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Amethi News: 384 करोड़ लुटाने के मामले में एक और मुकदमा

Sun, 08 Jan 2023 09:23 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jan 2023 09:23 PM IST
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one more case filed in 384 crore scandal
गौरीगंज (अमेठी)। हाईवे पर दो बाईपास बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान अफसरों द्वारा 384 करोड़ रुपये लुटाने के मामले में शासन के साथ एनएचएआई भी सक्रिय को गया है। एनएचएआई ने शनिवार को अपने अधिवक्ता के माध्यम से डीएम कोर्ट में अंतिम मुकदमा दायर किया। केस फाइल होने के बाद कंजास गांव के 197 किसानों को नोटिस जारी किया है। मुकदमे में शामिल किसानों को अपना पक्ष रखने के लिए 28 जनवरी तक का समय दिया गया है।
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लखनऊ से वाराणसी तक जाने वाला एनएच-56 जिले की मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के 45 गांवों से होकर गुजरता है। इसकी जिले में लंबाई 49.5 किमी. है। वर्ष 2013 में केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने एनएच-56 के चौड़ीकरण को मंजूरी दी थी। चौड़ीकरण के दौरान जगदीशपुर व मुसाफिरखाना में बाईपास बनाए गए थे।
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दोनों बाईपास में कुल 30 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। भूमि अधिग्रहण के दौरान अफसरों पर अंदरखाने सरकारी धन लुटाने के आरोप लगे। बताया गया कि अफसरों ने उन 30 गांवों के किसानों को भी एनएच से सटे 15 गांवों के किसानों के बराबर मुआवजा दे दिया, जिनकी जमीनें कृषि उपयोग की थीं। एनएचएआई व राजस्व अफसरों द्वारा की गई गड़बड़ी से एनएचएआई को 384 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करना पड़ा।
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मामले का पूरा खुलासा करीब चार माह पूर्व हुआ जब डीएम राकेश कुमार मिश्र ने संदेह के आधार पर इसकी जांच कराई। जांच अधिकारी रहे जिले के तत्कालीन एडीएम न्यायिक राजकुमार दुबे ने अधिग्रहण के लिए गांवों का अवार्ड व मुआवजा बांटने वाले कई एसडीएम को दोषी पाया। साथ ही यह भी पता चला कि सब कुछ जानने के बावजूद एनएचएआई भी 2020 में महज 10 गांवों के 1062 किसानों के खिलाफ डीएम कोर्ट में वाद दायर करने के बाद से चुप्पी साधे हुए है।
मामला सामने आने के बाद डीएम ने एनएचएआई पर सभी किसानों को नोटिस जारी कराने का दबाव बनाया। डीएम के दबाव में एनएचएआई ने तीन बार में (पहली बार 15 गांवों के 1088, दूसरी बार तीन गांवों के 675 व तीसरी बार एक गांव के 30 किसान) 1793 किसानों के खिलाफ वाद डीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया। अब एनएचएआई ने कंजास गांव के 197 किसानों के खिलाफ वाद दायर कर दिया है। इन किसानों को कोर्ट में प्रस्तुत होकर स्वयं या वकील के माध्यम से आरोपों पर जवाब देने के लिए 28 जनवरी तक का समय दिया है।

एनएचएआई की भूमिका संदिग्ध
384 करोड़ की भारी भरकम राशि लुटाने के मामले में एनएचएआई की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। संदेह इसलिए भी मजबूत होता है कि यदि उसे तीन साल पहले 2020 में ही गड़बड़ी का पता चला तो सभी गांवों के बजाय महज 10 गांव के किसानों के खिलाफ वाद दाखिल कर चुप्पी क्यों साध ली। अन्य गांवों के किसानों पर केस करने में तीन साल क्यों लगा दिया।
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