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Amethi News: जिला अस्पताल में पीएम जन औषधि केंद्र का संचालन बंद, मरीज परेशान
Sat, 01 Feb 2025 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 01 Feb 2025 01:07 AM IST
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जिला अस्पताल के ओपीडी कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
अमेठी सिटी। मरीजों को सस्ती दरों पर जेनरिक दवाएं मुहैया कराने को लेकर जिला अस्पताल में स्थित पीएम जन औषधि केंद्र का संचालन बंद हो गया है। केंद्र के लाइसेंस का नवीनीकरण न होने के चलते यह स्थिति बनी है। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, निजी मेडिकल स्टोर संचालक महंगी दवाइयां देकर मरीजों का शोषण कर रहे हैं।
मरीजों को सस्ती दरों पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी में पीएम जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। गौरीगंज के असैदापुर में संचालित जिला अस्पताल में वर्ष 2022 में जन औषधि केंद्र खोलने की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2023 में केंद्र का संचालन शुरू हुआ। इससे मरीजों को सस्ती दरों पर दवाएं मिलने लगी थीं।
अक्तूबर माह में नामित फर्म के लिए नवीनीकरण आदि के संबंध में शासन की ओर से पत्राचार किया गया था, लेकिन नामित फर्म के नवीनीकरण में देरी होने से जन औषधि केंद्र के संचालन पर रोक लगा दी गई। जनवरी में केंद्र का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। अब सस्ती दरों पर मरीजों को जिला अस्पताल में दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी मेडिकल स्टोरों की चांदी
जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र के खुलने से मरीजों को बड़ी राहत मिली थी। सस्ती दवाएं मिलने के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा था। जिला अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों पर लोगों की भीड़ भी कम हो गई थी। लेकिन औषधि केंद्र बंद हो जाने से मेडिकल स्टोरों की फिर से चांदी हो गई है। निजी मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों का जमकर शोषण कर रहे हैं।
चिकित्सक ने लिखी बाहर की दवा तो जेब करनी पड़ी ढीली
मरीजों के अनुसार यदि जिला अस्पताल के चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं तो वह जन औषधि केंद्र से कम दाम में मिल जाती हैं। अब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों पर जेब ढीली करनी पड़ रही है। शुक्रवार को अमेठी निवासी विनोद मिश्र पैर में दर्द की समस्या को लेकर ऑर्थो विभाग में दिखाने आए थे। चिकित्सक ने जो दवाएं लिखीं, उनमें से कुछ दवाएं अंदर से मिलीं तो कुछ बाहर से मजबूरन लेनी पड़ीं। कहा कि जन औषधि केंद्र का संचालन बंद होने से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की सरकार की योजना कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में मजबूरन महंगी दरों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
निवेदिता मिश्र ने महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दिखाया। कुछ दवाएं अस्पताल से मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं। जन औषधि केंद्र पर ताला बंद देखकर लौटना पड़ा। इसी तरह दिनेश तिवारी, सौरभ तिवारी ने बताया कि अस्पताल में जन औषधि केंद्र के बंद होने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के संचालन के लिए टेंडर शासन स्तर से होता है। कमिश्नर ड्रग लाइसेंस का नवीनीकरण करते हैं। बताया कि पहली फर्म का लाइसेंस निरस्त हो गया है। वहीं दूसरी फर्म को अमेठी में केंद्र के संचालन का टेंडर मिला है। फर्म की ओर से मेडिकल स्टोर के संचालन के लिए लाइसेंस आदि की प्रक्रिया की जा रही है। लाइसेंस मिलते ही संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
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मरीजों को सस्ती दरों पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी में पीएम जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। गौरीगंज के असैदापुर में संचालित जिला अस्पताल में वर्ष 2022 में जन औषधि केंद्र खोलने की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2023 में केंद्र का संचालन शुरू हुआ। इससे मरीजों को सस्ती दरों पर दवाएं मिलने लगी थीं।
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अक्तूबर माह में नामित फर्म के लिए नवीनीकरण आदि के संबंध में शासन की ओर से पत्राचार किया गया था, लेकिन नामित फर्म के नवीनीकरण में देरी होने से जन औषधि केंद्र के संचालन पर रोक लगा दी गई। जनवरी में केंद्र का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। अब सस्ती दरों पर मरीजों को जिला अस्पताल में दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी मेडिकल स्टोरों की चांदी
जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र के खुलने से मरीजों को बड़ी राहत मिली थी। सस्ती दवाएं मिलने के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा था। जिला अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों पर लोगों की भीड़ भी कम हो गई थी। लेकिन औषधि केंद्र बंद हो जाने से मेडिकल स्टोरों की फिर से चांदी हो गई है। निजी मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों का जमकर शोषण कर रहे हैं।
चिकित्सक ने लिखी बाहर की दवा तो जेब करनी पड़ी ढीली
मरीजों के अनुसार यदि जिला अस्पताल के चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं तो वह जन औषधि केंद्र से कम दाम में मिल जाती हैं। अब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों पर जेब ढीली करनी पड़ रही है। शुक्रवार को अमेठी निवासी विनोद मिश्र पैर में दर्द की समस्या को लेकर ऑर्थो विभाग में दिखाने आए थे। चिकित्सक ने जो दवाएं लिखीं, उनमें से कुछ दवाएं अंदर से मिलीं तो कुछ बाहर से मजबूरन लेनी पड़ीं। कहा कि जन औषधि केंद्र का संचालन बंद होने से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की सरकार की योजना कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में मजबूरन महंगी दरों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
निवेदिता मिश्र ने महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दिखाया। कुछ दवाएं अस्पताल से मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं। जन औषधि केंद्र पर ताला बंद देखकर लौटना पड़ा। इसी तरह दिनेश तिवारी, सौरभ तिवारी ने बताया कि अस्पताल में जन औषधि केंद्र के बंद होने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के संचालन के लिए टेंडर शासन स्तर से होता है। कमिश्नर ड्रग लाइसेंस का नवीनीकरण करते हैं। बताया कि पहली फर्म का लाइसेंस निरस्त हो गया है। वहीं दूसरी फर्म को अमेठी में केंद्र के संचालन का टेंडर मिला है। फर्म की ओर से मेडिकल स्टोर के संचालन के लिए लाइसेंस आदि की प्रक्रिया की जा रही है। लाइसेंस मिलते ही संचालन शुरू करा दिया जाएगा।