ही फल संरक्षण के तहत अचार और सिरका तैयार करने की विधियां भी बताईं। इससे कई महिलाएं घर बैठे काम कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। (संवाद)