{"_id":"624c792090ebce27fb127ff6","slug":"no-purchase-at-government-centers-crowd-in-markets-amethi-news-lko624738973","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी केंद्रों पर बोहनी नहीं, मंडी में भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी केंद्रों पर बोहनी नहीं, मंडी में भीड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेठी। बाहर देशों में निर्यात होने के चलते गेहूं के मूल्य में उछाल आया है। गेहूं का बाजार भाव 2050 रुपये पार कर गया है। ऐसे में जहां गेहूं के बाजार भाव मूल्य में उछाल आने से किसान सरकारी क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ रहे हैं वहीं सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। बाजार भाव अच्छा होने एवं बगैर झंझट के आसानी से किसान अपनी उपज भेज कर तत्काल पैसा पा रहे हैं।
सरकार की नीतियों एवं यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं के मूल्य में उछाल आया है। इसका फायदा सीधे किसानों को मिल रहा है। किसान बगैर किसी झंझट के अपनी उपज का सरकारी रेट से ज्यादा मूल्य नगद प्राप्त कर रहे हैं। गौरतलब है कि सरकार की ओर से किसानों के उपज खरीद के लिए सरकारी क्रय केंद्र जगह-जगह खोले गए हैं।
इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि बाजार में गेहूं का प्रति क्विंटल मूल्य 2050 रुपये पार कर गया है। सरकारी खरीद शुरू होने के पहले तो गेहूं के भाव में उछाल लाता था, लेकिन सरकारी खरीद शुरू होने के बाद बाजार रेट सरकारी रेट से कम होता था। लेकिन इस बार सरकारी खरीद शुरू होने के बाद गेहूं के भाव में तेजी आई है।
विज्ञापन
इस समय क्षेत्र में गेहूं की कटाई मड़ाई तेजी से शुरू हो गई है। किसान उपज खरीदने को लेकर एक अप्रैल से क्षेत्र में खुले सरकारी क्रय केंद्र संचालित हो गए हैं। बावजूद इसके अभी तक सरकारी क्रय केंद्र पर बोहनी नहीं हो सकी। गेहूं के भाव बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक होने के बाद सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हुए हैं। बाजार में गेहूं की आवक बढ़ गई है।
लोग इसका कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बाजार से गेहूं की खरीद कराए जाने, बाहर देशों में निर्यात एवं रूस यूक्रेन के बीच हुए युद्ध को बता रहे हैं। किसान बाजार भाव बढ़ने को लेकर काफी खुश दिखाई दे रहे हैं। अगर बाजार भाव इसी तरह चढ़ता रहा तो सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं हो पाएगा।
बाजार भाव में आई तेजी
व्यवसायी आनंद उर्फ पदम अग्रवाल ने बताया कि गेहूं का बाजार भाव चढ़ा हुआ है। बताया कि अच्छा भाव व नकद धनराशि मिलने के चलते किसान अपनी उपज बाजार में बेच रहे हैं। बाजार भाव चढ़ने का कारण रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध है। गेहूं के बाजार भाव में और उछाल आने की उम्मीद है। व्यवसायी विजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा खरीदारी किए जाने के चलते गेहूं का बाजार भाव चढ़ा हुआ है। बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक बाजार का भाव है। जिसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। व्यवसायी सौरभ भालोठिया ने बताया कि बाहर देशों में निर्यात होने के चलते गेहूं के बाजार भाव में तेजी आई है। गौरीगंज में रैक प्वाइंट होने से काफी सुविधा व्यवसायियों को मिली है। बाजार भाव में तेजी का फायदा किसानों को भी मिल रहा है।
क्या कहते हैं किसान
किसान सत्येंद्र कुमार पाठक ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर उपज बेचने के लिए तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाजार भाव अगर एक रुपये कम भी होता है तो हमारी उपज आसानी से बगैर झंझट के बिक जाती है और नगद मूल्य प्राप्त हो जाता है। किसान कृपा शंकर तिवारी ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराइए उसके बाद तो टोकन लीजिए। उपज की तौल कराने के लिए कई दिनों तक क्रय केंद्र और अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ता है। अगर बाजार मूल्य इसी तरह बरकरार रहे तो किसानों को तमाम परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा और उनकी उपज का मूल्य तत्काल मिल जाएगा।
किसान शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकार को किसानों की उपज का अच्छा मूल्य मिले इस दिशा में विशेष कार्य करना चाहिए। कृषि प्रधान देश में क्षेत्रवार होने वाली उपज को लेकर ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए। जिससे किसान आर्थिक रूप से सशक्त होकर देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। किसान विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि बाजार का मूल्य समर्थन मूल्य से अधिक है। बगैर किसी परेशानी के छोटे व्यवसायी हमारी उपज बाजार भाव से 20-30 रुपये कम में भी लेते हैं तो ढुलाई, भराई के साथ ही अन्य अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता और नगद धनराशि मौके पर मिल जा रही है। बाजार भाव अच्छा होने से किसानों को काफी राहत मिली है।
अभी नहीं हुई बोहनी
विपणन निरीक्षक एवं क्रय केंद्र प्रभारी एनके सिंह ने बताया कि अभी तक गेहूं की खरीद नहीं हुई है। उन्होंने बताया किसान आ रहे हैं लेकिन अभी उनकी उपज तैयार नहीं है। 10 अप्रैल से खरीद होने की उम्मीद है। उन्होंने समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होने से क्रय केंद्र पर कम खरीद होने की संभावना जताई।
विज्ञापन
सरकार की नीतियों एवं यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं के मूल्य में उछाल आया है। इसका फायदा सीधे किसानों को मिल रहा है। किसान बगैर किसी झंझट के अपनी उपज का सरकारी रेट से ज्यादा मूल्य नगद प्राप्त कर रहे हैं। गौरतलब है कि सरकार की ओर से किसानों के उपज खरीद के लिए सरकारी क्रय केंद्र जगह-जगह खोले गए हैं।
विज्ञापन
इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि बाजार में गेहूं का प्रति क्विंटल मूल्य 2050 रुपये पार कर गया है। सरकारी खरीद शुरू होने के पहले तो गेहूं के भाव में उछाल लाता था, लेकिन सरकारी खरीद शुरू होने के बाद बाजार रेट सरकारी रेट से कम होता था। लेकिन इस बार सरकारी खरीद शुरू होने के बाद गेहूं के भाव में तेजी आई है।
विज्ञापन
इस समय क्षेत्र में गेहूं की कटाई मड़ाई तेजी से शुरू हो गई है। किसान उपज खरीदने को लेकर एक अप्रैल से क्षेत्र में खुले सरकारी क्रय केंद्र संचालित हो गए हैं। बावजूद इसके अभी तक सरकारी क्रय केंद्र पर बोहनी नहीं हो सकी। गेहूं के भाव बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक होने के बाद सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हुए हैं। बाजार में गेहूं की आवक बढ़ गई है।
लोग इसका कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बाजार से गेहूं की खरीद कराए जाने, बाहर देशों में निर्यात एवं रूस यूक्रेन के बीच हुए युद्ध को बता रहे हैं। किसान बाजार भाव बढ़ने को लेकर काफी खुश दिखाई दे रहे हैं। अगर बाजार भाव इसी तरह चढ़ता रहा तो सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं हो पाएगा।
बाजार भाव में आई तेजी
व्यवसायी आनंद उर्फ पदम अग्रवाल ने बताया कि गेहूं का बाजार भाव चढ़ा हुआ है। बताया कि अच्छा भाव व नकद धनराशि मिलने के चलते किसान अपनी उपज बाजार में बेच रहे हैं। बाजार भाव चढ़ने का कारण रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध है। गेहूं के बाजार भाव में और उछाल आने की उम्मीद है। व्यवसायी विजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा खरीदारी किए जाने के चलते गेहूं का बाजार भाव चढ़ा हुआ है। बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक बाजार का भाव है। जिसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। व्यवसायी सौरभ भालोठिया ने बताया कि बाहर देशों में निर्यात होने के चलते गेहूं के बाजार भाव में तेजी आई है। गौरीगंज में रैक प्वाइंट होने से काफी सुविधा व्यवसायियों को मिली है। बाजार भाव में तेजी का फायदा किसानों को भी मिल रहा है।
क्या कहते हैं किसान
किसान सत्येंद्र कुमार पाठक ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर उपज बेचने के लिए तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाजार भाव अगर एक रुपये कम भी होता है तो हमारी उपज आसानी से बगैर झंझट के बिक जाती है और नगद मूल्य प्राप्त हो जाता है। किसान कृपा शंकर तिवारी ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराइए उसके बाद तो टोकन लीजिए। उपज की तौल कराने के लिए कई दिनों तक क्रय केंद्र और अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ता है। अगर बाजार मूल्य इसी तरह बरकरार रहे तो किसानों को तमाम परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा और उनकी उपज का मूल्य तत्काल मिल जाएगा।
किसान शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकार को किसानों की उपज का अच्छा मूल्य मिले इस दिशा में विशेष कार्य करना चाहिए। कृषि प्रधान देश में क्षेत्रवार होने वाली उपज को लेकर ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए। जिससे किसान आर्थिक रूप से सशक्त होकर देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। किसान विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि बाजार का मूल्य समर्थन मूल्य से अधिक है। बगैर किसी परेशानी के छोटे व्यवसायी हमारी उपज बाजार भाव से 20-30 रुपये कम में भी लेते हैं तो ढुलाई, भराई के साथ ही अन्य अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता और नगद धनराशि मौके पर मिल जा रही है। बाजार भाव अच्छा होने से किसानों को काफी राहत मिली है।
अभी नहीं हुई बोहनी
विपणन निरीक्षक एवं क्रय केंद्र प्रभारी एनके सिंह ने बताया कि अभी तक गेहूं की खरीद नहीं हुई है। उन्होंने बताया किसान आ रहे हैं लेकिन अभी उनकी उपज तैयार नहीं है। 10 अप्रैल से खरीद होने की उम्मीद है। उन्होंने समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होने से क्रय केंद्र पर कम खरीद होने की संभावना जताई।