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प्लेटलेट्स कम होने पर जिले में नहीं हो सकता इलाज
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गौरीगंज (अमेठी)। डेंगू व मलेरिया से प्रत्येक वर्ष होने वाली मौतों से लोगों को बचाने के लिए सरकार की ओर से जारी हाई अलर्ट के बाद जिले का स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में छह बेड का एक वार्ड सुरक्षित करने के साथ ही जांच की सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं। अस्पताल में किट के माध्यम से जांच की सुविधा होने के बावजूद डेंगू की पुष्टि होने व संक्रमितों में प्लेटलेट्स कम होने पर जिले में उपचार संभव नहीं है।
बरसात के मौसम में जमा गंदे पानी से फैलने वाले डेंगू व मलेरिया के मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने व मृत्युदर में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है। हाई अलर्ट जारी होने के बाद निदेशक स्वास्थ्य ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र जारी कर अस्पतालों में व्यवस्था दुरुस्त रखते हुए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एंटी लार्वा का नियमित छिड़काव करते हुए साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ डोर-टू-डोर टीम गठित कर मरीजों को चिह्नित करने को कहा है।
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शासन का पत्र मिलने के बाद सीएमओ डॉ. आशुतोष दुबे के आदेश पर संयुक्त जिला चिकित्सालय में छह बेड का एक वार्ड अतिरिक्त रूप से सुरक्षित कर दिया है। इतना ही नहीं संयुक्त जिला चिकित्सालय में डेंगू की जांच के लिए विशेष कार्ड की व्यवस्था के साथ प्लेटलेट्स की जांच की व्यवस्था कराई गई है।
जांच के बाद मरीज में डेंगू व मलेरिया की पुष्टि होने के बाद फिलहाल उपचार के लिए आवश्यक संसाधन नहीं होने से पीड़ितों का उपचार जिले में संभव नहीं है। संक्रमितों में प्लेटलेट्स कम होने पर दवाओं से रिकवरी की कोशिश भले ही चिकित्सक करें लेकिन मरीजों में प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को रेफर करना ही डॉक्टरों की मजबूरी है।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि डेंगू/मलेरिया मरीजों को आरक्षित वार्ड में भर्ती कर उपचार की व्यवस्था बनाई गई है। अब तक जिले में कोई भी संक्रमित अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। सामान्य संक्रमित का उपचार दवा से किया जा सकता है, आवश्यक उपकरण व जांच प्रबंध नहीं होने से संक्रमण बढ़ने पर रेफर करना मजबूरी है।
होगा दवाओं का छिड़काव : सीएमएस
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि आशा बहू व एएनएम को गांवों में लोगों को जागरूक करने के साथ पानी को एकत्र नहीं होने देने तथा लक्षण दिखने पर अस्पताल में इलाज कराने के लिए प्रेरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अस्पताल में मरीजों का उपचार हो सके इसके लिए आवश्यक दवा व उपकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
डेंगू व इंसेफ्लाइटिस के लक्षण
संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. नीरज वर्मा ने बताया कि डेंगू में मरीजों को तेज बुखार के अलावा सिर व जोड़ों के दर्द के साथ सर्दी जुकाम व गले में खराश बनी रहती है। मरीज तेज बुखार आने के बाद बेहोश हो जाता है और गले में अकड़न हो जाती है। डॉक्टर ने बताया कि डेंगू में शरीर को ठंडे पानी से लगातार साफ करने के साथ मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में छह बेड का एक वार्ड सुरक्षित करने के साथ ही जांच की सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं। अस्पताल में किट के माध्यम से जांच की सुविधा होने के बावजूद डेंगू की पुष्टि होने व संक्रमितों में प्लेटलेट्स कम होने पर जिले में उपचार संभव नहीं है।
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बरसात के मौसम में जमा गंदे पानी से फैलने वाले डेंगू व मलेरिया के मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने व मृत्युदर में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है। हाई अलर्ट जारी होने के बाद निदेशक स्वास्थ्य ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र जारी कर अस्पतालों में व्यवस्था दुरुस्त रखते हुए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एंटी लार्वा का नियमित छिड़काव करते हुए साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ डोर-टू-डोर टीम गठित कर मरीजों को चिह्नित करने को कहा है।
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शासन का पत्र मिलने के बाद सीएमओ डॉ. आशुतोष दुबे के आदेश पर संयुक्त जिला चिकित्सालय में छह बेड का एक वार्ड अतिरिक्त रूप से सुरक्षित कर दिया है। इतना ही नहीं संयुक्त जिला चिकित्सालय में डेंगू की जांच के लिए विशेष कार्ड की व्यवस्था के साथ प्लेटलेट्स की जांच की व्यवस्था कराई गई है।
जांच के बाद मरीज में डेंगू व मलेरिया की पुष्टि होने के बाद फिलहाल उपचार के लिए आवश्यक संसाधन नहीं होने से पीड़ितों का उपचार जिले में संभव नहीं है। संक्रमितों में प्लेटलेट्स कम होने पर दवाओं से रिकवरी की कोशिश भले ही चिकित्सक करें लेकिन मरीजों में प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को रेफर करना ही डॉक्टरों की मजबूरी है।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि डेंगू/मलेरिया मरीजों को आरक्षित वार्ड में भर्ती कर उपचार की व्यवस्था बनाई गई है। अब तक जिले में कोई भी संक्रमित अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। सामान्य संक्रमित का उपचार दवा से किया जा सकता है, आवश्यक उपकरण व जांच प्रबंध नहीं होने से संक्रमण बढ़ने पर रेफर करना मजबूरी है।
होगा दवाओं का छिड़काव : सीएमएस
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि आशा बहू व एएनएम को गांवों में लोगों को जागरूक करने के साथ पानी को एकत्र नहीं होने देने तथा लक्षण दिखने पर अस्पताल में इलाज कराने के लिए प्रेरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अस्पताल में मरीजों का उपचार हो सके इसके लिए आवश्यक दवा व उपकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
डेंगू व इंसेफ्लाइटिस के लक्षण
संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. नीरज वर्मा ने बताया कि डेंगू में मरीजों को तेज बुखार के अलावा सिर व जोड़ों के दर्द के साथ सर्दी जुकाम व गले में खराश बनी रहती है। मरीज तेज बुखार आने के बाद बेहोश हो जाता है और गले में अकड़न हो जाती है। डॉक्टर ने बताया कि डेंगू में शरीर को ठंडे पानी से लगातार साफ करने के साथ मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए।