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टेल तक नहीं पहुंचा पानी, नहर फिर बंद

Tue, 19 Jul 2022 12:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 12:42 AM IST
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no water till tale in canals, now closed again
गौरीगंज (अमेठी)। सावन में झमाझम बारिश की उम्मीद लिए बैठे किसानों को भीषण गर्मी का दंश झेलना पड़ रहा है। बरसात न होने से धान की फसलें सूख रहीं हैं तो नहरें भी किसानों को मौके पर दगा दे रही हैं। कहने के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है, लेकिन बिना टेल तक पहुंचे ही नहर बंद करने का फरमान जारी हो जाता है।
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यही हाल जायस रजबहा में देखने को मिला। 10 दिन पूर्व इस नहर में छोड़ा गया पानी टेल तक पहुंचने से पहले सोमवार सुबह बंद कर दिया गया। ऐसे में 58 किमी. के सापेक्ष 36 किमी. तक ही रजबहा में पानी पहुंच सका। आगे के 22 किमी दूरी के किसानों को पानी न मिल पाने से एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी।
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जिले में स्थित 58.4 किमी लंबी जायस रजबहा में जामो के अहुरी से पानी छोड़ा जाता है। इससे गौरीगंज, अमेठी व संग्रामपुर ब्लॉक क्षेत्र तक के किसानों को पानी मिलता है। इस रजबहा से 8144 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। जायस रजबहा से सिंचित होने वाली भूमि को पानी मुहैया कराने के लिए गत आठ जुलाई को पानी छोड़ा गया था। रजबहा में प्रतिदिन 467 क्यूसेक पानी की आवश्यकता थी। लेकिन क्षमता के मुताबिक रजबहा में प्रतिदिन पानी कम मिला।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार नौ दिनों में कुल 4203 क्यूसेक पानी की जरूरत थी। इसके सापेक्ष महज 2529 क्यूसेक पानी से ही किसानों को संतोष करना पड़ा। जो जरूरत से बहुत कम था। आठ जुलाई को रजबहा में छोड़े गए पानी का बहाव कम होने के चलते 18 जुलाई को नहर के प्रारंभ से 36 किलोमीटर दूर सैठा गांव तक ही पानी पहुंचा था कि रजबहा बंद करने का आदेश आ गया।
जायस रजबहा में पानी छोड़ने का रोस्टर कब जारी होगा, इसका कोई ठोस जवाब विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है। शारदा सहायक खंड-41 अधिशाषी अभियंता धर्मेद्र वर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में पानी की मांग अधिक है। मांग के अनुसार पानी कम मिल पा रहा है। सभी नहरों व माइनर से किसानों को पानी मिले। इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।

सैठा गांव तक पानी पहुंचने के बाद बंद करने के आदेश से 3090 हेक्टेयर सिंचित भूमि को पानी का इंतजार है। समय पर पानी न मिल पाने से धान की रोपाई व फसल उत्पाद में कमी आने की भी संभावना है। कृषि विभाग के अनुसार 3090 हेक्टेयर में एक लाख 17 हजार 420 क्विंटल धान का उत्पादन होने की संभावना थी। जिसमें अब कमी आएगी।
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